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पुरानी पुस्तकों के भरोसे दो लाख से अधिक नौनिहाल

Sun, 17 Apr 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Sun, 17 Apr 2016 11:07 PM IST
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more than two lack Students are forced to read old books
बेसिक स्कूल - फोटो : demo pic

जिले के एक हजार 882 परिषदीय विद्यालयों के दो लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। शासन-प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि एक तरफ जहां कुछ छात्र-छात्राओं को पुरानी पुस्तकों से ही पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है, वहीं ज्यादातर छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जिनके पास एक भी पुस्तक नहीं हैं।

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ऐसे में सर्वशिक्षा अभियान का कितना लाभ परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। परिषदीय विद्यालयों में अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं का प्रवेश हो, इसके लिए शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
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न सिर्फ परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को मध्याह्न भोजन व निशुल्क ड्रेस उपलब्ध कराई जा रही है बल्कि उन्हें निशुल्क पुस्तकें भी दी जा रही हैं। यह अलग बात है कि इन योजनाओं का समुचित लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है। जिले में एक हजार 352 प्राथमिक विद्यालय व 530 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
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इन विद्यालयों में दो लाख से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनको योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने को लेकर शासन-प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नया शिक्षासत्र प्रारंभ हुए एक पखवारे से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक छात्र-छात्राओं को पुस्तकें तक नहीं दी जा सकी हैं।

 नतीजा यह है कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं को पुरानी पुस्तकों के साथ ही पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, कुछ छात्र ऐसे भी हैं, जिनके पास कोई भी पुस्तक नहीं हैं।

 

ऐसे में उन्हें पठन-पाठन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अकबरपुर के अभिभावक नंदलाल व शोभाराम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्कूल चलो रैली निकालने से छात्र-छात्राओं का भला होने वाला नहीं हैं।

 

उन्हें आवश्यक सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कहा कि उनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें नई या पुरानी कोई भी पुस्तक नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में उन्हें बिना पुस्तक के ही विद्यालय जाना पड़ रहा है। 

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