{"_id":"6ac7e96bfe9d2fc067049ab5","slug":"crops-flattened-in-fields-due-to-rain-farmers-concerns-mount-amethi-news-c-96-1-ame1002-177642-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: बारिश से खेतों में गिरी फसल, बढ़ी किसानों की चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: बारिश से खेतों में गिरी फसल, बढ़ी किसानों की चिंता
Fri, 09 Oct 2026 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:35 AM IST
विज्ञापन
मुंशीगंज की सीवान में गिरी धान की फसल। संवाद
अमेठी सिटी। सितंबर से बिगड़े मौसम के बीच मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। तेज हवा के साथ बारिश से पकने की स्थिति में पहुंची धान की फसल कई जगह खेतों में गिर गई। खेतों में पानी भरने से कटाई प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन में करीब 11,387 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की आशंका है। धान के अलावा तिल, उड़द, अरहर, ज्वार, बाजरा, मूंग और मक्का की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्रवार सर्वे पूरा होने के बाद वास्तविक नुकसान स्पष्ट होगा।
जगदीशपुर के किसान रामलखन ने बताया कि धान कटाई के लिए तैयार था, लेकिन बारिश और तेज हवा से फसल खेत में गिर गई। पानी भरा होने के कारण कटाई नहीं हो पा रही है। भादर के किसान महेश कुमार ने बताया कि खेतों में अधिक नमी के कारण गिरी फसल का दाना खराब होने का डर है। बृहस्पतिवार को भी बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप निकली, लेकिन मौसम पूरी तरह साफ नहीं हुआ। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनराज मिश्रा के अनुसार अगले 24 घंटे में बारिश की संभावना है। इससे फसल नुकसान का खतरा बना हुआ है।
खेतों में अधिक नमी के कारण आलू, सरसों और मटर की बोआई के लिए खेत तैयार करने में देरी हो सकती है। सब्जियों की अगेती खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। धान की कटाई में देरी हुई तो रबी फसलों की बोआई का समय भी आगे खिसक सकता है।
विज्ञापन
72 घंटे में देनी होगी सूचना
प्राकृतिक आपदा से बीमित फसल को नुकसान होने पर किसान को 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होगी। कृषि रक्षक हेल्पलाइन 14447 पर नुकसान दर्ज कराया जा सकता है। सूचना के बाद क्षति का सत्यापन और आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार बीमा क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
कराया जा रहा सर्वे
उपनिदेशक कृषि सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि बारिश से हुए फसल नुकसान का क्षेत्रवार सर्वे कराया जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान में 11,387 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की आशंका है। सर्वे पूरा होने के बाद वास्तविक नुकसान स्पष्ट होगा। बीमित किसान निर्धारित समय में नुकसान की सूचना दें, ताकि बीमा लाभ की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
फैक्ट फाइल
धान: 8,786 हेक्टेयर
तिल: 899 हेक्टेयर
उड़द: 529 हेक्टेयर
अरहर: 362 हेक्टेयर
ज्वार: 382 हेक्टेयर
बाजरा: 291 हेक्टेयर
मूंग: 91 हेक्टेयर मक्का: 47 हेक्टेयर
कुल प्रभावित क्षेत्र: करीब 11,387 हेक्टेयर
विज्ञापन
जगदीशपुर के किसान रामलखन ने बताया कि धान कटाई के लिए तैयार था, लेकिन बारिश और तेज हवा से फसल खेत में गिर गई। पानी भरा होने के कारण कटाई नहीं हो पा रही है। भादर के किसान महेश कुमार ने बताया कि खेतों में अधिक नमी के कारण गिरी फसल का दाना खराब होने का डर है। बृहस्पतिवार को भी बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप निकली, लेकिन मौसम पूरी तरह साफ नहीं हुआ। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनराज मिश्रा के अनुसार अगले 24 घंटे में बारिश की संभावना है। इससे फसल नुकसान का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन
खेतों में अधिक नमी के कारण आलू, सरसों और मटर की बोआई के लिए खेत तैयार करने में देरी हो सकती है। सब्जियों की अगेती खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। धान की कटाई में देरी हुई तो रबी फसलों की बोआई का समय भी आगे खिसक सकता है।
विज्ञापन
72 घंटे में देनी होगी सूचना
प्राकृतिक आपदा से बीमित फसल को नुकसान होने पर किसान को 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होगी। कृषि रक्षक हेल्पलाइन 14447 पर नुकसान दर्ज कराया जा सकता है। सूचना के बाद क्षति का सत्यापन और आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार बीमा क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
कराया जा रहा सर्वे
उपनिदेशक कृषि सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि बारिश से हुए फसल नुकसान का क्षेत्रवार सर्वे कराया जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान में 11,387 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की आशंका है। सर्वे पूरा होने के बाद वास्तविक नुकसान स्पष्ट होगा। बीमित किसान निर्धारित समय में नुकसान की सूचना दें, ताकि बीमा लाभ की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
फैक्ट फाइल
धान: 8,786 हेक्टेयर
तिल: 899 हेक्टेयर
उड़द: 529 हेक्टेयर
अरहर: 362 हेक्टेयर
ज्वार: 382 हेक्टेयर
बाजरा: 291 हेक्टेयर
मूंग: 91 हेक्टेयर मक्का: 47 हेक्टेयर
कुल प्रभावित क्षेत्र: करीब 11,387 हेक्टेयर