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Amethi News: निराश न हों कम अंक पाने वाले बच्चे
Sat, 26 Apr 2025 02:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 26 Apr 2025 02:00 AM IST
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अमेठी सिटी। ज्ञान हो तो सफलता चलकर कदम चूमती है। जीवन में तमाम अवसर ऐसे मिलते हैं, जहां हमें कुछ और बेहतर करने का मौका मिलता है। इसलिए कम नंबर आने व फेल होने पर कभी निराश नहीं होना चाहिए। जिला व प्रदेश टॉपर नहीं रहने वाले कई अफसरों ने अपनी मेहनत के दम पर सफलता को अपना गुलाम बनाया। वहीं, कई लोगों ने उद्योग सहित अन्य क्षेत्र में नाम रोशन किया है।
प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा सरकारी स्कूलों में ग्रहण करने वाले उप जिला निदेशक कृषि सत्येन्द्र कुमार बताते हैं कि पढ़ाई में निरंतरता जरूरी है। कम अंक मिलना व फेल होना विफलता नहीं है। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के मुखिया बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि कम अंक पाने वाले बच्चे निराश न हों। कई असफलता के बाद सफलता मिलती है। जो भी गलतियां हुई हैं बच्चों को उसे सुधार कर उससे बेहतर करने का प्रयास करें।
रीवां मध्य प्रदेश के निवासी व जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि अंकपत्र मापदंड नहीं है। ज्ञान और मेधा के आधार पर ही प्रतियोगिता आधारित का मूल्याकंन होता है। बहुत लोगों का अकादमिक प्रदर्शन कम अच्छा होता है, लेकिन प्रतियोगी परीक्षा में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा होता है। उन्होंने ग्वालियर मध्य प्रदेश के निवासी आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के जीवन पर बनी फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि 12वीं फेल उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनी है। इस पर किताब भी लिखी गई है।
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मनोचिकित्सक डॉ. बीवी सिंह ने बताया कि कभी असफलता से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। जीवन का हर दिन परीक्षा का दिन होता है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि जो बच्चे स्कूली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, इसके लिए उन्हें दोष न दें। कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा आट्र्स के विषय पढ़ना चाहता था और उसे जबरन साइंस स्ट्रीम दिलवा दिया गया।
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प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा सरकारी स्कूलों में ग्रहण करने वाले उप जिला निदेशक कृषि सत्येन्द्र कुमार बताते हैं कि पढ़ाई में निरंतरता जरूरी है। कम अंक मिलना व फेल होना विफलता नहीं है। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के मुखिया बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि कम अंक पाने वाले बच्चे निराश न हों। कई असफलता के बाद सफलता मिलती है। जो भी गलतियां हुई हैं बच्चों को उसे सुधार कर उससे बेहतर करने का प्रयास करें।
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रीवां मध्य प्रदेश के निवासी व जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि अंकपत्र मापदंड नहीं है। ज्ञान और मेधा के आधार पर ही प्रतियोगिता आधारित का मूल्याकंन होता है। बहुत लोगों का अकादमिक प्रदर्शन कम अच्छा होता है, लेकिन प्रतियोगी परीक्षा में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा होता है। उन्होंने ग्वालियर मध्य प्रदेश के निवासी आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के जीवन पर बनी फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि 12वीं फेल उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनी है। इस पर किताब भी लिखी गई है।
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मनोचिकित्सक डॉ. बीवी सिंह ने बताया कि कभी असफलता से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। जीवन का हर दिन परीक्षा का दिन होता है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि जो बच्चे स्कूली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, इसके लिए उन्हें दोष न दें। कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा आट्र्स के विषय पढ़ना चाहता था और उसे जबरन साइंस स्ट्रीम दिलवा दिया गया।