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बैंकों मेें हड़ताल, 200 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
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अंबेडकरनगर। निजीकरण के विरोध में सोमवार को बैंकों में हड़ताल उपभोक्ताओं पर भारी पड़ी। हड़ताल की समुचित जानकारी न होने पर विभिन्न कार्यों के लिए उपभोक्ता संबंधित बैंक शाखाओं में पहुंचे, लेकिन उन्हेें मायूसी हाथ लगी। इस बीच जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 24 बैंकों की 182 शाखाओं के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार व प्रदर्शन कर हक की आवाज बुलंद की। निजीकरण के विरोध में सोमवार को शुरू हुई दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन ही 200 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। निजीकरण से बैंक कर्मचारियों का हक मारा जाएगा। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्र ही निजीकरण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सोमवार से दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर बैंक कर्मचारी चले गए। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक, आंध्रा बैंक समेत 19 बैंकों की 170 शाखाओं के ताले नहीं खुले। बताते चलें कि जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाएं संचालित हैं। सोमवार को कुछ निजी बैंक की शाखाओं में सुबह कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन बाद में ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने संबंधित शाखाओं को भी बंद करा दिया। ऐसे में जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाओं में कार्य पूरी तरह ठप रहा। आल इंडिया बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स के सचिव आशुतोष सिंह ने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। ऐसा कर पूंजीपतियों को लाभ दिलाने का प्रयास हो रहा है।
निजीकरण होने से बैंक कर्मियों का हक मारा जाएगा। उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। ऐसे में निजीकरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स एसोसिएशन की सेंट्रल कमेटी मेंबर संगीता यादव ने कहा कि निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन इसे लेकर तनिक भी गंभीरता जिम्मेदारों की ओर से नहीं दिखाई जा रही है। यह अत्यंत चिंताजनक है। निजीकरण प्रक्रिया पर यदि शीघ्र ही रोक नहीं लगाई गई, तो उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। विकास, मनीष, शिवपूजन, चंद्रशेखर, प्रमोद, अरुण चौरसिया ने कहा कि मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। यदि निजीकरण पर रोक नहीं लगाई गई, तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा। उधर, सोमवार को हड़ताल के चलते पहले ही दिन इसका व्यापक असर देखने को मिला। लगभग 200 करोड़ रुपये का लेनदेन इस बीच प्रभावित रहा।
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कोई नहीं करा सका इलाज, तो कोई नहीं खरीद सका किताब
बैंकों में हड़ताल का प्रतिकूल प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ा। जिन उपभोक्ताओं को हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वे विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित बैंक पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। टांडा के आसोपुर निवासी लालमणि जानकारी के अभाव में 5 हजार रुपये निकालने के लिए टांडा चौक स्थित एसबीआई बैंक शाखा पहुंचे थे। वहां उन्हें बैंक बंद मिला। आसपास के एटीएम पर भी कोशिश की, लेकिन कैश की नहीं हो सकी। अमर उजाला को बताया कि उसे इलाज के लिए अयोध्या जाना था। इसके लिए 5 हजार रुपये की जरूरत थी। धननिकासी न होने से अब वह नहीं जा सकेगा। अकबरपुर नगर में किराए के मकान में रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहे टांडा निवासी अभिषेक ने कहा कि उसे कुछ किताबें खरीदनी थीं। न तो बैंक से धननिकासी हो सकी और न ही एटीएम से। ऐसे में अब वह बैंक खुलने के बाद ही किताब खरीद सकेगा। अकबरपुर नगर के मीरानपुर निवासी फूलचंद्र ने कहा कि उसे खेत में खाद डालने के लिए रुपयों की जरूरत थी। इसके लिए वह धननिकासी के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचा था। यहां पता चला कि हड़ताल है। एटीएम से भी धननिकासी नहीं हो सकी। अकबरपुर बस स्टेशन पर मिले सीतापुर निवासी सौरभ एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते दिखे। कहा कि उन्हें धन की जरूरत थी। किसी भी एटीएम से धननिकासी नहीं हो सकी है। लखनऊ तक का लंबा सफर तय करना है।
एटीएम में नहीं रहा कैश
शनिवार व रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को हड़ताल के चलते बैंकों के बंद होने से एटीएम सेवा पूरी तरह बेपटरी हो गई। जिले में विभिन्न बैंकों के 125 एटीएम स्थापित हैं। इनमें से लगभग सभी एटीएम में सोमवार को कैश नदारद रहा। इससे उपभोक्ता धननिकासी के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाने को मजबूर हुए। उपभोक्ता रामरतन, सीमा, जमाल, अनुपम व शीतल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकों में हड़ताल को देखते हुए जिम्मेदारों को चाहिए था कि एटीएम सेवा सुचारु रूप से संचालित हो सके। एटीएम सेवा के बेपटरी होने से धननिकासी के लिए उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल से प्रभावित रहा कार्य
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाओं में सोमवार को कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। हड़ताल के चलते लगभग 200 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
- आशीष कुमार सिंह, एलडीएम
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निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सोमवार से दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर बैंक कर्मचारी चले गए। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक, आंध्रा बैंक समेत 19 बैंकों की 170 शाखाओं के ताले नहीं खुले। बताते चलें कि जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाएं संचालित हैं। सोमवार को कुछ निजी बैंक की शाखाओं में सुबह कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन बाद में ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने संबंधित शाखाओं को भी बंद करा दिया। ऐसे में जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाओं में कार्य पूरी तरह ठप रहा। आल इंडिया बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स के सचिव आशुतोष सिंह ने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। ऐसा कर पूंजीपतियों को लाभ दिलाने का प्रयास हो रहा है।
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निजीकरण होने से बैंक कर्मियों का हक मारा जाएगा। उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। ऐसे में निजीकरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स एसोसिएशन की सेंट्रल कमेटी मेंबर संगीता यादव ने कहा कि निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन इसे लेकर तनिक भी गंभीरता जिम्मेदारों की ओर से नहीं दिखाई जा रही है। यह अत्यंत चिंताजनक है। निजीकरण प्रक्रिया पर यदि शीघ्र ही रोक नहीं लगाई गई, तो उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। विकास, मनीष, शिवपूजन, चंद्रशेखर, प्रमोद, अरुण चौरसिया ने कहा कि मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। यदि निजीकरण पर रोक नहीं लगाई गई, तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा। उधर, सोमवार को हड़ताल के चलते पहले ही दिन इसका व्यापक असर देखने को मिला। लगभग 200 करोड़ रुपये का लेनदेन इस बीच प्रभावित रहा।
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कोई नहीं करा सका इलाज, तो कोई नहीं खरीद सका किताब
बैंकों में हड़ताल का प्रतिकूल प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ा। जिन उपभोक्ताओं को हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वे विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित बैंक पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। टांडा के आसोपुर निवासी लालमणि जानकारी के अभाव में 5 हजार रुपये निकालने के लिए टांडा चौक स्थित एसबीआई बैंक शाखा पहुंचे थे। वहां उन्हें बैंक बंद मिला। आसपास के एटीएम पर भी कोशिश की, लेकिन कैश की नहीं हो सकी। अमर उजाला को बताया कि उसे इलाज के लिए अयोध्या जाना था। इसके लिए 5 हजार रुपये की जरूरत थी। धननिकासी न होने से अब वह नहीं जा सकेगा। अकबरपुर नगर में किराए के मकान में रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहे टांडा निवासी अभिषेक ने कहा कि उसे कुछ किताबें खरीदनी थीं। न तो बैंक से धननिकासी हो सकी और न ही एटीएम से। ऐसे में अब वह बैंक खुलने के बाद ही किताब खरीद सकेगा। अकबरपुर नगर के मीरानपुर निवासी फूलचंद्र ने कहा कि उसे खेत में खाद डालने के लिए रुपयों की जरूरत थी। इसके लिए वह धननिकासी के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचा था। यहां पता चला कि हड़ताल है। एटीएम से भी धननिकासी नहीं हो सकी। अकबरपुर बस स्टेशन पर मिले सीतापुर निवासी सौरभ एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते दिखे। कहा कि उन्हें धन की जरूरत थी। किसी भी एटीएम से धननिकासी नहीं हो सकी है। लखनऊ तक का लंबा सफर तय करना है।
एटीएम में नहीं रहा कैश
शनिवार व रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को हड़ताल के चलते बैंकों के बंद होने से एटीएम सेवा पूरी तरह बेपटरी हो गई। जिले में विभिन्न बैंकों के 125 एटीएम स्थापित हैं। इनमें से लगभग सभी एटीएम में सोमवार को कैश नदारद रहा। इससे उपभोक्ता धननिकासी के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाने को मजबूर हुए। उपभोक्ता रामरतन, सीमा, जमाल, अनुपम व शीतल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकों में हड़ताल को देखते हुए जिम्मेदारों को चाहिए था कि एटीएम सेवा सुचारु रूप से संचालित हो सके। एटीएम सेवा के बेपटरी होने से धननिकासी के लिए उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल से प्रभावित रहा कार्य
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते जिले में 24 बैंकों की 182 शाखाओं में सोमवार को कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। हड़ताल के चलते लगभग 200 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
- आशीष कुमार सिंह, एलडीएम