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Ambedkar Nagar News: मरीजों को न्यूरो व कार्डियो सर्जन का इंतजार
Sun, 27 Oct 2024 11:09 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 27 Oct 2024 11:09 PM IST
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अस्पताल परिसर में बनकर तैयार ट्रॉमा विंग।
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज को न्यूरो और कार्डियो सर्जन की तैनाती का इंतजार है। ऐसा न होने के चलते अक्सर गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। उधर, जिला अस्पताल में बनकर तैयार छह बेड के ट्रॉमा विंग का संचालन भी संसाधन के अभाव में नहीं शुरू हो सका।
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा भले की बढ़-चढ़कर हो, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं परे है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हादसों में गंभीर रूप से घायलों का बेहतर इलाज करने की सुविधा जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। दरअसल राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर व जिला अस्पताल में अब तक न तो न्यूरो और न ही कार्डियो सर्जन की तैनाती हो सकी है।
लगभग डेढ़ वर्ष पहले जिला अस्पताल मेंं बनकर तैयार ट्रॉमा विंग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोहपूर्वक लोकार्पण कर दिया, लेकिन स्टाफ की तैनाती के साथ ही आवश्यक संसाधन की उपलब्धता नहीं हो पाई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अस्थायी तौर पर बना ट्रॉमा सेंटर भी बंद चल रहा है।
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लखनऊ रेफर करने की मजबूरी
गंभीर रूप से घायलों का बेहतर ढंग से इलाज की व्यवस्था न होने के चलते राजकीय मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में सिर्फ प्राथमिक उपचार कर घायल को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में लगभग दो सौ किमी की दूरी तय करने के दौरान कई बार गंभीर घायल की मौत हो जाती है। सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि यदि जिले में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो मार्ग हादसों में होने वाली मौत की दर को कम किया जा सकता है। जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से बनकर तैयार ट्रॉमा विंग का संचालन शुरू कर देना चाहिए।
नेशनल हाईवे पर होते हैं हादसे
जिले से होकर तीन नेशनल हाईवे एनएच 232, एनएच 233, 135ए व पूर्वांचल एक्सप्रेस गुजरता है। इन हाईवे पर लगभग प्रतिदिन ही मार्ग हादसे होते रहते हैं। इसके बाद भी हादसों पर अंकुश लगाने व हादसे में घायलों के बेहतर इलाज को लेकर सड़क सुरक्षा समिति द्वारा कोई प्लान तैयार नहीं किया जा रहा। वैसे तो बैठक अक्सर होती है, लेकिन वह सभी एक औपचारिकता भर ही रहती है। यदि इसमें कोई ठोस निर्णय लिया जाए तो इसका काफी हद तक लाभ लोगों को मिल सकेगा।
निदेशालय को भेजा गया पत्र
न्यूरो व कार्डियो सर्जन की तैनाती के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। जिला अस्पताल में ट्रॉमा विंग बनकर तैयार है। संसाधन की उपलब्धता होते ही संचालन शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा भले की बढ़-चढ़कर हो, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं परे है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हादसों में गंभीर रूप से घायलों का बेहतर इलाज करने की सुविधा जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। दरअसल राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर व जिला अस्पताल में अब तक न तो न्यूरो और न ही कार्डियो सर्जन की तैनाती हो सकी है।
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लगभग डेढ़ वर्ष पहले जिला अस्पताल मेंं बनकर तैयार ट्रॉमा विंग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोहपूर्वक लोकार्पण कर दिया, लेकिन स्टाफ की तैनाती के साथ ही आवश्यक संसाधन की उपलब्धता नहीं हो पाई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अस्थायी तौर पर बना ट्रॉमा सेंटर भी बंद चल रहा है।
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लखनऊ रेफर करने की मजबूरी
गंभीर रूप से घायलों का बेहतर ढंग से इलाज की व्यवस्था न होने के चलते राजकीय मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में सिर्फ प्राथमिक उपचार कर घायल को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में लगभग दो सौ किमी की दूरी तय करने के दौरान कई बार गंभीर घायल की मौत हो जाती है। सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि यदि जिले में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो मार्ग हादसों में होने वाली मौत की दर को कम किया जा सकता है। जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से बनकर तैयार ट्रॉमा विंग का संचालन शुरू कर देना चाहिए।
नेशनल हाईवे पर होते हैं हादसे
जिले से होकर तीन नेशनल हाईवे एनएच 232, एनएच 233, 135ए व पूर्वांचल एक्सप्रेस गुजरता है। इन हाईवे पर लगभग प्रतिदिन ही मार्ग हादसे होते रहते हैं। इसके बाद भी हादसों पर अंकुश लगाने व हादसे में घायलों के बेहतर इलाज को लेकर सड़क सुरक्षा समिति द्वारा कोई प्लान तैयार नहीं किया जा रहा। वैसे तो बैठक अक्सर होती है, लेकिन वह सभी एक औपचारिकता भर ही रहती है। यदि इसमें कोई ठोस निर्णय लिया जाए तो इसका काफी हद तक लाभ लोगों को मिल सकेगा।
निदेशालय को भेजा गया पत्र
न्यूरो व कार्डियो सर्जन की तैनाती के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। जिला अस्पताल में ट्रॉमा विंग बनकर तैयार है। संसाधन की उपलब्धता होते ही संचालन शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. राजकुमार, सीएमओ