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20 माह में भी नहीं तैयार हो पाई महोना आईटीआई
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बाजार शुकुल (अमेठी)। महोना में निर्माणाधीन आईटीआई 20 महीने बाद भी अधूरी पड़ी है। पैकफेड 8.02 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली आईटीआई की कार्यदायी संस्था है। अब तक दो किश्तों में 2.26 करोड़ रुपये अवमुक्त हो चुके है। उपभोग प्रमाण पत्र देने के बावजूद धनावंटन नहीं होने से निर्माण प्रभावित है।
शासन की ओर से अल्पसंख्यक बहुल विकास खंड को विकास की धारा से जोड़ने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में बाजार शुकुल के महोना गांव में आठ करोड़ दो लाख 51 हजार रुपये की लागत से राजकीय आईटीआई की स्थापना को मंजूरी मिली थी। स्वीकृति के बाद राजस्व विभाग ने सत्थिन गांव में भूूमि चिह्नित कर निर्माण की सहमति प्रदान की थी।
निर्माण कार्य शुरू होता इसके पहले ग्रामीणों ने भूमि को विवादित बताते हुए कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। स्थगन आदेश जारी होने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिला प्रशासन से महोना गांव में आईटीआई निर्माण के जमीन ली। भूमि चिह्नित होने के बाद अल्पसंख्यक विभाग की ओर से नामित कार्यदायी संस्था पैकफेड ने निर्माण कार्य शुरू किया।
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निर्माण पूरा हो सके इसके लिए पहली किश्त के रूप में 40 लाख रुपये तो दूसरी किश्त के रूप में दो करोड़ 22 लाख रुपये अवमुक्त किये गये। अवमुक्त धनराशि से कार्यदायी संस्था ने भवन निर्माण कर अवमुक्त राशि का उपभोग विभाग को साैंप अवशेष राशि निर्गत करने की मांग की। मांग के बावजूद आज तक शासन से अवशेष धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है।
20 महीने बीत जाने के बावजूद आईटीआई कॉलेज का निर्माण पूरा नहीं होने से क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए परेशान होना पड़ रहा है जानकारी के बाद अल्पसंख्यक विभाग लगातार शासन से पत्राचार कर धन की मांग कर रहा है तो कार्यदायी संस्था भी काम बंद कर धन का इंतजार में बैठी है।
प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार पांडेय ने धनाभाव में आईटीआई महोना निर्माण प्रभावित होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि कार्यदायी संस्था के उपभोग प्रमाण पत्र देने तथा डीएम के निर्देश पर गठित टीम की जांच रिपोर्ट भी मिलने के बाद शासन से धन आवंटन की मांग की गई है। धन मिलते ही नियमानुसार स्वीकृत मानचित्र के अनुसार कार्य पूरा कर आईटीआई का संचालन किया जाएगा।
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शासन की ओर से अल्पसंख्यक बहुल विकास खंड को विकास की धारा से जोड़ने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में बाजार शुकुल के महोना गांव में आठ करोड़ दो लाख 51 हजार रुपये की लागत से राजकीय आईटीआई की स्थापना को मंजूरी मिली थी। स्वीकृति के बाद राजस्व विभाग ने सत्थिन गांव में भूूमि चिह्नित कर निर्माण की सहमति प्रदान की थी।
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निर्माण कार्य शुरू होता इसके पहले ग्रामीणों ने भूमि को विवादित बताते हुए कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। स्थगन आदेश जारी होने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिला प्रशासन से महोना गांव में आईटीआई निर्माण के जमीन ली। भूमि चिह्नित होने के बाद अल्पसंख्यक विभाग की ओर से नामित कार्यदायी संस्था पैकफेड ने निर्माण कार्य शुरू किया।
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निर्माण पूरा हो सके इसके लिए पहली किश्त के रूप में 40 लाख रुपये तो दूसरी किश्त के रूप में दो करोड़ 22 लाख रुपये अवमुक्त किये गये। अवमुक्त धनराशि से कार्यदायी संस्था ने भवन निर्माण कर अवमुक्त राशि का उपभोग विभाग को साैंप अवशेष राशि निर्गत करने की मांग की। मांग के बावजूद आज तक शासन से अवशेष धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है।
20 महीने बीत जाने के बावजूद आईटीआई कॉलेज का निर्माण पूरा नहीं होने से क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए परेशान होना पड़ रहा है जानकारी के बाद अल्पसंख्यक विभाग लगातार शासन से पत्राचार कर धन की मांग कर रहा है तो कार्यदायी संस्था भी काम बंद कर धन का इंतजार में बैठी है।
प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार पांडेय ने धनाभाव में आईटीआई महोना निर्माण प्रभावित होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि कार्यदायी संस्था के उपभोग प्रमाण पत्र देने तथा डीएम के निर्देश पर गठित टीम की जांच रिपोर्ट भी मिलने के बाद शासन से धन आवंटन की मांग की गई है। धन मिलते ही नियमानुसार स्वीकृत मानचित्र के अनुसार कार्य पूरा कर आईटीआई का संचालन किया जाएगा।