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Amethi News: साइबर ठगों के निशाने पर बोर्ड परीक्षार्थी
Sun, 05 Apr 2026 12:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:42 AM IST
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अमेठी सिटी। सावधान हो जाइए। साइबर ठग अब बोर्ड परीक्षार्थियों को निशाना बना रहे हैं। विद्यार्थियों का डाटा हैक करके उन्हें व्हाट्सएप पर मेसेज भेजे जा रहे हैं। फेल होने का डर दिखाकर 10 से 15 हजार रुपये की मांग की जा रही है।
केस एक
रणंजय इंटर कॉलेज गौरीगंज के इंटर के छात्र के मोबाइल नंबर पर बृहस्पतिवार को साइबर ठग का मेसेज आया। उसने लिखा कि बायोलॉजी में 19 अंक आए हैं और वह फेल हो रहा है। पास होना है तो संपर्क करें। छात्र ने जब कॉलर की पहचान पूछी तो उसने टाल दिया। साइबर ठग ने भरोसा दिलाने के लिए उसका नाम और रोल नंबर मेसेज कर दिया। इसके बाद रुपयों की मांग शुरू हुई। पहले 10 हजार रुपये मांगे गए। बाद में पांच हजार रुपये में बात तय करने का प्रयास किया गया। भुगतान के लिए बार कोड भी भेजा गया। छात्र ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने मित्र से सलाह ली और रुपये नहीं भेजे।
केस दो
किटियावां के एक निजी कॉलेज के हाईस्कूल के छात्र के पास शुक्रवार को मेसेज आया। तीन विषयों में फेल होने की बात कहकर 15 हजार रुपये मांगे गए। छात्र के मोबाइल पर भी उसका नाम और रोल नंबर भेजा गया। हालांकि उसे रुपये ट्रांसफर करने के लिए बार कोड नहीं भेजा गया। शंका होने पर छात्र ने पहले ही विद्यालय के शिक्षक से संपर्क करके पूरी बात बताई। शिक्षक ने छात्र को समझाया कि वह इस तरह के मेसेज का जवाब कतई न दे।
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मामला संज्ञान में, शिकायत नहीं
साइबर क्राइम थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि ऐसे एक-दो मामले जानकारी में आए हैं, लेकिन शिकायत नहीं की गई है। इसके बावजूद हम जांच कर रहे हैं। विद्यार्थियों को गुमराह करने वालों का पता लगाया जा रहा है। स्कूलों में साइबर जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को सतर्क किया जा रहा है।
कहां से जुटा रहे डाटा
साइबर ठगों को विद्यार्थियों का डाटा कहां से मिला, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि स्कूलों की वेबसाइट हैक की गई होगी। वहीं कई लोग ये भी कह रहे हैं कि यूपी बोर्ड की वेबसाइट से डाटा चुराया गया होगा। ये बात भी सामने आ रही है कि कोई जानने वाला ही इस तरह मेसेज करके साइबर ठगी करने का प्रयास कर रहा होगा।
पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और गोपनीय
डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी होती है। सीसीटीवी निगरानी में कार्य संपन्न होता है। पास कराने के नाम पर रुपये मांगने वाले साइबर ठग हैं। ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल करके शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
सतर्क रहकर ठगी से बचें
-अनजान नंबर या व्हाट्सएप मैसेज पर फेल/पास से जुड़ी बातों पर भरोसा न करें।
-किसी भी हाल में रुपये, यूपीआई या बार कोड के जरिये भुगतान न करें।
-अपना रोल नंबर, आधार, मोबाइल या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।
-ऐसे संदेश मिलने पर तुरंत अभिभावक या शिक्षक को जानकारी दें।
-संदिग्ध कॉल/मेसेज का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
-नजदीकी थाने या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
-केवल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर ही परिणाम देखें।
-डर या लालच में आकर कोई निर्णय न लें, पहले सत्यापन करें।
-बोर्ड परीक्षा में पास-फेल का निर्णय केवल आधिकारिक प्रक्रिया से होता है, किसी कॉल या मैसेज से नहीं।
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केस एक
रणंजय इंटर कॉलेज गौरीगंज के इंटर के छात्र के मोबाइल नंबर पर बृहस्पतिवार को साइबर ठग का मेसेज आया। उसने लिखा कि बायोलॉजी में 19 अंक आए हैं और वह फेल हो रहा है। पास होना है तो संपर्क करें। छात्र ने जब कॉलर की पहचान पूछी तो उसने टाल दिया। साइबर ठग ने भरोसा दिलाने के लिए उसका नाम और रोल नंबर मेसेज कर दिया। इसके बाद रुपयों की मांग शुरू हुई। पहले 10 हजार रुपये मांगे गए। बाद में पांच हजार रुपये में बात तय करने का प्रयास किया गया। भुगतान के लिए बार कोड भी भेजा गया। छात्र ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने मित्र से सलाह ली और रुपये नहीं भेजे।
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केस दो
किटियावां के एक निजी कॉलेज के हाईस्कूल के छात्र के पास शुक्रवार को मेसेज आया। तीन विषयों में फेल होने की बात कहकर 15 हजार रुपये मांगे गए। छात्र के मोबाइल पर भी उसका नाम और रोल नंबर भेजा गया। हालांकि उसे रुपये ट्रांसफर करने के लिए बार कोड नहीं भेजा गया। शंका होने पर छात्र ने पहले ही विद्यालय के शिक्षक से संपर्क करके पूरी बात बताई। शिक्षक ने छात्र को समझाया कि वह इस तरह के मेसेज का जवाब कतई न दे।
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मामला संज्ञान में, शिकायत नहीं
साइबर क्राइम थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि ऐसे एक-दो मामले जानकारी में आए हैं, लेकिन शिकायत नहीं की गई है। इसके बावजूद हम जांच कर रहे हैं। विद्यार्थियों को गुमराह करने वालों का पता लगाया जा रहा है। स्कूलों में साइबर जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को सतर्क किया जा रहा है।
कहां से जुटा रहे डाटा
साइबर ठगों को विद्यार्थियों का डाटा कहां से मिला, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि स्कूलों की वेबसाइट हैक की गई होगी। वहीं कई लोग ये भी कह रहे हैं कि यूपी बोर्ड की वेबसाइट से डाटा चुराया गया होगा। ये बात भी सामने आ रही है कि कोई जानने वाला ही इस तरह मेसेज करके साइबर ठगी करने का प्रयास कर रहा होगा।
पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और गोपनीय
डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी होती है। सीसीटीवी निगरानी में कार्य संपन्न होता है। पास कराने के नाम पर रुपये मांगने वाले साइबर ठग हैं। ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल करके शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
सतर्क रहकर ठगी से बचें
-अनजान नंबर या व्हाट्सएप मैसेज पर फेल/पास से जुड़ी बातों पर भरोसा न करें।
-किसी भी हाल में रुपये, यूपीआई या बार कोड के जरिये भुगतान न करें।
-अपना रोल नंबर, आधार, मोबाइल या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।
-ऐसे संदेश मिलने पर तुरंत अभिभावक या शिक्षक को जानकारी दें।
-संदिग्ध कॉल/मेसेज का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
-नजदीकी थाने या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
-केवल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर ही परिणाम देखें।
-डर या लालच में आकर कोई निर्णय न लें, पहले सत्यापन करें।
-बोर्ड परीक्षा में पास-फेल का निर्णय केवल आधिकारिक प्रक्रिया से होता है, किसी कॉल या मैसेज से नहीं।