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पोस्टमार्टम की पूरक रिपोर्ट ने भी बढ़ार्ईं मुश्किलें

Sat, 17 Sep 2022 12:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Sep 2022 12:03 AM IST
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The supplementary report of the post-mortem also increased the difficulties
अंबेडकरनगर। डेढ़ साल पहले पुलिस हिरासत में हुई आजमगढ़ निवासी जियाउद्दीन की मौत के मामले में पोस्टमार्टम की पूरक रिपोर्ट भी आरोपियों की परेशानी बढ़ा रही है। इस मामले में तात्कालिक स्वॉट टीम प्रभारी समेत आठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था।
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मेडिकल कॉलेज में हुए मृतक के पोस्टमार्टम की पूरक रिपोर्ट में चोट आने से मौत होने का उल्लेख है। इससे मामले में नामजद हुए पुलिसकर्मियों ने अपने बचाव में जो तर्क प्रस्तुत किए है, वह बेमानी साबित होते दिखने लगे हैं। आरोपियों के बयान व घटनाक्रम आपस में मेल नहीं खाने के कारण ही मामले की जांच अब तीसरे विवेचक के पास पहुंची है।
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पड़ोसी जनपद आजमगढ़ के पवई थाना अन्तर्गत हाजीपुर निवासी जियाउद्दीन की कथित पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला डेढ़ साल बाद अब फिर तूल पकड़ने लगा है। इस मामले में एक आरोपी के बारे में पूछतांछ के लिए पुलिस उसके दोस्त जियाउद्दीन को लेकर आयी थी।
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आरोप है कि इस दौरान थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने से जियाउद्दीन की हालत सम्मनपुर थाने में ही बिगड़ गई थी। बाद में जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में हंगामा मचने के बाद तत्कालीन स्वाट टीम प्रभारी के साथ ही सात अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी हत्या का केस दर्ज करने के साथ आरोपियों को निलंबित करने की कार्रवाई हुई थी।
इस मामले में चल रहे मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही सभी आरोपी पुलिस कर्मी बहाल तो कर दिए गए हैं, लेकिन जियाउद्दीन के पोस्टमार्टम की चिकित्सकीय रिपोर्ट मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने में अड़ंगा बनी है। लैब रिपोर्ट में जियाउद्दीन के फेफड़े में खून पाए जाने के बाद मौत का कारण पिटाई व चोट लगना माना जाने लगा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पोस्टमार्टम की मुख्य रिपोर्ट के बाद प्रस्तुत मेडिकल टीम की पूरक रिपोर्ट अब आरोपी पुलिस कर्मियों की परेशानी और बढ़ाने वाली है। मुख्य रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते बिसरा व लैब जांच कराई गई थी। यह दोनों जांच पूरी हो जाने के बाद चिकित्सकों से सप्लीमेंट्री रिपोर्ट मांगी गयी थी।
सूत्रों की माने तो पूरक रिपोर्ट में गंभीर चोट के चलते मौत होने की बात साफ है। नामजद हुए पुलिसकर्मियों ने अपने बचाव में कहा था कि वह सभी अकबरपुर नगर के एक होटल में बैठे थे। इसी बीच वहां आजमगढ़ से आ रही बस से जियाउद्दीन उतरा। उसे गंभीर चोट लगी थीं। इसके चलते ही उन लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गयी।
पुलिस की यह थ्योरी किसी के गले नहीं उतरती है। सरकारी बस में आखिर युवक को इतनी गंभीर चोट कैसे लगी कि कुछ देर में उसकी मौत हो गई। जाहिर तौर पर इन सवालों का जवाब मानवाधिकार आयोग या फिर अन्य किसी जांच संस्था के समक्ष देना आसान नहीं होगा।

प्रकरण की निष्पक्ष ढंग से विवेचना चल रही है। ज्यादा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जांच में पूरी पारदर्शिता के साथ विवेचना पूरी होगी। मामले में किसी भी दोषी को बख्शा या बचाया नहीं जाएगा।
- संजय कुमार राय, एएसपी
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