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Amethi News: औद्योगिक क्षेत्र में 75 में से 64 प्रतिष्ठानों पर लटक रहे ताले
Mon, 16 Dec 2024 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 16 Dec 2024 12:03 AM IST
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अमेठी सिटी। प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में शामिल करने के लिए सरकार की ओर से कई उपाय किए जा रहे हैं। इसी क्रम में औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित बंद पड़ी कंपनियों या प्रतिष्ठानों को संचालित करने के लिए प्रयास हो रहा है। जिले के 83 प्रतिष्ठानों की सूची श्रम विभाग को सौंपी गई है। करीब 75 कंपनियों व प्रतिष्ठानों में सर्वेक्षण कर लिया गया है, जिसमें 64 पर ताले लटक रहे हैं।
जिले में औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो जगदीशपुर, त्रिशुंडी, कौहार, गौरीगंज आदि में कंपनियां स्थापित हैं। इन्हें यूपीसीडा की ओर से औद्योगिक क्षेत्र भी घोषित किया गया है। जहां कई फर्मों को भूमि भी आवंटित की गई है। इसमें से अधिकांश प्रतिष्ठानों ने भूमि आवंटन के बाद अपना कार्य बंद कर रखा है। स्थिति यह है कि कंपनियों या प्रतिष्ठानों पर लंबे समय से ताले लटके होने के चलते परिसर में झाड़ियां उग आई हैं।
ऐसे में सरकार की मंशा है कि इन प्रतिष्ठानों का सर्वे कर इन्हें फिर से शुरू किया जाए। ऐसे में यूपीसीडा की ओर से इनका फैक्टरी एक्ट में पंजीयन भी कराया जाना है। फिलहाल श्रम विभाग के माध्यम से सर्वेक्षण किया जा रहा है। 83 में से 75 का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अन्य कंपनियों का भी सर्वेक्षण किया जा रहा है। जिसमें से अभी तक मात्र 11 ही संचालित पाई गई हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी आरबी लाल ने बताया कि अलग-अलग ट्रेड की फर्म के लिए भूमि का आवंटन किया गया है। सहायक श्रम आयुक्त गोविंद यादव ने बताया कि सर्वेक्षण के साथ ही कंपनियों की वर्तमान प्रगति की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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अधूरे निर्माण के बाद काम किया ठप
जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में लोगों ने भूमि आवंटन के बाद उत्पादन कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्थिति यह है कि आधे-अधूरे निर्माण के बाद कामकाज ठप कर दिया गया है। कई जगह चहारदीवारी बनाई गई तो कुछ जगहों पर टिनशेड भी बनाए गए हैं। जिसमें फर्म का नाम व पता भी लिखा गया है। इसके आगे का कार्य कई वर्ष से ठप पड़ा है।
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जिले में औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो जगदीशपुर, त्रिशुंडी, कौहार, गौरीगंज आदि में कंपनियां स्थापित हैं। इन्हें यूपीसीडा की ओर से औद्योगिक क्षेत्र भी घोषित किया गया है। जहां कई फर्मों को भूमि भी आवंटित की गई है। इसमें से अधिकांश प्रतिष्ठानों ने भूमि आवंटन के बाद अपना कार्य बंद कर रखा है। स्थिति यह है कि कंपनियों या प्रतिष्ठानों पर लंबे समय से ताले लटके होने के चलते परिसर में झाड़ियां उग आई हैं।
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ऐसे में सरकार की मंशा है कि इन प्रतिष्ठानों का सर्वे कर इन्हें फिर से शुरू किया जाए। ऐसे में यूपीसीडा की ओर से इनका फैक्टरी एक्ट में पंजीयन भी कराया जाना है। फिलहाल श्रम विभाग के माध्यम से सर्वेक्षण किया जा रहा है। 83 में से 75 का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अन्य कंपनियों का भी सर्वेक्षण किया जा रहा है। जिसमें से अभी तक मात्र 11 ही संचालित पाई गई हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी आरबी लाल ने बताया कि अलग-अलग ट्रेड की फर्म के लिए भूमि का आवंटन किया गया है। सहायक श्रम आयुक्त गोविंद यादव ने बताया कि सर्वेक्षण के साथ ही कंपनियों की वर्तमान प्रगति की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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अधूरे निर्माण के बाद काम किया ठप
जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में लोगों ने भूमि आवंटन के बाद उत्पादन कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्थिति यह है कि आधे-अधूरे निर्माण के बाद कामकाज ठप कर दिया गया है। कई जगह चहारदीवारी बनाई गई तो कुछ जगहों पर टिनशेड भी बनाए गए हैं। जिसमें फर्म का नाम व पता भी लिखा गया है। इसके आगे का कार्य कई वर्ष से ठप पड़ा है।