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राज्यपाल ने खारिज की हत्या में सजायाफ्ता कैदी की दया याचिका
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अंबेडकरनगर। महिला की हत्या के एक दशक पुराने मामले में राज्यपाल ने एक सजायाफ्ता कैदी की दया याचिका खारिज कर दी है। इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में महिला की हत्या अवैध संबंधों के चलते कर दी गई थी।
वर्ष 2009 में तत्कालीन फैजाबाद जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में महिला का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। धारदार हथियार से महिला की गला काटकर हत्या की गई थी। पुलिस ने इस मामले में देवेंद्र यादव व अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया था। अवैध संबंधों को लेकर हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम फैजाबाद ने 28 सितंबर 2010 को मुख्य आरोपी देवेंद्र यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही वह मंडल कारागार फैजाबाद में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। बीते दिनों देवेंद्र ने राज्यपाल के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत कराई, जिसमें क्षमादान की मांग की गई।
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प्रकरण में जिलास्तरीय समिति ने कहा कि अभियुक्त को क्षमादान देना उचित नहीं है, क्योंकि वह भविष्य में फिर से अपराध करने लायक अशक्त नहीं है। फिर से अपराध की संभावना प्रकट किए जाने के चलते समिति ने समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की। इसे देखते हुए राज्यपाल रामनाईक ने दया याचिका अस्वीकार कर दी।
विशेष सचिव अमरसेन सिंह ने बीते दिनों अपर पुलिस महानिदेशक कारागार प्रशासन को पत्र भेजकर बताया कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दया याचिका के आधार पर समय से पूर्व की रिहाई को राज्यपाल ने अस्वीकार कर दिया है। उधर, एएसपी अशोक कुमार राय ने कहा कि ऐसा कोई प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। जानकारी कराई जा रही है।
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वर्ष 2009 में तत्कालीन फैजाबाद जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में महिला का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। धारदार हथियार से महिला की गला काटकर हत्या की गई थी। पुलिस ने इस मामले में देवेंद्र यादव व अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया था। अवैध संबंधों को लेकर हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम फैजाबाद ने 28 सितंबर 2010 को मुख्य आरोपी देवेंद्र यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही वह मंडल कारागार फैजाबाद में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। बीते दिनों देवेंद्र ने राज्यपाल के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत कराई, जिसमें क्षमादान की मांग की गई।
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प्रकरण में जिलास्तरीय समिति ने कहा कि अभियुक्त को क्षमादान देना उचित नहीं है, क्योंकि वह भविष्य में फिर से अपराध करने लायक अशक्त नहीं है। फिर से अपराध की संभावना प्रकट किए जाने के चलते समिति ने समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की। इसे देखते हुए राज्यपाल रामनाईक ने दया याचिका अस्वीकार कर दी।
विशेष सचिव अमरसेन सिंह ने बीते दिनों अपर पुलिस महानिदेशक कारागार प्रशासन को पत्र भेजकर बताया कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दया याचिका के आधार पर समय से पूर्व की रिहाई को राज्यपाल ने अस्वीकार कर दिया है। उधर, एएसपी अशोक कुमार राय ने कहा कि ऐसा कोई प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। जानकारी कराई जा रही है।