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Ambedkar Nagar News: घर पर विधिपूर्वक कर सकते हैं श्राद्ध व तर्पण

Mon, 08 Sep 2025 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Mon, 08 Sep 2025 12:12 AM IST
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You can perform Shraadh and Tarpan ritually at home
आचार्य अरुण पांडेय।
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाला पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में श्रद्धा और विधिपूर्वक किए गए श्राद्ध व तर्पण से पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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हिंदू पंचांग के अनुसार अगर श्रद्धालुओं के लिए गया, प्रयाग या गोदावरी तट जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर जाना संभव न हो, तो वे घर पर भी सभी विधियों के अनुसार श्राद्ध कर सकते हैं। आचार्य अरुण पांडेय बताते हैं कि श्राद्ध के दिन प्रातः स्नान के बाद सबसे पहले घर की शुद्धी करनी चाहिए। इसके लिए गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव कर वातावरण को पवित्र बनाया जाता है। इसके बाद श्राद्धकर्ता दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तांबे के पात्र में काले तिल, कच्चा दूध, गंगाजल और शुद्ध जल मिलाकर अंजलि दें। अंगूठे से जल पात्र में गिराते हुए 11 बार पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें। श्राद्ध तिथि पर महिलाएं शुद्ध होकर आंगन में रंगोली बनाती हैं और पितरों के लिए सात्विक भोजन तैयार करती हैं। ब्राह्मण को आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है। इससे पहले पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी को अन्न अर्पित करना आवश्यक होता है। ब्राह्मण को भोजन कराते समय दंपती में पत्नी का दाहिनी ओर बैठना अनिवार्य बताया गया है।
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दक्षिणा और दान की परंपरा
भोजन के उपरांत ब्राह्मण को यथाशक्ति दक्षिणा और दान देना श्राद्ध का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में गाय, भूमि, वस्त्र, स्वर्ण, अनाज, तिल, गुड़, घी, नमक और चांदी जैसे द्रव्यों के दान को महादान की संज्ञा दी गई है। दान के बाद श्रद्धालु को ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
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सफेद पुष्प व सात्विक सामग्री का महत्व
श्राद्ध में केवल सफेद पुष्पों का उपयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, दूध, शहद, गंगाजल, काले तिल और अभिजित मुहूर्त का इस अनुष्ठान में विशेष महत्व होता है। धार्मिक दृष्टि से ये सभी वस्तुएं पवित्र मानी जाती हैं और पितरों को प्रिय होती हैं।

पितृ तर्पण का महत्व
धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि पितरों की संतुष्टि से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। पितृपक्ष केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि पूर्वजों की स्मृति और उनके प्रति आभार प्रकट करने की परंपरा भी है। इसीलिए इस कालखंड में श्राद्ध और तर्पण को विशेष महत्व दिया जाता है।
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