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Ambedkar Nagar News: श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर डटे रहना सबसे बड़ी शक्ति
Tue, 10 Feb 2026 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:43 PM IST
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प्रवाचक रामायणी इंदुमती
विद्युतनगर। टांडा के नागेश्वरनाथ महादेव मंदिर चौक पर श्रीराम कथा के दूसरे दिन मंगलवार को शिव-सती चरित्र का वर्णन किया गया। प्रवाचक रामायणी इंदुमती ने संयम, श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर डटे रहना सबसे बड़ी शक्ति है। अहंकार का परिणाम हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। त्याग और निष्ठा से ही धर्म की रक्षा होती है। सामाजिक समस्याओं का समाधान नैतिक मूल्यों से संभव है। सरल आचरण और संयम से जीवन संतुलित रहता है। माता सती शिव के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की प्रतीक हैं। पिता दक्ष की ओर से शिव का अपमान किए जाने के बावजूद सती ने शिव की महिमा का गुणगान किया और उनका पक्ष मजबूती से रखा। दक्ष यज्ञ में शिव के निरादर को सहन न कर पाने के कारण माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए। यह त्याग अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का प्रतीक बताया गया। कथा के इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने एकाग्रता के साथ सुना। शिव–सती चरित्र भक्तों को संयम, श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान रामचरितमानस की महत्ता पर भी चर्चा की गई।
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उन्होंने बताया कि श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर डटे रहना सबसे बड़ी शक्ति है। अहंकार का परिणाम हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। त्याग और निष्ठा से ही धर्म की रक्षा होती है। सामाजिक समस्याओं का समाधान नैतिक मूल्यों से संभव है। सरल आचरण और संयम से जीवन संतुलित रहता है। माता सती शिव के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की प्रतीक हैं। पिता दक्ष की ओर से शिव का अपमान किए जाने के बावजूद सती ने शिव की महिमा का गुणगान किया और उनका पक्ष मजबूती से रखा। दक्ष यज्ञ में शिव के निरादर को सहन न कर पाने के कारण माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए। यह त्याग अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का प्रतीक बताया गया। कथा के इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने एकाग्रता के साथ सुना। शिव–सती चरित्र भक्तों को संयम, श्रद्धा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान रामचरितमानस की महत्ता पर भी चर्चा की गई।
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