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Ambedkar Nagar News: 3.38 करोड़ से बदलेगी 34 बी-पैक्स समितियों की सूरत
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जलालपुर के बड़ागांव स्थित बहु-उद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति। संवाद
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अंबेडकरनगर। जिले में लंबे समय से जर्जर पड़े बी-पैक्स समितियों के भवनों और गोदामों की सूरत अब बदलने की उम्मीद जगी है। सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले की 34 बी-पैक्स समितियों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य को मंजूरी मिली है। इसके लिए कुल 3.38 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
जिले में वर्ष 1980 से 1985 के बीच निर्मित 99 बी-पैक्स समितियों के गोदामों की छत, प्लास्टर, फर्श, खिड़की और दरवाजे आदि लंबे समय से जर्जर हैं। इनके जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए विधान परिषद सदस्य डॉ. हरिओम पांडेय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर की ओर से 34 समितियों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई।
स्वीकृत धनराशि में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 समितियों के लिए 168.05 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 17 समितियों के लिए 170 लाख रुपये शामिल हैं। कार्य पूरा होने के बाद जर्जर भवनों और गोदामों के कारण प्रभावित हो रही सहकारी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
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इन ब्लॉकों की समितियों का होगा जीर्णोद्धार
भियांव ब्लॉक की नेवादा कलां, खजुरी करौदी, पखनपुर, अंबरपुर और दिनकरपुर समितियां शामिल हैं। जहांगीरगंज की अलऊपुर, ठेगीप्रतापपुर और परतूपुर तथा बसखारी की सिंहपुर, तरौली मुबारकपुर, बरही मोहनपुर और अशरफपुर मजगांवा समितियों को भी मंजूरी मिली है। रामनगर की रामनगर महुवर, बरहीपुर चहोड़ा, संदहा मजगांवा और मकदूमनगर समितियों में कार्य कराया जाएगा। अकबरपुर की सिकन्दरपुर, रामपुर सम्पट्टी, सिझौली, रामपुर सकरवारी और ताराखुर्द तथा कटेहरी की औरंगनगर, अशरफपुर बरवां, महरुआं गोला, सुमेरपुर, आशाजीतपुर कला और हैदरावाद समितियां भी सूची में हैं। जलालपुर की खजुरी करौदी, जीवत, बड़ागांव, धवरुआ, मैनुद्दीनपुर और नगपुर समितियों का भी जीर्णोद्धार होगा।
किसानों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
बी-पैक्स समितियां गांवों में सहकारिता व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भवन और गोदाम दुरुस्त होने से किसानों को सहकारी ऋण, खाद-बीज और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। भंडारण और वितरण व्यवस्था बेहतर होने से किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिल सकेंगी।
एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय ने स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि समितियों के मजबूत होने से किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज और कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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जिले में वर्ष 1980 से 1985 के बीच निर्मित 99 बी-पैक्स समितियों के गोदामों की छत, प्लास्टर, फर्श, खिड़की और दरवाजे आदि लंबे समय से जर्जर हैं। इनके जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए विधान परिषद सदस्य डॉ. हरिओम पांडेय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर की ओर से 34 समितियों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई।
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स्वीकृत धनराशि में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 समितियों के लिए 168.05 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 17 समितियों के लिए 170 लाख रुपये शामिल हैं। कार्य पूरा होने के बाद जर्जर भवनों और गोदामों के कारण प्रभावित हो रही सहकारी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
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इन ब्लॉकों की समितियों का होगा जीर्णोद्धार
भियांव ब्लॉक की नेवादा कलां, खजुरी करौदी, पखनपुर, अंबरपुर और दिनकरपुर समितियां शामिल हैं। जहांगीरगंज की अलऊपुर, ठेगीप्रतापपुर और परतूपुर तथा बसखारी की सिंहपुर, तरौली मुबारकपुर, बरही मोहनपुर और अशरफपुर मजगांवा समितियों को भी मंजूरी मिली है। रामनगर की रामनगर महुवर, बरहीपुर चहोड़ा, संदहा मजगांवा और मकदूमनगर समितियों में कार्य कराया जाएगा। अकबरपुर की सिकन्दरपुर, रामपुर सम्पट्टी, सिझौली, रामपुर सकरवारी और ताराखुर्द तथा कटेहरी की औरंगनगर, अशरफपुर बरवां, महरुआं गोला, सुमेरपुर, आशाजीतपुर कला और हैदरावाद समितियां भी सूची में हैं। जलालपुर की खजुरी करौदी, जीवत, बड़ागांव, धवरुआ, मैनुद्दीनपुर और नगपुर समितियों का भी जीर्णोद्धार होगा।
किसानों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
बी-पैक्स समितियां गांवों में सहकारिता व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भवन और गोदाम दुरुस्त होने से किसानों को सहकारी ऋण, खाद-बीज और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। भंडारण और वितरण व्यवस्था बेहतर होने से किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिल सकेंगी।
एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय ने स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि समितियों के मजबूत होने से किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज और कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।