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Ambedkar Nagar News: हैंडबाल में हिमांशु 12 प्रदेशों में जीत चुके हैं खिताब
Tue, 25 Mar 2025 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 25 Mar 2025 12:56 AM IST
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अंबेडकरनगर। मन में जब कुछ करने की चाहत होती है तो कदम अपने आप बढ़ जाते हैं। विषम समय में अगर कोई अडिग रहा तो सफलता की सीढ़ी को वह आसानी से छू सकता है। ऐसी ही कुछ कहानी है अकबरपुर के रहने वाले हिमांशु की।
शहर के सुडारी अफजलपुर गांव निवासी हिमांशु को खेल की दुनिया में अपनी शोहरत को बढ़ानी थी, लेकिन इसी दौरान जिंदगी में अंधेरा छा गया। छह वर्ष से बीमार चल रहे पिता ने वर्ष 2019 में उनका साथ छोड़ दिया। इस सदमे से उबरकर मां और परिवार के अन्य भाइयों के सहारे हिमांशु ने अपनी खेल प्रतिभा को निखारना शुरू किया। हैंडबाल में अपना कॅरिअर बनाने की ठान ली।
शहर के ही एक डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई करने वाले खिलाड़ी ने प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में अपने खेल का डंका बजाया है। हिमांशु ने अब तक 12 प्रदेश की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है, जिसमें अधिकांश में वह जीत कर ही लौटे हैं। वहीं कई बार स्कूली नेशनल में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। हिमांशु की मां चंद्रकला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। पूरे परिवार को इनकी मां ही संभाल रही हैं।
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शहर के एकलव्य स्पोर्ट स्टेडियम में कोच शिल्पी गौतम के नेतृत्व में दो वर्ष से तैयारी कर रहे हिमांशु ने अपने खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हिमांशु ने बताया कि एक समय ऐसा लगा कि वह अब खेल को नहीं खेल पाएंगे, लेकिन मां और परिवार का साथ मिलने के बाद आग वे सफलता की ओर अग्रसर हैं।
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शहर के सुडारी अफजलपुर गांव निवासी हिमांशु को खेल की दुनिया में अपनी शोहरत को बढ़ानी थी, लेकिन इसी दौरान जिंदगी में अंधेरा छा गया। छह वर्ष से बीमार चल रहे पिता ने वर्ष 2019 में उनका साथ छोड़ दिया। इस सदमे से उबरकर मां और परिवार के अन्य भाइयों के सहारे हिमांशु ने अपनी खेल प्रतिभा को निखारना शुरू किया। हैंडबाल में अपना कॅरिअर बनाने की ठान ली।
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शहर के ही एक डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई करने वाले खिलाड़ी ने प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में अपने खेल का डंका बजाया है। हिमांशु ने अब तक 12 प्रदेश की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है, जिसमें अधिकांश में वह जीत कर ही लौटे हैं। वहीं कई बार स्कूली नेशनल में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। हिमांशु की मां चंद्रकला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। पूरे परिवार को इनकी मां ही संभाल रही हैं।
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शहर के एकलव्य स्पोर्ट स्टेडियम में कोच शिल्पी गौतम के नेतृत्व में दो वर्ष से तैयारी कर रहे हिमांशु ने अपने खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हिमांशु ने बताया कि एक समय ऐसा लगा कि वह अब खेल को नहीं खेल पाएंगे, लेकिन मां और परिवार का साथ मिलने के बाद आग वे सफलता की ओर अग्रसर हैं।