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Ambedkar Nagar News: मुठभेड़ में गिरफ्तार दो आरोपियों को मिली जमानत
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अंबेडकरनगर। हंसवर क्षेत्र में 14 सितंबर को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किए गए शिवम यादव और जीशान को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पवन कुमार शुक्ला की अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने एक-एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर दोनों को रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, 13 सितंबर को हंसवर पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन संदिग्ध युवक काले रंग की पल्सर बाइक से नहर पटरी के रास्ते काजीपुर की ओर जा रहे हैं। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोप है कि युवकों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इस दौरान उपनिरीक्षक रवि यादव की बांह को गोली छूते हुए निकल गई। जवाबी कार्रवाई में शिवम यादव निवासी जल्लापुर, आलापुर और जीशान निवासी ढेकवा बहाउद्दीनपुर, हंसवर के पैर में गोली लगी। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मौके से एक अन्य युवक को भी गिरफ्तार किया था। घटनास्थल से तमंचा, कारतूस और पिस्टल बरामद होने का दावा किया गया।
जमानत अर्जी पर बचाव पक्ष ने दोनों को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें रंजिश के चलते फंसाया गया है और घर से गिरफ्तार कर फर्जी बरामदगी दिखाई गई। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया।
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अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि उपनिरीक्षक को लगी चोट प्राणघातक नहीं थी और चिकित्सक ने उसे साधारण प्रकृति का बताया था। प्रकरण के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
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अभियोजन के अनुसार, 13 सितंबर को हंसवर पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन संदिग्ध युवक काले रंग की पल्सर बाइक से नहर पटरी के रास्ते काजीपुर की ओर जा रहे हैं। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोप है कि युवकों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इस दौरान उपनिरीक्षक रवि यादव की बांह को गोली छूते हुए निकल गई। जवाबी कार्रवाई में शिवम यादव निवासी जल्लापुर, आलापुर और जीशान निवासी ढेकवा बहाउद्दीनपुर, हंसवर के पैर में गोली लगी। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मौके से एक अन्य युवक को भी गिरफ्तार किया था। घटनास्थल से तमंचा, कारतूस और पिस्टल बरामद होने का दावा किया गया।
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जमानत अर्जी पर बचाव पक्ष ने दोनों को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें रंजिश के चलते फंसाया गया है और घर से गिरफ्तार कर फर्जी बरामदगी दिखाई गई। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया।
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अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि उपनिरीक्षक को लगी चोट प्राणघातक नहीं थी और चिकित्सक ने उसे साधारण प्रकृति का बताया था। प्रकरण के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।