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पीएम सम्मान निधि की शुरूआती जांच में उजागर हुई धांधली
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जलालपुर। पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर जलालपुर तहसील में प्रशासन की शुरूआती जांच में ही बड़ी धोखाधड़ी पकड़ में आई है। अमर उजाला ने निधि में धोखाधड़ी का मामला बीते दिनों उजागर किया था। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने टीम गठित कर मामले की जांच शुरू कराई। गुरुवार को उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने मुरवाह ग्राम पंचायत में प्रारंभिक जांच की तो फर्जी ढंग से दूसरे के नाम पर निधि का लाभ लेने का मामला उजागर हो गया। ग्रामीणों का बयान टीम ने दर्ज किया। टीम के अनुसार, इस धोखाधड़ी में एक पंचायत प्रतिनिधि, बैंक व डाकघर कर्मी के अलावा ब्लॉक कर्मी की भी संलिप्तता सामने आई है। शुक्रवार को भी टीम जांच करेगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई होगी।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ पात्रों को उपलब्ध कराने के नाम पर व्यापक मनमानी बीते दिनों सामने आई। दरअसल मुरवाह व कन्नूपुर ग्राम पंचायत के तमाम ग्रामीणों के नाम से योजना के तहत धनराशि निकाल ली गई। सिर्फ अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। पहले मुरवाह फिर कन्नूपुर ग्राम पंचायत के ग्रामीणों के साथ हुई धोखाधड़ी का दर्द अमर उजाला ने सामने रखा तो प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने मामले में त्वरित जांच के निर्देश दिए। इसके बाद उपकृषि निदेशक आरडी बागला ने उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी राजमंगल चौधरी को जांच सौंप दी।
गुरुवार को जांच अधिकारी मुरवाह गांव पहुंचे तो वहां पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर हुई धोखाधड़ी सामने आ गई। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 101 ग्रामीणों के नाम पर आवेदन हुआ था, जिन्हें पात्र बताया गया। इनमें से 92 व्यक्तियों को योजना का लाभ भी मिला। जांच अधिकारी ने इनमें से 80 ग्रामीणों से बातकर उनका बयान दर्ज किया। ग्रामीणों ने बताया कि भूमिहीनों, नाबालिगों व छात्रों के नाम पर योजना के तहत खाता खोलकर धन निकाल लिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत नाम तो उनका इस्तेमाल किया गया, लेकिन उनका बैंक खाता फर्जी ढंग से खोला गया। इसके चलते ही योजना के तहत आने वाली धनराशि की निकासी किसी अन्य ने कर ली।
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पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर हुई धांधली में कई जिम्मेदारों पर गाज गिर सकती है। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही बैंक व डाकघर कर्मी तथा ब्लाक कर्मी भी शामिल हैं। विस्तृत जांच में इनके नाम का खुलासा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार शुरूआती जांच में पाया गया कि बिना बैंक व डाकघर कर्मियों की संलिप्तता के दूसरे के नाम से खुले खाते से कोई और धन निकासी नहीं कर सकता। इसी तरह योजना के तहत पात्रों के सत्यापन आदि में गड़बड़ी करने में पंचायत प्रतिनिधि व ब्लाक कर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है। निश्चित तौर पर ऐसे में कई जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होने की संभावना उत्पन्न हो गई है।
शुरुआती जांच में पाया गया कि जिन ग्रामीणों के नाम से खाते खोले गए हैं, उनमें ज्यादातर में डाकघर का प्रयोग किया गया है। डाकघर में इंडियन पोस्टल पेमेंट बैंक के माध्यम से बचत खाते खोले जाते हैं। गांव-गांव तैनात होने वाले पोस्टमैन भी खाता खोलने का काम करते हैं। बैंक के सापेक्ष खाता खोलने की सरल प्रक्रिया होने के चलते धोखाधड़ी करने वालों ने अलग-अलग ग्रामीणों के नाम से डाकघर में खाता खुलवाने को प्राथमिकता दी।
शुरुआती जांच में गड़बड़ी मिली है। शुक्रवार को भी जांच जारी रहेगी। इसके बाद जो रिपोर्ट आएगी, उसके हिसाब से जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
- आरडी बागला, उपकृषि निदेशक
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ पात्रों को उपलब्ध कराने के नाम पर व्यापक मनमानी बीते दिनों सामने आई। दरअसल मुरवाह व कन्नूपुर ग्राम पंचायत के तमाम ग्रामीणों के नाम से योजना के तहत धनराशि निकाल ली गई। सिर्फ अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। पहले मुरवाह फिर कन्नूपुर ग्राम पंचायत के ग्रामीणों के साथ हुई धोखाधड़ी का दर्द अमर उजाला ने सामने रखा तो प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने मामले में त्वरित जांच के निर्देश दिए। इसके बाद उपकृषि निदेशक आरडी बागला ने उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी राजमंगल चौधरी को जांच सौंप दी।
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गुरुवार को जांच अधिकारी मुरवाह गांव पहुंचे तो वहां पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर हुई धोखाधड़ी सामने आ गई। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 101 ग्रामीणों के नाम पर आवेदन हुआ था, जिन्हें पात्र बताया गया। इनमें से 92 व्यक्तियों को योजना का लाभ भी मिला। जांच अधिकारी ने इनमें से 80 ग्रामीणों से बातकर उनका बयान दर्ज किया। ग्रामीणों ने बताया कि भूमिहीनों, नाबालिगों व छात्रों के नाम पर योजना के तहत खाता खोलकर धन निकाल लिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत नाम तो उनका इस्तेमाल किया गया, लेकिन उनका बैंक खाता फर्जी ढंग से खोला गया। इसके चलते ही योजना के तहत आने वाली धनराशि की निकासी किसी अन्य ने कर ली।
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पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर हुई धांधली में कई जिम्मेदारों पर गाज गिर सकती है। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही बैंक व डाकघर कर्मी तथा ब्लाक कर्मी भी शामिल हैं। विस्तृत जांच में इनके नाम का खुलासा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार शुरूआती जांच में पाया गया कि बिना बैंक व डाकघर कर्मियों की संलिप्तता के दूसरे के नाम से खुले खाते से कोई और धन निकासी नहीं कर सकता। इसी तरह योजना के तहत पात्रों के सत्यापन आदि में गड़बड़ी करने में पंचायत प्रतिनिधि व ब्लाक कर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है। निश्चित तौर पर ऐसे में कई जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होने की संभावना उत्पन्न हो गई है।
शुरुआती जांच में पाया गया कि जिन ग्रामीणों के नाम से खाते खोले गए हैं, उनमें ज्यादातर में डाकघर का प्रयोग किया गया है। डाकघर में इंडियन पोस्टल पेमेंट बैंक के माध्यम से बचत खाते खोले जाते हैं। गांव-गांव तैनात होने वाले पोस्टमैन भी खाता खोलने का काम करते हैं। बैंक के सापेक्ष खाता खोलने की सरल प्रक्रिया होने के चलते धोखाधड़ी करने वालों ने अलग-अलग ग्रामीणों के नाम से डाकघर में खाता खुलवाने को प्राथमिकता दी।
शुरुआती जांच में गड़बड़ी मिली है। शुक्रवार को भी जांच जारी रहेगी। इसके बाद जो रिपोर्ट आएगी, उसके हिसाब से जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
- आरडी बागला, उपकृषि निदेशक