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Ambedkar Nagar News: चार दशक से भी पुराना है टांडा में दुर्गा पूजा का इतिहास

Sun, 29 Sep 2024 10:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Sun, 29 Sep 2024 10:30 PM IST
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The history of Durga Puja in Tanda is more than four decades old
कृष्ण कुमार कसौधन
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विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। पतित पावन मां सरयू की गोद में बसे टांडा नगर में दुर्गा पूजा का इतिहास 46 वर्ष पुराना है। कई उतार चढ़ाव देख चुके इस नगर में दुर्गा पूजा की धूम लगातार मजबूत होती आई है। लोगों की श्रद्धा व दृढ़ता का नतीजा है कि नगर में दुर्गा पूजा पंडालों की संख्या 175 के पार पहुंच चुकी है।

टांडा नगर में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1978 से हुई। बताया जाता है कि छज्जापुर दक्षिण में रहने वाले चांदसी डॉ. सीआर विश्वास ने सबसे पहले थिरुआ पुल के निकट पंडाल लगाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की। एक वर्ष बाद कस्बा मोहल्ले में बल्ली सेठ जबकि दुर्गा पूजा समिति के बैनर तले गया प्रसाद गुप्त, तामेश्वर बजाज, राधेश्याम जायसवाल और बाबू लाल को तीसरी प्रतिमा स्थापित करने का श्रेय गया। वर्ष 1987 तक एक-एक कर पंडालों की संख्या एक दर्जन तक पहुंच गई। वर्ष 1988 में प्रशासन ने नए दुर्गा पूजा पंडाल सजाने पर रोक लगा दी।
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दरअसल छज्जापुर दक्षिण में दुर्गा प्रसाद के निवास के निकट 13वीं प्रतिमा स्थापित करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। तहसील में टाइपिस्ट रहे बृजमोहन सिंह समेत कई अन्य ने तत्कालीन फैजाबाद जनपद के जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर नए दुर्गापूजा पंडाल की अनुमति मांगी, लेकिन नहीं मिली। मामला तूल पकड़ा और मुख्यमंत्री की दहलीज तक जा पहुंचा। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के हस्तक्षेप पर 13वीं प्रतिमा की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सका। आस्था का ज्वार इसके बाद लगातार तेज ही होता गया।
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इसका नतीजा यह है कि टांडा क्षेत्र में अब दुर्गा प्रतिमाओं की संख्या बढ़कर 175 के ऊपर हो गई है। प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही दुर्गा पूजा को कुशलतापूर्वक निपटाने के लिए वर्ष 1993 से केंद्रीय दुर्गा पूजा महासमिति का गठन किया गया। इसमें मधुवन यादव व घिसियावन मौर्य को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में काफी समय तक नंदू मेहरोत्रा व करतार सिंह जिम्मेदारी संभालते रहे। मौजूदा समय में केंद्रीय दुर्गा पूजा महासमिति अध्यक्ष विशाल मांझी व महामंत्री दिनेश मौर्य हैं।


केंद्रीय दुर्गा पूजा महासमिति के पूर्व अध्यक्ष पंडित कमला पति त्रिपाठी कहते हैं कि दुर्गा पूजा से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विरासत मजबूत होती है। यह अत्यंत सुखद है कि टांडा में इस परंपरा का निर्वाह अत्यंत बेहतर ढंग से होता चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था और भक्ति में सभी की बराबर जिम्मेदारी होती है कि वे आगे आकर अपना योगदान दें, ताकि परंपरा की जड़ों को मजबूत किया जा सके।
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