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Ambedkar Nagar News: करोड़ों खर्च होने के बाद भी नहीं दूर हो रहा बिजली का संकट
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अंबेडकरनगर। जिले में रिवैंप योजना के तहत 111 करोड़ जबकि बिजनेस प्लान के तहत 20 करोड़ रुपये की लागत से बिजली समस्या का दूर करने के काम लगभग अंतिम दौर में हैं लेकिन बिजली आपूर्ति का हाल बेहाल है। जगह-जगह जर्जर तारों का मकड़जाल बिजली आपूर्ति में बाधक बन रहा है जो वहीं हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने को लेकर रिवैंप व बिजनेस प्लान के तहत बड़े पैमाने पर कार्य किए जाने का दावा किया जा रहा है। रिवैंप योजना के तहत 111 करोड़ रुपये जबकि बिजनेस प्लान के तहत 20 करोड़ रुपये की लागत से जिले में बिजली आपूर्ति बेहतर किए जाने को लेकर काम चल रहे हैं। यह कार्य कार्यदायी संस्था नार्गाजुन कांस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है।
दावा है कि संबंधित योजनाओं के तहत जर्जर हो चुके खंभों को बदला जा रहा है और तारों व अन्य उपकरणों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था की मानें तो कार्य अंतिम दौर में है। यानी उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली उपलब्ध कराने के लिए होने वाले कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, कुछ ही कार्य शेष हैं।
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इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी जिले में कई क्षेत्रों में बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। लोहे के खंभे ऐसे हैं जो अत्यंत जर्जर हैं हैं और जंग से खराब हो गए हैं। यदि तेज हवा चले तो ऐसे खंभे कभी गिर सकते हैं। इतना ही नहीं, कई क्षेत्रों में तारों का मकड़ जाल ऐसा फैला है जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। इसी का नतीजा है कि मौजूदा समय में जब तेज गर्मी पड़ रही है तो शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसे जर्जर हो चुके तार जवाब दे रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। (संवाद)
नहीं सुधर रहे हालात
अकबरपुर नगर के बस स्टेशन क्षेत्र स्थित बीएनकेबी पीजी कॉलेज मार्ग पर एक खंभा नीचे से पूरी तरह से खराब हो चुका है। नगर के ही गांधी आश्रम के निकट भी एक खंभा जंग लगने से गिरने के कगार पर पहुंच गया है। इसी प्रकार से नगर में ही एक दर्जन खंभे ऐसे हैं जो कभी भी टूटकर गिर सकते हैं। सीहमई मोलनापुर गांव में बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। तेज हवा चलने पर बांस बल्ली धराशायी हो जाती है जिससे संबंधित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। अकबरपुर नगर के पार्क रोड, शहजहांपुर, पंडाटोला समेत कई अन्य क्षेत्रों में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। ऐसा ही हाल जलालपुर, भीटी, महरुआ, आलापुर, राजेसुल्तानपुर, सम्मनपुर, सिकंदरपुर, टांडा, हंसवर, किछौछा समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी कुछ इसी प्रकार की लापरवाही व्याप्त है।
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उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने को लेकर रिवैंप व बिजनेस प्लान के तहत बड़े पैमाने पर कार्य किए जाने का दावा किया जा रहा है। रिवैंप योजना के तहत 111 करोड़ रुपये जबकि बिजनेस प्लान के तहत 20 करोड़ रुपये की लागत से जिले में बिजली आपूर्ति बेहतर किए जाने को लेकर काम चल रहे हैं। यह कार्य कार्यदायी संस्था नार्गाजुन कांस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है।
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दावा है कि संबंधित योजनाओं के तहत जर्जर हो चुके खंभों को बदला जा रहा है और तारों व अन्य उपकरणों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था की मानें तो कार्य अंतिम दौर में है। यानी उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली उपलब्ध कराने के लिए होने वाले कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, कुछ ही कार्य शेष हैं।
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इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी जिले में कई क्षेत्रों में बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। लोहे के खंभे ऐसे हैं जो अत्यंत जर्जर हैं हैं और जंग से खराब हो गए हैं। यदि तेज हवा चले तो ऐसे खंभे कभी गिर सकते हैं। इतना ही नहीं, कई क्षेत्रों में तारों का मकड़ जाल ऐसा फैला है जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। इसी का नतीजा है कि मौजूदा समय में जब तेज गर्मी पड़ रही है तो शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसे जर्जर हो चुके तार जवाब दे रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। (संवाद)
नहीं सुधर रहे हालात
अकबरपुर नगर के बस स्टेशन क्षेत्र स्थित बीएनकेबी पीजी कॉलेज मार्ग पर एक खंभा नीचे से पूरी तरह से खराब हो चुका है। नगर के ही गांधी आश्रम के निकट भी एक खंभा जंग लगने से गिरने के कगार पर पहुंच गया है। इसी प्रकार से नगर में ही एक दर्जन खंभे ऐसे हैं जो कभी भी टूटकर गिर सकते हैं। सीहमई मोलनापुर गांव में बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। तेज हवा चलने पर बांस बल्ली धराशायी हो जाती है जिससे संबंधित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। अकबरपुर नगर के पार्क रोड, शहजहांपुर, पंडाटोला समेत कई अन्य क्षेत्रों में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। ऐसा ही हाल जलालपुर, भीटी, महरुआ, आलापुर, राजेसुल्तानपुर, सम्मनपुर, सिकंदरपुर, टांडा, हंसवर, किछौछा समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी कुछ इसी प्रकार की लापरवाही व्याप्त है।