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Amethi News: टूट गया था अनुज, खुद को ठहराया दोषी
Fri, 27 Jun 2025 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 27 Jun 2025 12:13 AM IST
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अमेठी। 18 साल के अनुज ने एनडीए की लिखित परीक्षा पास कर ली थी। उसे शायद इस बात का डर सता रहा था कि कहीं वह भविष्य में सफल नहीं हुआ तो क्या होगा। इस बात का जिक्र उसने अपने सुसाइड नोट में भी किया। उसके इस कदम से पूरा परिवार सदमे में है।
अनुज ने सुसाइड नोट में माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा कि सॉरी, मम्मी-पापा। मैं जानता हूं कि मेरे इस फैसले से आप बहुत आहत होंगे, लेकिन मैं बहुत तनाव में था। इस फैसले के पीछे किसी और का हाथ नहीं है, यह पूरी तरह मेरा निर्णय है। छोटे भाई आयुष के लिए लिखा कि सॉरी भाई, मैं तेरा आदर्श (रोल मॉडल) नहीं बन पाया। मैं अंदर ही अंदर टूटता जा रहा था। मुझे हमेशा डर लगता था कि अगर भविष्य में कुछ नहीं कर पाया तो क्या होगा।
संवाद ही है समाधान, गतिविधियों पर रखें नजर
अक्सर होनहार और संवेदनशील किशोर अवसाद को जाहिर नहीं करते। कई युवा बाहर से शांत और सामान्य लग सकते हैं, लेकिन भीतर तनाव से टूटे रहते हैं। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों से खुलकर संवाद करें। उनकी गतिविधियों पर नजर रखें और हर बदलाव को गंभीरता से लें।
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डॉ. वीपी सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ
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अनुज ने सुसाइड नोट में माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा कि सॉरी, मम्मी-पापा। मैं जानता हूं कि मेरे इस फैसले से आप बहुत आहत होंगे, लेकिन मैं बहुत तनाव में था। इस फैसले के पीछे किसी और का हाथ नहीं है, यह पूरी तरह मेरा निर्णय है। छोटे भाई आयुष के लिए लिखा कि सॉरी भाई, मैं तेरा आदर्श (रोल मॉडल) नहीं बन पाया। मैं अंदर ही अंदर टूटता जा रहा था। मुझे हमेशा डर लगता था कि अगर भविष्य में कुछ नहीं कर पाया तो क्या होगा।
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संवाद ही है समाधान, गतिविधियों पर रखें नजर
अक्सर होनहार और संवेदनशील किशोर अवसाद को जाहिर नहीं करते। कई युवा बाहर से शांत और सामान्य लग सकते हैं, लेकिन भीतर तनाव से टूटे रहते हैं। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों से खुलकर संवाद करें। उनकी गतिविधियों पर नजर रखें और हर बदलाव को गंभीरता से लें।
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डॉ. वीपी सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ