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Amethi News: भागवत कथा संसार सागर से पार जाने की नौका
Sun, 12 Oct 2025 12:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:27 AM IST
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तिलोई के दानसिंह मेढ़ौना में कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु।-संवाद
तिलोई। जिस प्रकार सागर के दो छोर होते हैं, परंतु दिखता एक ही है। उसी प्रकार जन्म और मृत्यु भी इस संसार रूपी सागर के दो छोर हैं। इसमें जन्म तो दिखता है, परंतु मृत्यु किसकी और कब होगी, ये पता नहीं। इसलिए इस संसार को भवसागर कहा गया है और ये भागवत कथा इस संसार सागर से पार जाने की नौका है। ये बातें शंकरगंज के पूरे दानसिंह वैस मजरे मेढ़ौना में भागवत कथा के प्रथम दिन शनिवार को प्रवाचक शांतनु जी महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि कथा सुनकर सामान्य मनुष्य भी भगवान के परमपद को प्राप्त कर सकता है। भागवत कथा को सप्ताह ज्ञान यज्ञ कहा जाता है क्योंकि इसमें अपने अज्ञान की आहुति देकर भगवत तत्व को जाना जा सकता है। प्रवाचक ने शौनकादि ऋषियों की कथा भी विस्तार से सुनाई। भागवत कथा से पहले सुबह नौ बजे से कलश यात्रा निकाली गई। महिलाएं पीले वस्त्र व सिर पर कलश लिए यात्रा में मौजूद रहीं।
कथा के मुख्य यजमान तिलोई ब्लॉक प्रमुख अर्चना सिंह व कृष्ण कुमार सिंह श्रद्धालुओं के साथ जमुरवा स्थित राम जानकी मंदिर पहुंचे। प्रवाचक शांतनु महाराज ने रामजानकी मंदिर में पूजा-अर्चना की। रामजानकी सागर से जल भरने के बाद कलश यात्रा वापस कथा स्थल पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कथा सुनकर सामान्य मनुष्य भी भगवान के परमपद को प्राप्त कर सकता है। भागवत कथा को सप्ताह ज्ञान यज्ञ कहा जाता है क्योंकि इसमें अपने अज्ञान की आहुति देकर भगवत तत्व को जाना जा सकता है। प्रवाचक ने शौनकादि ऋषियों की कथा भी विस्तार से सुनाई। भागवत कथा से पहले सुबह नौ बजे से कलश यात्रा निकाली गई। महिलाएं पीले वस्त्र व सिर पर कलश लिए यात्रा में मौजूद रहीं।
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कथा के मुख्य यजमान तिलोई ब्लॉक प्रमुख अर्चना सिंह व कृष्ण कुमार सिंह श्रद्धालुओं के साथ जमुरवा स्थित राम जानकी मंदिर पहुंचे। प्रवाचक शांतनु महाराज ने रामजानकी मंदिर में पूजा-अर्चना की। रामजानकी सागर से जल भरने के बाद कलश यात्रा वापस कथा स्थल पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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