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Ambedkar Nagar News: तीन साल में सात करोड़ खर्च, नहीं रुका कटान
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राजेसुल्तानपुर क्षेत्र में कटान रोकने को लगाए गए जीओ बैग। संवाद
राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी की तेज धारा ने कम्हरिया और मांझा कम्हरिया के किसानों की जमीन को धीरे-धरे निगल लिया। पिछले तीन सालों में सरकारी की ओर से लगभग सात करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन नदी का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि हर साल खेत, मकान नदी में समा जाते हैं।
आलापुर तहसील क्षेत्र के कम्हरिया व मांझा कम्हरिया के किसानों को कटान से निजात नहीं मिल सकी। तीन वर्षों से लगातार कटान रोकने के लिए किए गए कार्य नदी के जलस्तर बढ़ाने के साथ ही गायब हो जाते हैं। ग्रामीण अब प्रशासन से बार-बार मांग कर रहे हैं कि कटान रोकने के लिए मजबूत बांध बनाएं और बोल्डर लगाएं, तभी जाकर ही उनकी जमीन सुरक्षित रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी कटान नहीं रुका तो हमारी बस्तियां पानी में समा जाएंगी, और हम बेघर हो जाएंगे।
सरकार ने 2022-23 में चार करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर मांझा कम्हरिया से कम्हरिया तक नदी की धारा बदलने और जियो ट्यूब लगाने का काम कराया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। 2024 में भी लाखों रुपये खर्च कर बैंबू स्टड और स्टड निर्माण के प्रयास हुए, लेकिन सब अधूरे रहे।
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वर्ष 2024 में भी कम्हरिया व मांझा कम्हरिया के बीच लगभग 10 से 15 लाख रुपये खर्च कर बैंबू स्टड बनवाए जाने का कार्य बाढ़ कार्य खंड अयोध्या ने काम कराया था, लेकिन वह भी सफल नहीं रहा। इस वर्ष लगभग दो करोड़ 10 लाख रुपये सेस्टड निर्माण का कार्य कराया गया था। साथ-साथ बाढ़ कार्य खंड अयोध्या द्वारा ही वर्तमान में बैंबू स्टड का कार्य कम्हरिया से लेकर मांझा कम्हरिया तक कटान के स्थान पर कराया जा रहा है, फिर भी लोगों को कटान से जूझना पड़ रहा है।
कई बस्तियों पर मंडरा रहा खतरा
वर्ष 1998 में सरयू नदी में आई बाढ़ के दौरान मांझा कम्हरिया के रग्घू का पूरा, विषई का पूरा व कन्हई का पूरा के लगभग 200 लोगों के मकान सरयू नदी में समाहित हो गए थे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सात किमी दूर खरुवईया नई बस्ती में बसाया था। यह इतनी दूर रहने तो आ गए लेकिन मतदाता अभी वहीं के हैं। नदी की कटान की रफ्तार जो तीन वर्षों से चल रही है, उससे मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा व पटपरवा निषाद बस्ती के लोगों का अस्तित्व एक बार फिर खतरा में आ सकता है।
कराया जा रहा काम
बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के जेई विकास श्रीवास्तव ने बताया कि एक परियोजना के तहत कम्हरिया घाट पर 2 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से स्टड निर्माण का कार्य कराया गया है। इसके अलावा प्रतिवर्ष मरम्मत के कार्य पर बैंबू स्टड व अन्य कार्य पर पैसा खर्च होता है, जहां आवश्यक होगा काम कराया जाएगा।
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आलापुर तहसील क्षेत्र के कम्हरिया व मांझा कम्हरिया के किसानों को कटान से निजात नहीं मिल सकी। तीन वर्षों से लगातार कटान रोकने के लिए किए गए कार्य नदी के जलस्तर बढ़ाने के साथ ही गायब हो जाते हैं। ग्रामीण अब प्रशासन से बार-बार मांग कर रहे हैं कि कटान रोकने के लिए मजबूत बांध बनाएं और बोल्डर लगाएं, तभी जाकर ही उनकी जमीन सुरक्षित रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी कटान नहीं रुका तो हमारी बस्तियां पानी में समा जाएंगी, और हम बेघर हो जाएंगे।
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सरकार ने 2022-23 में चार करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर मांझा कम्हरिया से कम्हरिया तक नदी की धारा बदलने और जियो ट्यूब लगाने का काम कराया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। 2024 में भी लाखों रुपये खर्च कर बैंबू स्टड और स्टड निर्माण के प्रयास हुए, लेकिन सब अधूरे रहे।
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वर्ष 2024 में भी कम्हरिया व मांझा कम्हरिया के बीच लगभग 10 से 15 लाख रुपये खर्च कर बैंबू स्टड बनवाए जाने का कार्य बाढ़ कार्य खंड अयोध्या ने काम कराया था, लेकिन वह भी सफल नहीं रहा। इस वर्ष लगभग दो करोड़ 10 लाख रुपये सेस्टड निर्माण का कार्य कराया गया था। साथ-साथ बाढ़ कार्य खंड अयोध्या द्वारा ही वर्तमान में बैंबू स्टड का कार्य कम्हरिया से लेकर मांझा कम्हरिया तक कटान के स्थान पर कराया जा रहा है, फिर भी लोगों को कटान से जूझना पड़ रहा है।
कई बस्तियों पर मंडरा रहा खतरा
वर्ष 1998 में सरयू नदी में आई बाढ़ के दौरान मांझा कम्हरिया के रग्घू का पूरा, विषई का पूरा व कन्हई का पूरा के लगभग 200 लोगों के मकान सरयू नदी में समाहित हो गए थे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सात किमी दूर खरुवईया नई बस्ती में बसाया था। यह इतनी दूर रहने तो आ गए लेकिन मतदाता अभी वहीं के हैं। नदी की कटान की रफ्तार जो तीन वर्षों से चल रही है, उससे मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा व पटपरवा निषाद बस्ती के लोगों का अस्तित्व एक बार फिर खतरा में आ सकता है।
कराया जा रहा काम
बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के जेई विकास श्रीवास्तव ने बताया कि एक परियोजना के तहत कम्हरिया घाट पर 2 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से स्टड निर्माण का कार्य कराया गया है। इसके अलावा प्रतिवर्ष मरम्मत के कार्य पर बैंबू स्टड व अन्य कार्य पर पैसा खर्च होता है, जहां आवश्यक होगा काम कराया जाएगा।