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18,487 ट्रैक्टरों में से सिर्फ तीन का व्यावसायिक पंजीयन
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अंबेडकरनगर। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से यहां भी प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में रहती है। कृषि कार्यों में आमतौर पर प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बड़ी तादाद में ग्रामीण आवागमन करते रहते हैं। व्यावसायिक तौर पर भी इनका प्रयोग होता है। जिले में कुल 18,487 ट्रैक्टर पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से सिर्फ तीन का ही व्यावसायिक तौर पर पंजीयन है।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के चलते प्रदेश में हादसे तेजी से बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण चालकों का प्रशिक्षित न होना तथा प्रमुख मार्गों पर चलने का अभ्यस्त न होना है। हादसों के बढ़ने पर राज्य सरकार ने अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का दुरुपयोग रोकने को लेकर सख्ती की है लेकिन यहां सोमवार को भी लोग जान जोखिम में डालकर चलते दिखे।
दोपहर में अकबरपुर तहसील तिराहे के निकट एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखी। ट्रॉली पर कई महिलाएं व बच्चे बैठे थे। एक बच्चा तो ट्रैक्टर पर ही बैठा था।
मालीपुर रोड पर दोपहर बाद एक ट्रैक्टर भवन निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सरिया ले जाता दिखा। इसी तरह बसखारी से जहांगीरगंज जाने वाले मार्ग पर दोपहर तीन बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर कई ग्रामीण जाते दिखे। बताया गया कि ये लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे।
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जिले में इस तरह के दृश्य प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्रों में दिखने को मिलते हैं। ऐसे में कभी भी बड़े हादसे की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। खास बात तो यह है कि जिले में 18,487 ट्रैक्टर का एआरटीओ कार्यालय में पंजीयन है। इनमें से सिर्फ तीन का ही व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकरण है। इसके अलावा कोई भी ट्रैक्टर व्यावसायिक कार्य के लिए अधिकृत नहीं है। बावजूद इसके 18 हजार से अधिक ट्रैक्टर दिनरात व्यावसायिक कार्यों में ही लिप्त रहते हैं।
एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 18,484 ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद उनके मालिकों द्वारा वैवाहिक आयोजनों से लेकर धार्मिक कार्यों तक में बाकायदा बुकिंग की जाती है। इसके बाद चालक के साथ ट्रैक्टर-ट्राली भेज दी जाती है। कई बार सामूहिक रूप से चंदा जुटाकर भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ले जाई जाती हैं।
अंतिम संस्कार के लिए जाने के दौरान भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का बहुतायत प्रयोग होता है। विभिन्न निर्माण कार्यों के साथ-साथ अन्य निर्माण सामग्रियों की ढुलाई में भी ट्रैक्टर-ट्रालियों का प्रमुखता से प्रयोग चला आ रहा है। ये सारे काम अनधिकृत ढंग से होते रहते हैं।
शासन के निर्देश पर दो अक्तूबर से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को लेकर विशेष अभियान चलाया जाना था। इसके लिए जिलों को विशेष निर्देश दिए गए थे। पुलिस, प्रशासन व परिवहन महकमे को संयुक्त रूप से अभियान चलाना था। यातायात निदेशालय ने विशेष तौर पर निर्देश जारी किया था। इसके बावजूद न तो पुलिस महकमा कोई अभियान चला सका और न ही परिवहन महकमे को ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर अंकुश लगाने की सुध हुई।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का दुरुपयोग रोका जाएगा। सोमवार को अलग-अलग क्षेत्रों में जांच की गई लेकिन किसी भी ट्रैक्टर-ट्राली का दुरुपयोग होता नहीं दिखा। मंगलवार को सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।
-बीडी मिश्र, एआरटीओ
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ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के चलते प्रदेश में हादसे तेजी से बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण चालकों का प्रशिक्षित न होना तथा प्रमुख मार्गों पर चलने का अभ्यस्त न होना है। हादसों के बढ़ने पर राज्य सरकार ने अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का दुरुपयोग रोकने को लेकर सख्ती की है लेकिन यहां सोमवार को भी लोग जान जोखिम में डालकर चलते दिखे।
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दोपहर में अकबरपुर तहसील तिराहे के निकट एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखी। ट्रॉली पर कई महिलाएं व बच्चे बैठे थे। एक बच्चा तो ट्रैक्टर पर ही बैठा था।
मालीपुर रोड पर दोपहर बाद एक ट्रैक्टर भवन निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सरिया ले जाता दिखा। इसी तरह बसखारी से जहांगीरगंज जाने वाले मार्ग पर दोपहर तीन बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर कई ग्रामीण जाते दिखे। बताया गया कि ये लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे।
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जिले में इस तरह के दृश्य प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्रों में दिखने को मिलते हैं। ऐसे में कभी भी बड़े हादसे की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। खास बात तो यह है कि जिले में 18,487 ट्रैक्टर का एआरटीओ कार्यालय में पंजीयन है। इनमें से सिर्फ तीन का ही व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकरण है। इसके अलावा कोई भी ट्रैक्टर व्यावसायिक कार्य के लिए अधिकृत नहीं है। बावजूद इसके 18 हजार से अधिक ट्रैक्टर दिनरात व्यावसायिक कार्यों में ही लिप्त रहते हैं।
एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 18,484 ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद उनके मालिकों द्वारा वैवाहिक आयोजनों से लेकर धार्मिक कार्यों तक में बाकायदा बुकिंग की जाती है। इसके बाद चालक के साथ ट्रैक्टर-ट्राली भेज दी जाती है। कई बार सामूहिक रूप से चंदा जुटाकर भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ले जाई जाती हैं।
अंतिम संस्कार के लिए जाने के दौरान भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का बहुतायत प्रयोग होता है। विभिन्न निर्माण कार्यों के साथ-साथ अन्य निर्माण सामग्रियों की ढुलाई में भी ट्रैक्टर-ट्रालियों का प्रमुखता से प्रयोग चला आ रहा है। ये सारे काम अनधिकृत ढंग से होते रहते हैं।
शासन के निर्देश पर दो अक्तूबर से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को लेकर विशेष अभियान चलाया जाना था। इसके लिए जिलों को विशेष निर्देश दिए गए थे। पुलिस, प्रशासन व परिवहन महकमे को संयुक्त रूप से अभियान चलाना था। यातायात निदेशालय ने विशेष तौर पर निर्देश जारी किया था। इसके बावजूद न तो पुलिस महकमा कोई अभियान चला सका और न ही परिवहन महकमे को ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर अंकुश लगाने की सुध हुई।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का दुरुपयोग रोका जाएगा। सोमवार को अलग-अलग क्षेत्रों में जांच की गई लेकिन किसी भी ट्रैक्टर-ट्राली का दुरुपयोग होता नहीं दिखा। मंगलवार को सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।
-बीडी मिश्र, एआरटीओ