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Amethi News: मनरेगा का नाम बदलना अधिकारों पर चोट
Mon, 12 Jan 2026 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:21 AM IST
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गौरीगंज स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता करते सांसद किशोरी लाल शर्मा। -संवाद
अमेठी सिटी। मनरेगा का नाम बदले जाने की प्रस्तावित पहल पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। गौरीगंज स्थित केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में स्थानीय सांसद किशोरी लाल शर्मा ने केंद्र सरकार और भाजपा पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम और विचारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गांधी के सिद्धांत समय के साथ अधिक सशक्त हुए हैं, उन्हें समाप्त करने की सोच कभी सफल नहीं होगी। मनरेगा का नाम बदलना मजदूरों के अधिकारों पर चोट है।
सांसद ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण परिवारों के काम करने के संवैधानिक अधिकार की पहचान बनी। योजना से प्रत्येक परिवार को सौ दिन रोजगार की कानूनी गारंटी मिली। अब सरकार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण जैसे नाम प्रस्तावित कर रही है, जिससे रोजगार की गारंटी कमजोर होने का खतरा दिखता है। उन्होंने कहा कि पहले बजट में केंद्र का अंश 90 प्रतिशत और राज्य का अंश 10 प्रतिशत रहता था। नई व्यवस्था में राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी चाहती है। मनरेगा में हुए सभी बदलाव तत्काल वापस हों, काम के संवैधानिक अधिकार की बहाली हो और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये तय की जाए। अमेठी जनपद के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में परिवारों को सीमित दिनों का ही काम मिला, यह व्यवस्था की गंभीर कमी दिखाता है। इसी विरोध में कांग्रेस 12 जनवरी को प्रियंका गांधी के जन्मदिन से गांव-गांव मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करेगी। 25 फरवरी तक सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा। किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि जिले में 2,33,637 जॉब कार्डधारी परिवार पंजीकृत हैं। इनके मुकाबले केवल 1073 परिवारों को सौ दिन रोजगार मिला। करीब 21.70 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है।।
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सांसद ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण परिवारों के काम करने के संवैधानिक अधिकार की पहचान बनी। योजना से प्रत्येक परिवार को सौ दिन रोजगार की कानूनी गारंटी मिली। अब सरकार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण जैसे नाम प्रस्तावित कर रही है, जिससे रोजगार की गारंटी कमजोर होने का खतरा दिखता है। उन्होंने कहा कि पहले बजट में केंद्र का अंश 90 प्रतिशत और राज्य का अंश 10 प्रतिशत रहता था। नई व्यवस्था में राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी चाहती है। मनरेगा में हुए सभी बदलाव तत्काल वापस हों, काम के संवैधानिक अधिकार की बहाली हो और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये तय की जाए। अमेठी जनपद के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में परिवारों को सीमित दिनों का ही काम मिला, यह व्यवस्था की गंभीर कमी दिखाता है। इसी विरोध में कांग्रेस 12 जनवरी को प्रियंका गांधी के जन्मदिन से गांव-गांव मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करेगी। 25 फरवरी तक सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा। किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि जिले में 2,33,637 जॉब कार्डधारी परिवार पंजीकृत हैं। इनके मुकाबले केवल 1073 परिवारों को सौ दिन रोजगार मिला। करीब 21.70 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है।।
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