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हादसे के लिए एनटीपीसी प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:00 PM IST
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इस दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों व मजदूरों का बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान एनटीपीसी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मामले में एनटीपीसी अधिकारियों के विरुद्घ केस दर्ज होना लगभग तय माना जा रहा है।
इसके अलावा घटना के एक दिन बाद एनटीपीसी की तकनीकी टीम ने भी प्लांट पहुंचकर अपनी जांच प्रारंभ कर दी है। उधर घटना का शिकार हुए मजदूर के शव का अंतिम संस्कार सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सहजौरा घाट पर कर दिया गया।
बताते चलें कि एक दिन पूर्व एनटीपीसी टांडा प्लांट में टर्बाइन के ऊपर बनी सीमेंटेड छत ढह गई थी। इससे उसके मलबे की चपेट में आने से नीचे कार्य कर रहे मजदूर इब्राहिमपुर थाना अन्तर्गत हेलालपुर गांव निवासी प्रदीप वर्मा पुत्र त्रिभुवन वर्मा की मौत हो गई थी। पहले घटना को एनटीपीसी प्रशासन ने उजागर ही नहीं किया।
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लगभग तीन घंटे बाद इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई। इससे पहले सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने एनटीपीसी कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। जब तक मलबा हटाया जाता, तब तक प्रदीप की मौत हो चुकी थी। घटना को दबाने एवं घटनास्थल पर ग्रामीणों के जाने पर रोक लगाने से नाराज ग्रामीणों ने जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
इस पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझा बुझाकर मामला शांत कराया था। पूरे घटनाक्रम में प्रथम दृष्टया ही एनटीपीसी प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही थी। इस पर देर सायं डीएम ने एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन कर जांच का निर्देश दिया था।
सोमवार को टीम ने एनटीपीसी पहुंचकर अधिकारियोत्नं, स्त्रत्त्कर्मचारियों व मजदूरों का बयान दर्ज किया। साथ ही घटनास्थल का भी जायजा लिया। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान एनटीपीसी प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। जांच में पता चला है कि प्रात: नौ बजे करीब ही छत में बीम के निकट दरार आ गई थी, जिससे पानी तेजी गिरकर टर्बाइन तक पहुंचने लगा था।
एनटीपीसी प्रशासन का पूरा जोर इसके बावजूद इस पर था कि किसी तरह पानी को रोककर टर्बाइन का काम फिर से शुरू करा दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक जांच में यह सामने आया है कि यदि जिम्मेदारी का परिचय देते हुए खतरे को भांप सभी मजदूरों को वहां से हटा दिया गया होता, तो इस घटना से बचा जा सकता था।
इस बीच सोमवार को ही लखनऊ से तकनीकी टीम ने भी एनटीपीसी पहुंचकर जांच कार्य प्रारंभ कर दिया। उधर सोमवार को घटना का शिकार हुए प्रदीप वर्मा के शव का अंतिम संस्कार सहजौरा घाट पर कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सोमवार देर सायं डीएम विवेक ने बताया कि रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उसके मिलने पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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इसके अलावा घटना के एक दिन बाद एनटीपीसी की तकनीकी टीम ने भी प्लांट पहुंचकर अपनी जांच प्रारंभ कर दी है। उधर घटना का शिकार हुए मजदूर के शव का अंतिम संस्कार सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सहजौरा घाट पर कर दिया गया।
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बताते चलें कि एक दिन पूर्व एनटीपीसी टांडा प्लांट में टर्बाइन के ऊपर बनी सीमेंटेड छत ढह गई थी। इससे उसके मलबे की चपेट में आने से नीचे कार्य कर रहे मजदूर इब्राहिमपुर थाना अन्तर्गत हेलालपुर गांव निवासी प्रदीप वर्मा पुत्र त्रिभुवन वर्मा की मौत हो गई थी। पहले घटना को एनटीपीसी प्रशासन ने उजागर ही नहीं किया।
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लगभग तीन घंटे बाद इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई। इससे पहले सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने एनटीपीसी कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। जब तक मलबा हटाया जाता, तब तक प्रदीप की मौत हो चुकी थी। घटना को दबाने एवं घटनास्थल पर ग्रामीणों के जाने पर रोक लगाने से नाराज ग्रामीणों ने जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
इस पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझा बुझाकर मामला शांत कराया था। पूरे घटनाक्रम में प्रथम दृष्टया ही एनटीपीसी प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही थी। इस पर देर सायं डीएम ने एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन कर जांच का निर्देश दिया था।
सोमवार को टीम ने एनटीपीसी पहुंचकर अधिकारियोत्नं, स्त्रत्त्कर्मचारियों व मजदूरों का बयान दर्ज किया। साथ ही घटनास्थल का भी जायजा लिया। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान एनटीपीसी प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। जांच में पता चला है कि प्रात: नौ बजे करीब ही छत में बीम के निकट दरार आ गई थी, जिससे पानी तेजी गिरकर टर्बाइन तक पहुंचने लगा था।
एनटीपीसी प्रशासन का पूरा जोर इसके बावजूद इस पर था कि किसी तरह पानी को रोककर टर्बाइन का काम फिर से शुरू करा दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक जांच में यह सामने आया है कि यदि जिम्मेदारी का परिचय देते हुए खतरे को भांप सभी मजदूरों को वहां से हटा दिया गया होता, तो इस घटना से बचा जा सकता था।
इस बीच सोमवार को ही लखनऊ से तकनीकी टीम ने भी एनटीपीसी पहुंचकर जांच कार्य प्रारंभ कर दिया। उधर सोमवार को घटना का शिकार हुए प्रदीप वर्मा के शव का अंतिम संस्कार सहजौरा घाट पर कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सोमवार देर सायं डीएम विवेक ने बताया कि रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उसके मिलने पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।