{"_id":"5fa969928ebc3e1a27223d0f","slug":"efforts-to-reduce-maternal-and-infant-mortality-rate-fast-amethi-news-lko549435963","type":"story","status":"publish","title_hn":"मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की कोशिश तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की कोशिश तेज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेठी। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी व फैमिली प्लॉनिंग के उद्देश्य से चार नवंबर को शुरू किया गया विशेष जागरूकता अभियान सोमवार को समाप्त हुआ। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को फैमिली प्लॉनिंग व स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया।
फमिली प्लॉनिंग को असरदार बनाने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वस्थ्य महकमे की ओर चार नवंबर को विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया गया था। अभियान के दौरान जिला अस्पताल व जिले की सभी पीएचसी व सीएचसी में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए चिकित्साधिकारी लगाये गए।
इनका दायित्व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच व नवदंपत्ती को गर्भ निरोधक साधनों के प्रति जागरूक करना रहा। चिकित्सकों ने नव दंपती व गर्भवती महिलाओं को बताया कि पहले व दूसरे बच्चे के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखें।
विज्ञापन
फैमिली प्लॉनिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुहैया कराए जा रहे गर्भ निरोधक साधनों (बास्केट ऑफ च्वाइस) में से अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी साधन अपनाएं। गर्भ निरोधक गोली छाया, प्रसव के तुरंत बाद लगने वाली पीपीआईयूसीडी और कंडोम की पूर्ण सुविधा की जानकारी आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम के द्वारा दी गई।
अन्य समस्या होने पर मदद के लिए अंतरा केयर हेल्पलाइन 1800-103-3044 द्वारा काउंसलर से फोन पर बात करने को भी कहा गया। फैमिली प्लॉनिंग के प्रति जागरूक होने पर माताएं व बच्चे वस्थ रहेंगे। एक या दो बच्चे होने से उन्हें बेहतर शिक्षा मिलेगी। असुरक्षित गर्भपात की समस्या के कारण महिलाओं को मौत का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
विज्ञापन
फमिली प्लॉनिंग को असरदार बनाने के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वस्थ्य महकमे की ओर चार नवंबर को विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया गया था। अभियान के दौरान जिला अस्पताल व जिले की सभी पीएचसी व सीएचसी में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए चिकित्साधिकारी लगाये गए।
विज्ञापन
इनका दायित्व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच व नवदंपत्ती को गर्भ निरोधक साधनों के प्रति जागरूक करना रहा। चिकित्सकों ने नव दंपती व गर्भवती महिलाओं को बताया कि पहले व दूसरे बच्चे के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखें।
विज्ञापन
फैमिली प्लॉनिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुहैया कराए जा रहे गर्भ निरोधक साधनों (बास्केट ऑफ च्वाइस) में से अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी साधन अपनाएं। गर्भ निरोधक गोली छाया, प्रसव के तुरंत बाद लगने वाली पीपीआईयूसीडी और कंडोम की पूर्ण सुविधा की जानकारी आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम के द्वारा दी गई।
अन्य समस्या होने पर मदद के लिए अंतरा केयर हेल्पलाइन 1800-103-3044 द्वारा काउंसलर से फोन पर बात करने को भी कहा गया। फैमिली प्लॉनिंग के प्रति जागरूक होने पर माताएं व बच्चे वस्थ रहेंगे। एक या दो बच्चे होने से उन्हें बेहतर शिक्षा मिलेगी। असुरक्षित गर्भपात की समस्या के कारण महिलाओं को मौत का शिकार नहीं होना पड़ेगा।