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Amethi News: जमीन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा, 171 मामले पकड़े
Wed, 30 Sep 2026 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:52 AM IST
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तिलोई। तहसील में जमीन के रिकॉर्ड में फर्जी अंकन कर लोगों को लाभ पहुंचाने का मामला सामने आया है। जून से अब तक जांच में 171 मामले पकड़े जाने की जानकारी है। इनमें फर्जी वरासत और कम हिस्सा होने के बावजूद ज्यादा हिस्सा दर्ज करने के मामले भी शामिल हैं। विभागीय कर्मचारियों के साथ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। रजिस्ट्रार कानूनगो के खिलाफ निलंबन की सिफारिश की गई है।
खतौनी में सुधार के लिए काश्तकार आवेदन करता है। अधिकारी आवेदन पर मार्किंग कर अधीनस्थ कर्मचारियों से रिपोर्ट लेते हैं। रिपोर्ट के आधार पर आदेश होता है। इसके बाद आदेश को आर-6 यानी सरकारी अभिलेख में दर्ज किया जाता है। फिर कंप्यूटर ऑपरेटर खतौनी में उसकी फीडिंग करता है और खतौनी जारी होती है।
जांच में सामने आया कि कथित फर्जी मामलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अधिकारियों की मार्किंग और अधीनस्थ कर्मचारियों की रिपोर्ट के बिना ही अभिलेखों में आदेश दर्ज कर दिए गए। इसके बाद कंप्यूटर में फीडिंग कर खतौनियां जारी कर दी गईं। जून से अब तक 171 मामले सामने आने की जानकारी है।
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जांच में जिम्मेदार कर्मचारियों को चिह्नित किए जाने की बात कही जा रही है। रजिस्ट्रार कानूनगो के खिलाफ निलंबन की सिफारिश की गई है। विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मंगलवार को डीएम को पत्र भेजकर मामले की जानकारी देने की बात सामने आई है। अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने बताया कि फर्जी अंकन का मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जा रही है।
एसडीएम ने वकीलों से मांगा सहयोग
चर्चा है कि एसडीएम ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर मामले की जांच में सहयोग मांगा। बैठक में कुछ अधिवक्ताओं की भूमिका की आशंका जताए जाने की बात सामने आई। एल्डर कमेटी के अध्यक्ष ओपी सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिना पुख्ता साक्ष्य किसी अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
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खतौनी में सुधार के लिए काश्तकार आवेदन करता है। अधिकारी आवेदन पर मार्किंग कर अधीनस्थ कर्मचारियों से रिपोर्ट लेते हैं। रिपोर्ट के आधार पर आदेश होता है। इसके बाद आदेश को आर-6 यानी सरकारी अभिलेख में दर्ज किया जाता है। फिर कंप्यूटर ऑपरेटर खतौनी में उसकी फीडिंग करता है और खतौनी जारी होती है।
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जांच में सामने आया कि कथित फर्जी मामलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अधिकारियों की मार्किंग और अधीनस्थ कर्मचारियों की रिपोर्ट के बिना ही अभिलेखों में आदेश दर्ज कर दिए गए। इसके बाद कंप्यूटर में फीडिंग कर खतौनियां जारी कर दी गईं। जून से अब तक 171 मामले सामने आने की जानकारी है।
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जांच में जिम्मेदार कर्मचारियों को चिह्नित किए जाने की बात कही जा रही है। रजिस्ट्रार कानूनगो के खिलाफ निलंबन की सिफारिश की गई है। विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मंगलवार को डीएम को पत्र भेजकर मामले की जानकारी देने की बात सामने आई है। अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने बताया कि फर्जी अंकन का मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जा रही है।
एसडीएम ने वकीलों से मांगा सहयोग
चर्चा है कि एसडीएम ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर मामले की जांच में सहयोग मांगा। बैठक में कुछ अधिवक्ताओं की भूमिका की आशंका जताए जाने की बात सामने आई। एल्डर कमेटी के अध्यक्ष ओपी सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिना पुख्ता साक्ष्य किसी अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।