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पर्ची को भटक रहे किसान, बर्बाद हो रही खेतों में खड़ी फसल
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कटेहरी। किसानों के लिए कभी कैश क्रॉप कही जाने वाली गन्ने की फसल मुश्किलें खड़ी कर रही है। गन्ना विकास समिति व चीनी मिल में बिचौलियों की जुगलबंदी ने आम किसानों के समक्ष मुश्किल खड़ा कर दी है। आम किसान जहां अपनी उपज बेचने के लिए पर्ची नहीं पा रहे हैं, वहीं बिचौलियों के लिए पर्ची का कोई संकट नही है।
तमाम क्रय केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से गन्ने की बिक्री हो रही है। पर्ची न मिलने की वजह से किसान गन्ने की फसल 160 से 180 रुपए क्विंटल की दर से क्रेशर पर बेचने को विवश हैं जबकि सरकार द्वारा दर 320 रुपये प्रति क्विंटल घोषित है।
कटेहरी, कुर्मीडीहा, नसीरपुर, किशुनपुर, बरामदपुर व महरुआ सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की गन्ने की फसल पर्ची के अभाव में खेतों में ही पड़ी सूख रही है। पर्ची प्राप्त करने के लिए किसान चीनी मिल व गन्ना विकास समिति का चक्कर काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि कभी कैश क्राप के रूप में जानी जाने वाली गन्ने की फसल अब निराश कर रही है। इससे किसान खासे परेशान हैं।
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कुर्मीडीहा गांव निवासी गन्ना किसान सरजूशरण का कहना है कि उनकी अगेती प्रजाति का पेड़ी गन्ना पर्ची के अभाव में महीनों से खेत में खड़ी सूख रही है। गन्ना किसान सुरेशचंद्र वर्मा का आरोप है कि समिति द्वारा ही उनकी 16 पर्ची की कटौती कर दी गयी।
करीब दो बीघा गन्ने की फसल खड़ी है। किसान श्रीपति सिंह ने आरोप लगाया है कि अधिकारी गन्ना किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहें हैं। किसान प्रदीप सिंह ने बताया कि अधिकारियों से जब पर्ची के बारे में जानकारी की जाती है तो वे सीधे मुंह बात तक नहीं करते।
नकटहा निवासी केशवराम वर्मा ने बताया कि बुआई के समय तरह-तरह का प्रलोभन देने वाले अधिकारी ही इस समय गन्ना किसानों को आंख दिखा रहें हैं। तौल के समय गन्ने में तरह-तरह की कमी निकाल कर किसानों का निरंतर शोषण किया जा रहा है। जब बिचौलियों के माध्यम से गन्ने की आपूर्ति की जाती है तो मिल कर्मचारी भी सहयोग के लिए काफी तत्पर दिखायी देते हैं।
पेड़ी गन्ना न बिक पाने से वह रबी फसल की बुवाई भी नहीं कर सके। इसके अलावा खेत में खड़ी गन्ने की फसल को छुट्टा मवेशी भी काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसान गन्ने की फसल से अब तौबा करने लगे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी हरिकृष्ण गुप्त ने बताया कि रोस्टर के अनुरूप पर्ची मुहैया करायी जा रही है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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तमाम क्रय केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से गन्ने की बिक्री हो रही है। पर्ची न मिलने की वजह से किसान गन्ने की फसल 160 से 180 रुपए क्विंटल की दर से क्रेशर पर बेचने को विवश हैं जबकि सरकार द्वारा दर 320 रुपये प्रति क्विंटल घोषित है।
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कटेहरी, कुर्मीडीहा, नसीरपुर, किशुनपुर, बरामदपुर व महरुआ सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की गन्ने की फसल पर्ची के अभाव में खेतों में ही पड़ी सूख रही है। पर्ची प्राप्त करने के लिए किसान चीनी मिल व गन्ना विकास समिति का चक्कर काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि कभी कैश क्राप के रूप में जानी जाने वाली गन्ने की फसल अब निराश कर रही है। इससे किसान खासे परेशान हैं।
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कुर्मीडीहा गांव निवासी गन्ना किसान सरजूशरण का कहना है कि उनकी अगेती प्रजाति का पेड़ी गन्ना पर्ची के अभाव में महीनों से खेत में खड़ी सूख रही है। गन्ना किसान सुरेशचंद्र वर्मा का आरोप है कि समिति द्वारा ही उनकी 16 पर्ची की कटौती कर दी गयी।
करीब दो बीघा गन्ने की फसल खड़ी है। किसान श्रीपति सिंह ने आरोप लगाया है कि अधिकारी गन्ना किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहें हैं। किसान प्रदीप सिंह ने बताया कि अधिकारियों से जब पर्ची के बारे में जानकारी की जाती है तो वे सीधे मुंह बात तक नहीं करते।
नकटहा निवासी केशवराम वर्मा ने बताया कि बुआई के समय तरह-तरह का प्रलोभन देने वाले अधिकारी ही इस समय गन्ना किसानों को आंख दिखा रहें हैं। तौल के समय गन्ने में तरह-तरह की कमी निकाल कर किसानों का निरंतर शोषण किया जा रहा है। जब बिचौलियों के माध्यम से गन्ने की आपूर्ति की जाती है तो मिल कर्मचारी भी सहयोग के लिए काफी तत्पर दिखायी देते हैं।
पेड़ी गन्ना न बिक पाने से वह रबी फसल की बुवाई भी नहीं कर सके। इसके अलावा खेत में खड़ी गन्ने की फसल को छुट्टा मवेशी भी काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसान गन्ने की फसल से अब तौबा करने लगे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी हरिकृष्ण गुप्त ने बताया कि रोस्टर के अनुरूप पर्ची मुहैया करायी जा रही है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।