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नए लुक में दिखेगा टांडा का घंटाघर
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विद्युतनगर। औद्योगिक नगरी टांडा के करीब नौ दशक पुराने एतिहासिक घंटाघर के दिन बहुरने वाले हैं। घंटाघर के शिखर पर लगी घड़ी के सुइयों की रफ्तार फिर तेजी पकड़ने वाली हैं। जिले के एक मात्र घंटाघर का जल्द ही जीर्णोद्धार शुरू होने वाला है। इसकी स्वीकृति भी मिल गयी है। लगभग 16 लाख की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया जायेगा। घंटाघर अब चमक-धमक के साथ नए लुक में नजर आएगा।
सरयू नदी की गोद में बसे एतिहासिक टांडा नगर की पहचान दशकों पुरानी है। औद्योगिक नगर के रूप में प्रसिद्ध टांडा में कई प्रांतों के व्यापारियों का आवागमन हुआ करता था। बड़ी संख्या में व्यापारी यहां से कपड़ों का व्यापार करते थे। करीब नौ दशक पहले इसकी स्थापना हुई थी। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष बलभद्र प्रसाद ने वर्ष 1928 में इसका निर्माण कराया था। इससे टांडा को एक नई पहचान मिली थी। चारों दिशाओं से लोग समय देख सकें, इसके लिए घंटाघर के शिखर पर चारों दिशाओं में एक-एक घड़ी लगाई गई। इसमें से दो घड़ियां बीते वर्षों में चोरी हो गईं, शेष दो लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इसके चलते घंटाघर में लगी घड़ियों की टिक-टिक बंद हो गई है।
नगर चौक के राजू गुप्ता, सतीश वर्मा, कृष्ण कुमार सोनी, सुरेश बजाज, संजय चौरसिया, अरुण पाण्डेय, शंकर गुप्ता ने बताया कि घंटाघर टांडा नगर का हृदयस्थल है, समूचे जिले की धरोहर है। नागरिकों की अपेक्षा के अनुरूप जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन, टांडा विधायक संजूदेवी व नगर पालिका प्रशासन के प्रयास से जनपद के एक मात्र घंटाघर का जल्द ही जीर्णोद्धार शुरू होने वाला है। अधिशाषी अधिकारी टांडा नगर पालिका डॉ. आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि एतिहासिक विरासत को संजोए रखने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गयी है। इसकी स्वीकृति भी मिल गयी है। लगभग 16 लाख की लागत से चौक घंटाघर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जो नए लुक में चमक-धमक के साथ नजर आयेगा। घंटाघर की चारों दिशा में घड़ी लगाने के साथ इसे नया लुक प्रदान किया जाएगा।
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सरयू नदी की गोद में बसे एतिहासिक टांडा नगर की पहचान दशकों पुरानी है। औद्योगिक नगर के रूप में प्रसिद्ध टांडा में कई प्रांतों के व्यापारियों का आवागमन हुआ करता था। बड़ी संख्या में व्यापारी यहां से कपड़ों का व्यापार करते थे। करीब नौ दशक पहले इसकी स्थापना हुई थी। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष बलभद्र प्रसाद ने वर्ष 1928 में इसका निर्माण कराया था। इससे टांडा को एक नई पहचान मिली थी। चारों दिशाओं से लोग समय देख सकें, इसके लिए घंटाघर के शिखर पर चारों दिशाओं में एक-एक घड़ी लगाई गई। इसमें से दो घड़ियां बीते वर्षों में चोरी हो गईं, शेष दो लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इसके चलते घंटाघर में लगी घड़ियों की टिक-टिक बंद हो गई है।
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नगर चौक के राजू गुप्ता, सतीश वर्मा, कृष्ण कुमार सोनी, सुरेश बजाज, संजय चौरसिया, अरुण पाण्डेय, शंकर गुप्ता ने बताया कि घंटाघर टांडा नगर का हृदयस्थल है, समूचे जिले की धरोहर है। नागरिकों की अपेक्षा के अनुरूप जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन, टांडा विधायक संजूदेवी व नगर पालिका प्रशासन के प्रयास से जनपद के एक मात्र घंटाघर का जल्द ही जीर्णोद्धार शुरू होने वाला है। अधिशाषी अधिकारी टांडा नगर पालिका डॉ. आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि एतिहासिक विरासत को संजोए रखने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गयी है। इसकी स्वीकृति भी मिल गयी है। लगभग 16 लाख की लागत से चौक घंटाघर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जो नए लुक में चमक-धमक के साथ नजर आयेगा। घंटाघर की चारों दिशा में घड़ी लगाने के साथ इसे नया लुक प्रदान किया जाएगा।
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