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शिक्षक को अकारण थाने लाकर लाकअप में डाला
Updated Mon, 01 Oct 2018 11:05 PM IST
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अंबेडकरनगर। बिना किसी अपराध के एक निर्दोष शिक्षक को हंसवर थाने लाकर लॉकअप में डाल दिया। लगभग तीन घंटे तक लॉकअप में रखने के बाद पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उसने पीड़ित शिक्षक को छोड़कर वापस घर भेज दिया। शिक्षक की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय व दो अन्य मंत्रियों ने पुलिस महानिदेशक को जांच कराने को निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र की मानें तो पुलिस को एक मामले में गांव के एक युवक की तलाश थी, पुलिस शिक्षक को आरोपी समझ कर पकड़ लाई। मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, उसके अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
मामला बीते 14 सितंबर को हंसवर थाना क्षेत्र के गोहिला गांव का है। एक इंटर कॉलेज में शिक्षक के पद पर तैनात जंगजीत सिंह चौहान के घर हंसवर थाने के पुलिसकर्मी पहुंचे और तलाशी शुरू कर दी। जंगजीत ने कारण पूछा, तो अपमानित करते हुए पकड़ ले गए। परिवार की महिलाओं को भी इस दौरान आरोप के मुताबिक अपमानित किया गया। जंगजीत के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने थाने ले जाकर उन्हें लॉकअप में डाल दिया। पुलिसकर्मियों को दरअसल गांव निवासी रणविजय की एक मामले में तलाश थी। उसे तलाशते हुए पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे। जंगजीत ने गांव में ही पुलिसकर्मियों को बताया कि उसके भाई का नाम भी रणविजय है, जो कि सेना में तैनात है। पुलिसकर्मियों ने इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं की। लगभग तीन घंटे थाने के लॉकअप में रखने के बाद पुलिसकर्मियों को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने शिक्षक को छोड़ दिया।
पीड़ित शिक्षक ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने के साथ ही श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य व ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह से की। दोनों मंत्रियों ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर थाना प्रभारी रामअवतार, दरोगा बलवान सिंह व मुंशी देवेंद्र चौधरी के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह प्रकरण सामने आने पर पुलिस प्रशासन ने स्थानीयस्तर पर भी मामले में जांच शुरू करा दी है।
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मामला बीते 14 सितंबर को हंसवर थाना क्षेत्र के गोहिला गांव का है। एक इंटर कॉलेज में शिक्षक के पद पर तैनात जंगजीत सिंह चौहान के घर हंसवर थाने के पुलिसकर्मी पहुंचे और तलाशी शुरू कर दी। जंगजीत ने कारण पूछा, तो अपमानित करते हुए पकड़ ले गए। परिवार की महिलाओं को भी इस दौरान आरोप के मुताबिक अपमानित किया गया। जंगजीत के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने थाने ले जाकर उन्हें लॉकअप में डाल दिया। पुलिसकर्मियों को दरअसल गांव निवासी रणविजय की एक मामले में तलाश थी। उसे तलाशते हुए पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे। जंगजीत ने गांव में ही पुलिसकर्मियों को बताया कि उसके भाई का नाम भी रणविजय है, जो कि सेना में तैनात है। पुलिसकर्मियों ने इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं की। लगभग तीन घंटे थाने के लॉकअप में रखने के बाद पुलिसकर्मियों को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने शिक्षक को छोड़ दिया।
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पीड़ित शिक्षक ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने के साथ ही श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य व ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह से की। दोनों मंत्रियों ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर थाना प्रभारी रामअवतार, दरोगा बलवान सिंह व मुंशी देवेंद्र चौधरी के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह प्रकरण सामने आने पर पुलिस प्रशासन ने स्थानीयस्तर पर भी मामले में जांच शुरू करा दी है।
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