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Amethi News: चिकित्सक और संसाधनों की कमी, ट्रॉमा सेंटर की हालत पीएचसी से भी बदतर
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ट्रॉमा सेंटर।
जगदीशपुर (अमेठी)। इकलौता ट्रॉमा सेंटर कहने को तो बड़े हादसों और आपात स्थितियों के इलाज के लिए बना है, लेकिन सुविधाएं पीएचसी से भी कमजोर हैं। चिकित्सकों, उपकरणों और स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है।
यहां औसतन प्रतिदिन करीब 250 मरीज ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड मशीन बिना रेडियोलॉजिस्ट के धूल फांक रही है, ईसीजी, डिजिटल एक्सरे जैसी मूलभूत जांच की भी सुविधा नहीं है। नेत्र, दंत और ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से संबंधित मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। महिला चिकित्सक की लगातार अनुपस्थिति के कारण महिला मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
चिकित्सकों और कर्मियों की स्थिति
ट्रॉमा सेंटर में एनेस्थेटिस्ट के दो पद सृजित हैं, जिनमें डॉ. सुरेश सचान तैनात हैं, जबकि डॉ. प्राची शुक्ला लंबे अवकाश पर हैं। आर्थोपेडिक सर्जन के दो पदों में से केवल डॉ. अमित कुमार कार्यरत हैं। जनरल सर्जन के दोनों पद रिक्त हैं, डॉ. रजनी कुमारी भी लगातार छुट्टी पर हैं। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के तीन पदों में से दो पर डॉ. आत्मेश द्विवेदी और डॉ. केडी शर्मा की तैनाती है, एक पद रिक्त है। संविदा स्टाफ नर्स के 15 पदों में से आठ रिक्त हैं। लैब टेक्नीशियन के दो पदों में से एक पर ही नियुक्ति है। एक्सरे टेक्नीशियन एक भी नहीं है।
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मरीजों की जुबानी
शगुफ्ता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में महिला चिकित्सक कभी नहीं मिलतीं। शमशीर अहमद ने कहा कि अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। मोनू ने कहा कि ईसीजी की सुविधा नहीं है। शानू ने कहा कि आंख, दांत, कान व गले के मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों की तैनाती बढ़ाई गई है। शेष रिक्त पदों और उपकरणों की जरूरत संबंधी पत्र शासन को भेजा गया है। जल्द ही व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।
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यहां औसतन प्रतिदिन करीब 250 मरीज ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड मशीन बिना रेडियोलॉजिस्ट के धूल फांक रही है, ईसीजी, डिजिटल एक्सरे जैसी मूलभूत जांच की भी सुविधा नहीं है। नेत्र, दंत और ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से संबंधित मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। महिला चिकित्सक की लगातार अनुपस्थिति के कारण महिला मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
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चिकित्सकों और कर्मियों की स्थिति
ट्रॉमा सेंटर में एनेस्थेटिस्ट के दो पद सृजित हैं, जिनमें डॉ. सुरेश सचान तैनात हैं, जबकि डॉ. प्राची शुक्ला लंबे अवकाश पर हैं। आर्थोपेडिक सर्जन के दो पदों में से केवल डॉ. अमित कुमार कार्यरत हैं। जनरल सर्जन के दोनों पद रिक्त हैं, डॉ. रजनी कुमारी भी लगातार छुट्टी पर हैं। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के तीन पदों में से दो पर डॉ. आत्मेश द्विवेदी और डॉ. केडी शर्मा की तैनाती है, एक पद रिक्त है। संविदा स्टाफ नर्स के 15 पदों में से आठ रिक्त हैं। लैब टेक्नीशियन के दो पदों में से एक पर ही नियुक्ति है। एक्सरे टेक्नीशियन एक भी नहीं है।
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मरीजों की जुबानी
शगुफ्ता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में महिला चिकित्सक कभी नहीं मिलतीं। शमशीर अहमद ने कहा कि अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। मोनू ने कहा कि ईसीजी की सुविधा नहीं है। शानू ने कहा कि आंख, दांत, कान व गले के मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों की तैनाती बढ़ाई गई है। शेष रिक्त पदों और उपकरणों की जरूरत संबंधी पत्र शासन को भेजा गया है। जल्द ही व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।