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बूंदाबांदी ने बढाई किसानों की चिंता
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2015 09:50 PM IST
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किसानों को आशंका है कि यदि ओला गिरता है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव धान की फसल पर पड़ेगा। उधर तापमान गिरने से लोगों को गर्म कपड़े पहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अचानक मौसम के बदले मिजाज ने आम लोगों के सामने कई प्रकार की समस्याएं खड़ी कर दीं। बुधवार देर शाम से गुरुवार सुबह तक रुक रुककर बूंदाबांदी होती रही। साथ ही सर्द हवाएं भी चलने लगीं। नतीजा यह हुआ कि बुधवार शाम से ही तापमान में गिरावट होने लगी। यह सिलसिला गुरुवार को भी चला।
पूरे दिन आसमान पर काले बादल छाए रहने एवं सर्द हवाओं के चलने से गिरे तापमान ने आम जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया। अचानक बढ़ी ठंड ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने के लिए मजबूर कर दिया। खराब मौसम का प्रभाव परिषदीय विद्यालयों सहित निजी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति पर भी पड़ा। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या काफी कम रही।
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उधर आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे काले बादलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ बारिश कम होने से लगभग 40 प्रतिशत धान की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। यदि ओले गिरते हैं, तो इसका फसल पर प्रभावित हो जाएगी।
अकबरपुर के किसान रामजियावन व शमशेर सिंह ने बताया कि यदि तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो इससे धान की बालियां काली पड़ जाएंगी, जिससे फसल बर्बाद हो सकती है। जलालपुर के भगवानदीन व राघवेंद्र ने कहा कि अब तो ईश्वर का ही सहारा है। मौसम की मार ने उनकी कमर तोड़ दी है।
एक तो पहले ही काफी फसल बर्बाद हो चुकी है, उस पर यदि ओले गिरते हैं, तो इससे बची खुची फसल भी नष्ट हो जाएगी। भीटी के रामबख्श सिंह व भगवती प्रसाद दुबे ने कहा कि अचानक बदले मौसम का प्रतिकूल प्रभाव धान की फसल पर पड़ सकता है। कहा कि यदि एक दो दिन में तेज धूप निकलती है, तो जिनकी फसल तैयार हो चुकी है, उन्हें काटने का मौका मिल जाएगा।
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अचानक मौसम के बदले मिजाज ने आम लोगों के सामने कई प्रकार की समस्याएं खड़ी कर दीं। बुधवार देर शाम से गुरुवार सुबह तक रुक रुककर बूंदाबांदी होती रही। साथ ही सर्द हवाएं भी चलने लगीं। नतीजा यह हुआ कि बुधवार शाम से ही तापमान में गिरावट होने लगी। यह सिलसिला गुरुवार को भी चला।
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पूरे दिन आसमान पर काले बादल छाए रहने एवं सर्द हवाओं के चलने से गिरे तापमान ने आम जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया। अचानक बढ़ी ठंड ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने के लिए मजबूर कर दिया। खराब मौसम का प्रभाव परिषदीय विद्यालयों सहित निजी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति पर भी पड़ा। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या काफी कम रही।
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उधर आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे काले बादलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ बारिश कम होने से लगभग 40 प्रतिशत धान की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। यदि ओले गिरते हैं, तो इसका फसल पर प्रभावित हो जाएगी।
अकबरपुर के किसान रामजियावन व शमशेर सिंह ने बताया कि यदि तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो इससे धान की बालियां काली पड़ जाएंगी, जिससे फसल बर्बाद हो सकती है। जलालपुर के भगवानदीन व राघवेंद्र ने कहा कि अब तो ईश्वर का ही सहारा है। मौसम की मार ने उनकी कमर तोड़ दी है।
एक तो पहले ही काफी फसल बर्बाद हो चुकी है, उस पर यदि ओले गिरते हैं, तो इससे बची खुची फसल भी नष्ट हो जाएगी। भीटी के रामबख्श सिंह व भगवती प्रसाद दुबे ने कहा कि अचानक बदले मौसम का प्रतिकूल प्रभाव धान की फसल पर पड़ सकता है। कहा कि यदि एक दो दिन में तेज धूप निकलती है, तो जिनकी फसल तैयार हो चुकी है, उन्हें काटने का मौका मिल जाएगा।