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कोर्ट के फैसले से दावेदारों में हलचल
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अंबेडकरनगर। पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के ताजे फैसले ने जिले में भी हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ जहां प्रशासनिक मशीनरी ने नए सिरे से आरक्षण तय करने की कवायद शुरू कर दी है, वहीं आरक्षण के चलते चुनाव लड़ने से वंचित तमाम दावेदारों के चेहरे खिल गए हैं। इसके साथ ही उन सीटों के दावेदारों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं, जिन पर आरक्षण के चलते कई दिग्गजों के बाहर होने से अन्य दावेदार राहत महसूस करने लगे थे। अब जबकि कोर्ट ने नए सिरे से आरक्षण तय करने को कह दिया है तो जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में अलग-अलग पदों के लिए ताल ठोक रहे दावेदारों के बीच हलचल देखने को मिली।
पंचायत चुनाव को लेकर जब आरक्षण की अंतिम सूची का प्रकाशन होने ही वाला था तो उस पर ऐन मौके पर हाईकोर्ट ने गत दिवस रोक लगा दी थी। इसके बाद से कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इस बीच सोमवार को हाईकोर्ट ने उस आरक्षण व्यवस्था को खारिज कर दिया है, जिस आधार पर आरक्षण तय किया गया था। वर्ष 2015 के आरक्षण को आधार मानकर नए सिरे से आरक्षण तय करने का हाईकोर्ट की ओर से आदेश देने के बाद से जिले में अलग-अलग पदों के दावेदारों में हलचल मच गई। सबसे ज्यादा खुशी उन दावेदारों में देखने को मिली जो बीते कई वर्ष से संबंधित पदों के लिए तैयारी कर रहे थे, लेकिन बीते दिनों प्रशासन की ओर से अनंतिम आरक्षण सूची जारी करने के बाद चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। ऐसे दावेदारों में सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान पद के दावेदार शामिल थे।
इसके चलते ही ग्राम प्रधान पद के आरक्षण को लेकर 600 से अधिक आपत्तियां जिले में दाखिल की गई थीं। हालांकि इन पर फैसला आने से पहले ही हाईकोर्ट ने अपना फरमान सुना दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद उन दावेदारों के चेहरे खिल उठे, जो चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। उनमें सीटों के आरक्षण में फेरबदल होने को लेकर नई उम्मीद जाग गई। तमाम ग्राम पंचायतों में ऐसे वंचित दावेदारों व उनके समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां भी मनाईं।
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उधर इस फैसले ने उन सीटों के दावेदारों की धुकधुकी भी बढ़ा दी है, जो आरक्षण के चलते दिग्गजों के बाहर होने के बाद अलग-अलग सीटों पर ताल ठोक रहे थे। उन्हें लगने लगा था कि दिग्गजों के हटने के चलते उनकी राह काफी आसान हो चुकी है, लेकिन अब नए सिरे से आरक्षण तय होने की खबर आने के बाद ऐसे दावेदारों के बीच सोमवार को मायूसी भी देखने को मिली। इन सबके बीच प्रशासन ने नए सिरे से आरक्षण का क्रम लागू करने की कवायद भी शुरू कर दी है। ऐसे में अब अगले कुछ दिन बाद एक बार फिर से अलग-अलग सीटों पर आरक्षण को लेकर गहमागहमी देखने को मिलेगी।
प्रधान पद के लिए जारी हुआ था यह आरक्षण
बीते दिनों 902 प्रधान पद के लिए जो आरक्षण सूची जारी की गई थी, उसमें 71 अनुसूचित जाति महिला, 133 अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 84, पिछड़ा वर्ग के लिए 161, महिला के लिए 149 व अनारक्षित श्रेणी में 304 पद रखे गए थे। कुल नौ ब्लॉक में ग्राम प्रधान पद के लिए चुनाव कराया जाना है।
अन्य पदों पर थी यह व्यवस्था
1020 क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए जो आरक्षण सूची जारी की गई थी, उसमें अनुसूचित जाति महिला के लिए 94, अनुसूचित जाति के लिए 178, पिछड़ी जात महिला के लिए 94, पिछड़ी जाति के लिए 178, महिला के लिए 155 तथा अनारक्षित श्रेणी में 321 पद रखा गया था। जिला पंचायत सदस्य के 41 पद की तुलना में अनुसूचित जाति महिला के लिए 4, अनुसूचित जाति के लिए 7, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 4, पिछड़ा वर्ग के लिए 7, महिला के लिए 6 व 13 पद को अनारक्षित श्रेणी में रखा गया था। ब्लाक प्रमुख के 9 पद की तुलना में अनुसूचित जाति के लिए 2, पिछड़ा वर्ग के लिए 3, महिला वर्ग के लिए 1 व अनारक्षित श्रेणी में 3 पदों को रखा गया था।
निर्देशों का होगा पालन
पंचायत चुनाव को लेकर कोर्ट ने जो आदेश जारी किया है, उसे लेकर शासन से जो भी स्पष्ट निर्देश आता है, उसका पूरी तरह पालन कराया जाएगा। चुनाव को बेहतर ढंग से संपन्न कराने की सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
-डॉ. पंकज कुमार वर्मा, एडीएम
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पंचायत चुनाव को लेकर जब आरक्षण की अंतिम सूची का प्रकाशन होने ही वाला था तो उस पर ऐन मौके पर हाईकोर्ट ने गत दिवस रोक लगा दी थी। इसके बाद से कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इस बीच सोमवार को हाईकोर्ट ने उस आरक्षण व्यवस्था को खारिज कर दिया है, जिस आधार पर आरक्षण तय किया गया था। वर्ष 2015 के आरक्षण को आधार मानकर नए सिरे से आरक्षण तय करने का हाईकोर्ट की ओर से आदेश देने के बाद से जिले में अलग-अलग पदों के दावेदारों में हलचल मच गई। सबसे ज्यादा खुशी उन दावेदारों में देखने को मिली जो बीते कई वर्ष से संबंधित पदों के लिए तैयारी कर रहे थे, लेकिन बीते दिनों प्रशासन की ओर से अनंतिम आरक्षण सूची जारी करने के बाद चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। ऐसे दावेदारों में सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान पद के दावेदार शामिल थे।
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इसके चलते ही ग्राम प्रधान पद के आरक्षण को लेकर 600 से अधिक आपत्तियां जिले में दाखिल की गई थीं। हालांकि इन पर फैसला आने से पहले ही हाईकोर्ट ने अपना फरमान सुना दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद उन दावेदारों के चेहरे खिल उठे, जो चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। उनमें सीटों के आरक्षण में फेरबदल होने को लेकर नई उम्मीद जाग गई। तमाम ग्राम पंचायतों में ऐसे वंचित दावेदारों व उनके समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां भी मनाईं।
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उधर इस फैसले ने उन सीटों के दावेदारों की धुकधुकी भी बढ़ा दी है, जो आरक्षण के चलते दिग्गजों के बाहर होने के बाद अलग-अलग सीटों पर ताल ठोक रहे थे। उन्हें लगने लगा था कि दिग्गजों के हटने के चलते उनकी राह काफी आसान हो चुकी है, लेकिन अब नए सिरे से आरक्षण तय होने की खबर आने के बाद ऐसे दावेदारों के बीच सोमवार को मायूसी भी देखने को मिली। इन सबके बीच प्रशासन ने नए सिरे से आरक्षण का क्रम लागू करने की कवायद भी शुरू कर दी है। ऐसे में अब अगले कुछ दिन बाद एक बार फिर से अलग-अलग सीटों पर आरक्षण को लेकर गहमागहमी देखने को मिलेगी।
प्रधान पद के लिए जारी हुआ था यह आरक्षण
बीते दिनों 902 प्रधान पद के लिए जो आरक्षण सूची जारी की गई थी, उसमें 71 अनुसूचित जाति महिला, 133 अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 84, पिछड़ा वर्ग के लिए 161, महिला के लिए 149 व अनारक्षित श्रेणी में 304 पद रखे गए थे। कुल नौ ब्लॉक में ग्राम प्रधान पद के लिए चुनाव कराया जाना है।
अन्य पदों पर थी यह व्यवस्था
1020 क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए जो आरक्षण सूची जारी की गई थी, उसमें अनुसूचित जाति महिला के लिए 94, अनुसूचित जाति के लिए 178, पिछड़ी जात महिला के लिए 94, पिछड़ी जाति के लिए 178, महिला के लिए 155 तथा अनारक्षित श्रेणी में 321 पद रखा गया था। जिला पंचायत सदस्य के 41 पद की तुलना में अनुसूचित जाति महिला के लिए 4, अनुसूचित जाति के लिए 7, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 4, पिछड़ा वर्ग के लिए 7, महिला के लिए 6 व 13 पद को अनारक्षित श्रेणी में रखा गया था। ब्लाक प्रमुख के 9 पद की तुलना में अनुसूचित जाति के लिए 2, पिछड़ा वर्ग के लिए 3, महिला वर्ग के लिए 1 व अनारक्षित श्रेणी में 3 पदों को रखा गया था।
निर्देशों का होगा पालन
पंचायत चुनाव को लेकर कोर्ट ने जो आदेश जारी किया है, उसे लेकर शासन से जो भी स्पष्ट निर्देश आता है, उसका पूरी तरह पालन कराया जाएगा। चुनाव को बेहतर ढंग से संपन्न कराने की सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
-डॉ. पंकज कुमार वर्मा, एडीएम