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उपेक्षा के चलते जिले की ऐतिहासिक इमारतें हो रहीं जर्जर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Sun, 17 Apr 2016 11:00 PM IST
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उपेक्षा की शिकार लोरपुर रियासत की इमारत।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित तमाम ऐतिहासिक इमारतें बदहाली का शिकार हैं। इनके रखरखाव की सुध न तो पुरातत्व विभाग को है और न ही प्रशासन को। जिला मुख्यालय से सटे लोरपुर में स्थित ऐतिहासिक अठखंभा लंबे समय से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। कुछ ऐसा ही हाल भीटी व हंसवर रियासत का भी है।
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18 अप्रैल सोमवार को वर्ल्ड हेरिटेज दिवस मनाया जा रहा है। इसे लेकर जिले में किसी प्रकार की हलचल नजर नहीं आ रही है। न तो प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार का आयोजन किया जा रहा है और न ही स्वयंसेवी संस्थाओं की तरफ से। जिले में तमाम ऐतिहासिक इमारतें हैं।
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इनमें से ज्यादातर ऐसी हैं जो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं तो कुछ ऐसी भी हैं जो खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। ऐसी इमारतों का अस्तित्व खतरे में हैं लेकिन इनको बचाने के लिए किसी प्रकार का ठोस कदम न तो प्रशासन और न ही शासन की तरफ से उठाया जा रहा है।
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जिले की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है अकबरपुर नगर से सटे लोरपुर स्थित अठखंभा। राजभरों के राजा सुजावल द्वारा बनवाई गई इस इमारत की ऐतिहासिकता लगातार समाप्त हो रही है। बताया जाता है कि यहां पंचायत के माध्यम से राजभरों की समस्याओं का निस्तारण किया जाता था।
देखरेख के अभाव में एक-एक कर खंभे गिरते गए। मौजूदा समय में पूरी इमारत खंडहर में तब्दील हो चुकी है। इसके जीर्णोद्धार की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन इस महत्वपूर्ण धरोहर के अस्तित्व को बचाने को कोई ठोस कदम अब तक शासन-प्रशासन की तरफ से नहीं उठाया जा सका है।
कुछ ऐसा ही हाल भीटी रियासत भवन का है। देखरेख के अभाव में यह महल मौजूदा समय में बुरी तरह जर्जर हो चुका है। महल की देखरेख कर रहे राजा अजय प्रताप सिंह के रिश्तेदार उदयप्रताप सिंह ने बताया कि इस ऐतिहासिक इमारत को बचाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
इसी प्रकार हंसवर रियासत स्थित महल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। लोरपुर रियासत के महल के अस्तित्व को अवश्य अब तक बाकी रखा गया है। महल व इमामबारगाह की देखभाल करने वाले जुहेर हुसैन व अदनान हुसैन ने बताया कि वे अपने पुरखों की धरोहर को बचाए रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। कहा कि शासन-प्रशासन की तरफ से इस तरफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।