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Amethi News: गोलीकांड में मारे गए कारसेवकों की याद में बाराबंकी जेल में हुई थी सभा

Tue, 16 Jan 2024 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Tue, 16 Jan 2024 12:06 AM IST
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A meeting was held in Barabanki jail in memory of the kar sevaks killed in the firing.
अ​धिवक्ता उमाशंकर पांडेय । -संवाद
कारसेवा में अग्रणी रहे उमाशंकर पांडेय की जुबानी, वर्ष 1990 में माथे पर चंदन लगाना था अपराध
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अमेठी सिटी। 30 अक्तूबर 1990, स्थान बाराबंकी जेल परिसर, कारसेवकों पर गोली चलने की खबर जैसे ही जेल के भीतर पहुंची। एक-एक कर कारसेवक बैरक से बाहर आकर गणनास्थल पर जमा हो गए। नम आंखों के बीच करीब 500 कारसेवकों ने गोलीकांड में मारे गए कारसेवकों की याद में श्रद्धांजलि सभा कर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। वह पल याद करके कारसेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाशंकर पांडेय भावुक हो गए।
वर्ष 1971 से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े उमाशंकर पांडेय ने वर्ष 1984 में तहसील के कार्यवाह अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। बताते हैं कि वर्ष 1984 में राम जन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति का सदस्य उन्हें बनाया गया था। परमहंस रामचंद्र दास की अगुवाई में सरयू तट पर हुई सभा में उन्होंने साथियों के साथ हिस्सेदारी की थी। उस वक्त सरयू का जल व रेत हाथ में लेकर जीवन भर श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए काम करने का संकल्प लिया गया था। उस वक्त रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा गूंजा था। यहीं से ताला खोलो की भी अलख जगी थी। बाद में वर्ष 1986 में ताला खुला था।
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इसके बाद राम मंदिर आंदोलन ने गति पकड़ ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ ही विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के साथ ही अन्य संगठनों ने इसे आगे बढ़ाया। 25 सितंबर 1990 में जब राम मंदिर को लेकर लाल कृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली थी, उस वक्त एक अलग ही मिजाज था। इसने लोगों के भीतर एक उत्साह पैदा किया था। लोगों की जुबां पर बस एक ही नारा था कि सौगंध राम की खाते हैं...।
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शुगर से पीड़ित कारसेवक को भी भेजा था जेल
बताते हैं कि 14 अक्तूबर 1990 को वह गौरीगंज में चौक के मोड़ पर एक दुकान पर खड़े थे। उसी वक्त सुल्तानपुर आरएसएस से जुड़े दो पदाधिकारी आ गए। वह उनसे खड़े होकर बात कर रहे थे, तभी पुलिस कर्मी वहां पहुंच गए। उन्होंने कहा कि बड़े साहब ने बुलाया है। जब वह कोतवाल वीएन राय के पास पहुंचे तो उन्होंने गिरफ्तारी की बात कही। जुर्म पूछा तो कहा कि आप ढांचा ढहाने की साजिश रच रहे हैं। इसके बाद एक-एक करके केशव प्रसाद सिंह, गोविंद सिंह, श्याम प्रकाश शुक्ल, रघुनाथ सिंह उर्फ लल्लन सिंह, पंडित यज्ञदत्त मिश्र, त्रिभुवन नाथ मिश्र, अवध नरायण शुक्ल, पदमाकर शुक्ला, हरिराम जायसवाल, कामता प्रसाद चौरसिया को भी पकड़कर लाया गया। इसमें से रघुनाथ सिंह शुगर के मरीज थे, उस वक्त पैर में घाव होने के कारण पट्टी बांधी जा रही थी। इस पर उन्हें छोड़ने को लेकर काफी दबाव बनाया गया लेकिन, पुलिस ने जेल भेज दिया। पहले सुल्तानपुर फिर बाराबंकी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। बताते हैं उस वक्त माथे पर चंदन लगाना, हनुमान चालीसा का पाठ करना किसी गुनाह से कम नहीं था।




जेल से छूटने के बाद निकाला था जुलूस
एक माह तक बाराबंकी जेल में रहने के बाद जब कारसेवकों की रिहाई हुई तो सभी सीधे अयोध्या पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद गौरीगंज आने पर विशाल जुलूस निकाला गया था। जिसमें लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी। इसके बाद आंदोलन चलता रहा। 1992 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगने के बाद राम सेवा समिति बनाकर आंदोलन को धार दी गई। ढांचा ढहाए जाने के आंदोलन के दौरान कारसेवकों को अयोध्या पहुंचाने की जिम्मेदारी उनके कंधे पर थी। वह भेष बदलकर अलग-अलग गांवों में रात गुजारकर आंदोलन से जुड़े लोगों के ठहरने, खाने पीने की व्यवस्था करा रहे थे। कहा कि उनका संघर्ष अब जाकर सफल हो रहा है। अब भगवान अपने धाम में विराजमान हो रहे हैं। इससे बढ़कर और क्या है। आरएसएस के साथ ही उमाशंकर पांडेय भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के करीबियों में शुमार होने के साथ ही सीबीएसई बोर्ड से परतोष में स्थित विद्या भारती स्कूल के चेयरमैन भी हैं।
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