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सपा को टिकट बांटने से ज्यादा असंतुष्टों को मनाने की चुनौती
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अंबेडकरनगर। सपा के लिए जिले में टिकट बांटने से ज्यादा असंतुुष्टों को मनाने की चुनौती है। अभी तक जो संकेत हैं, उनमें बसपा से आए नेताओं को ही पांच में से चार सीट पर टिकट मिलना तय माना जा रहा है। टांडा सीट गठबंधन के खाते में जाने के आसार हैं। ऐसे में प्रत्येक सीट पर पार्टी के दावेदारों व उनके समर्थकों के बीच जो स्वाभाविक नाराजगी व असंतुष्टि सामने आने वाली है, उसे खत्म करने के लिए पार्टी को एड़ी चोटी का जोर समय रहते लगाना होगा। ऐसा न हुआ, तो नाराजगी का असर पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है।
वर्ष 2017 के आम चुनाव में पांच सीटों में से सपा को जिले की एक भी सीट पर कामयाबी हासिल नहीं हुई थी। हालांकि जलालपुर सीट पर हुए उप चुनाव में जरूर बाद मेें सपा प्रत्याशी सुभाष राय को विजय मिली थी। अब मौजूदा विधानसभा चुनाव में सपा ने सभी पांच सीटों पर जीत तय करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। बीते विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद से मौजूदा विधानसभा चुनाव का दौर शुरू होने से ठीक पहले तक चार सीटों पर बसपा के जिन कद्दावर नेताओं का राज माना जाता था, वे अब सपा में शामिल हो गए हैं।
इनमें अकबरपुर विधायक रामअचल राजभर, कटेहरी विधायक लालजी वर्मा, जलालपुर के पूर्व विधायक राकेश पांडेय व आलापुर के पूर्व विधायक त्रिभुवनदत्त शामिल हैं। पार्टी ने इन सभी नेताओं को संबंधित सीट पर टिकट देने के संकेत दे दिए हैं। टांडा की सीट गठबंधन के खाते में जाने की प्रबल संभावना है। ऐसे में सभी पांच सीटों पर सपा के जो नेता पिछले पांच वर्ष से तैयारी कर रहे थे, उन्हें करारा झटका लगने की संभावना है।
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सपा ने फिलहाल अभी किसी भी सीट पर अधिकृत रूप से कोई घोषणा नहीं की है, इसलिए दावेदारों की उम्मीद बनी हुई है। यह बात अलग है कि पुराने दावेदारों को भी पता है कि पार्टी ने सभी सीटों पर प्रत्याशियों का जो नाम तय किया है, उसमें उनका नाम नहीं है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि पार्टी जब प्रत्याशियों का नाम घोषित करेगी, तो पुराने दावेदारों की नाराजगी व असंतुष्टि स्वाभाविक तौर पर सामने आना तय है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि सपा के लिए इस बार टिकट घोषित करने से ज्यादा चुनौती असंतुष्टों को साधने की है।
यह हैं सपा के सीटवार दावेदार
अकबरपुर सीट पर बसपा से सपा में आए मौजूदा विधायक रामअचल राजभर के अलावा पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा, वरिष्ठ नेत्री विद्यावती राजभर, जलालपुर सीट पर बसपा से सपा में आए पूर्व सांसद राकेश पांडेय के अलावा मौजूदा विधायक सुभाषराय, लोहिया से अखिलेश अभियान के संयोजक सिद्धार्थ मिश्र, वरिष्ठ सपा नेता अभिषेक सिंह, फूलचंद्र यादव दावेदार हैं। कटेहरी में बसपा से सपा में आए मौजूदा विधायक लालजी वर्मा, पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी, पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय के पुत्र दीपू पांडेेय, सपा नेता शेषकुमार वर्मा, टांडा में पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा, पूर्व मंत्री अहमद हसन केे पुत्र हामिद हसन, दिवंगत पूर्व विधायक अजीमुलहक पहलवान केे पुत्र मुसाब, किछौछा नगर पंचायत अध्यक्ष के पति गौस अशरफ, जिला महासचिव मुजीब सोनू व सपा नेता राकेश यादव तथा आलापुर विधानसभा सीट पर बसपा से सपा में आए पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त के अलावा पूर्व विधायक कुंवर अरुण, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बलिराम गौतम, पूर्व विस प्रत्याशी संगीता कनौजिया, सुनीता सोनकर दावेदार हैं।
पार्टी नेतृत्व का निर्णय होगा मान्य
विधानसभा चुनाव में सभी का लक्ष्य मौजूदा सरकार को बदलना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह हम सभी को मान्य होगा। पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता यह समझता है कि यह चुनाव आम चुनाव नहीं है। इसमें किसी को भी कोई त्याग करने की जरूरत पड़ेगी, तो वह सहर्ष करेगा। पार्टी नेतृत्व उस त्याग का पूरा सम्मान करेगा।
-रामसकल यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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वर्ष 2017 के आम चुनाव में पांच सीटों में से सपा को जिले की एक भी सीट पर कामयाबी हासिल नहीं हुई थी। हालांकि जलालपुर सीट पर हुए उप चुनाव में जरूर बाद मेें सपा प्रत्याशी सुभाष राय को विजय मिली थी। अब मौजूदा विधानसभा चुनाव में सपा ने सभी पांच सीटों पर जीत तय करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। बीते विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद से मौजूदा विधानसभा चुनाव का दौर शुरू होने से ठीक पहले तक चार सीटों पर बसपा के जिन कद्दावर नेताओं का राज माना जाता था, वे अब सपा में शामिल हो गए हैं।
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इनमें अकबरपुर विधायक रामअचल राजभर, कटेहरी विधायक लालजी वर्मा, जलालपुर के पूर्व विधायक राकेश पांडेय व आलापुर के पूर्व विधायक त्रिभुवनदत्त शामिल हैं। पार्टी ने इन सभी नेताओं को संबंधित सीट पर टिकट देने के संकेत दे दिए हैं। टांडा की सीट गठबंधन के खाते में जाने की प्रबल संभावना है। ऐसे में सभी पांच सीटों पर सपा के जो नेता पिछले पांच वर्ष से तैयारी कर रहे थे, उन्हें करारा झटका लगने की संभावना है।
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सपा ने फिलहाल अभी किसी भी सीट पर अधिकृत रूप से कोई घोषणा नहीं की है, इसलिए दावेदारों की उम्मीद बनी हुई है। यह बात अलग है कि पुराने दावेदारों को भी पता है कि पार्टी ने सभी सीटों पर प्रत्याशियों का जो नाम तय किया है, उसमें उनका नाम नहीं है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि पार्टी जब प्रत्याशियों का नाम घोषित करेगी, तो पुराने दावेदारों की नाराजगी व असंतुष्टि स्वाभाविक तौर पर सामने आना तय है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि सपा के लिए इस बार टिकट घोषित करने से ज्यादा चुनौती असंतुष्टों को साधने की है।
यह हैं सपा के सीटवार दावेदार
अकबरपुर सीट पर बसपा से सपा में आए मौजूदा विधायक रामअचल राजभर के अलावा पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा, वरिष्ठ नेत्री विद्यावती राजभर, जलालपुर सीट पर बसपा से सपा में आए पूर्व सांसद राकेश पांडेय के अलावा मौजूदा विधायक सुभाषराय, लोहिया से अखिलेश अभियान के संयोजक सिद्धार्थ मिश्र, वरिष्ठ सपा नेता अभिषेक सिंह, फूलचंद्र यादव दावेदार हैं। कटेहरी में बसपा से सपा में आए मौजूदा विधायक लालजी वर्मा, पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी, पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय के पुत्र दीपू पांडेेय, सपा नेता शेषकुमार वर्मा, टांडा में पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा, पूर्व मंत्री अहमद हसन केे पुत्र हामिद हसन, दिवंगत पूर्व विधायक अजीमुलहक पहलवान केे पुत्र मुसाब, किछौछा नगर पंचायत अध्यक्ष के पति गौस अशरफ, जिला महासचिव मुजीब सोनू व सपा नेता राकेश यादव तथा आलापुर विधानसभा सीट पर बसपा से सपा में आए पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त के अलावा पूर्व विधायक कुंवर अरुण, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बलिराम गौतम, पूर्व विस प्रत्याशी संगीता कनौजिया, सुनीता सोनकर दावेदार हैं।
पार्टी नेतृत्व का निर्णय होगा मान्य
विधानसभा चुनाव में सभी का लक्ष्य मौजूदा सरकार को बदलना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह हम सभी को मान्य होगा। पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता यह समझता है कि यह चुनाव आम चुनाव नहीं है। इसमें किसी को भी कोई त्याग करने की जरूरत पड़ेगी, तो वह सहर्ष करेगा। पार्टी नेतृत्व उस त्याग का पूरा सम्मान करेगा।
-रामसकल यादव, सपा जिलाध्यक्ष