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एसपी की मां पर आचार संहिता का केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Sun, 15 Jan 2017 11:56 PM IST
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अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय पर रविवार को नीली बत्ती लगी इसी कार से बसपा की सभा में पहुंची आईपीएस की मां।
- फोटो : अमर उजाला
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आईपीएस पुत्र की मां होने का रुआब दिखाते हुए रविवार को नीली बत्ती लगे वाहन से बसपा कार्यकर्ता केसरा देवी कलेक्ट्रेट के निकट आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन समारोह में पहुंच गईं। शिकायत के बाद पहुंची पुलिस टीम वाहन को अकबरपुर कोतवाली ले आई। घंटों माथापच्ची के बाद पुलिस प्रशासन ने सिर्फ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज कर लीपापोती कर दी।
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जानकारों के अनुसार ऐसे मामले में नीली बत्ती के दुरुपयोग को लेकर थाने में आवश्यक धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए था लेकिन पुलिस प्रशासन इससे बच निकला। इसे लेकर सोशल मीडिया में प्रशासन की खूब किरकिरी भी हुई।
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गौरतलब है कि रविवार को बहुजन समाज पार्टी ने कलेक्ट्रेट के निकट पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का जन्मदिन समारोह आयोजित किया था जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर भी मौजूद थे। इसी समारोह में शामिल होने बेवाना थाना क्षेत्र के उदयपुर गांव निवासी आईपीएस अधिकारी अभिषेक की मां केसरा देवी भी पहुंची हुई थीं।
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आईपीएस पुत्र की मां होने के रुआब में उन्होंने कार पर नीली बत्ती लगा रखी थी। कार छोड़कर वे कार्यक्रम में भाग लेने लगीं। इसी बीच किसी ने इसकी शिकायत पुलिस प्रशासन से कर दी। आनन-फानन में पहुंचे एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह व पुलिस टीम ने उक्त वाहन को अभिरक्षा में ले लिया।
इसी बीच केसरा देवी भी वहां पहुंची और बत्ती उतार देने का आश्वासन दिया लेकिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने वाहन अकबरपुर कोतवाली भिजवा दिया। कोतवाली में हुई पूछताछ में पता चला कि पकड़ा गया वाहन आईपीएस अधिकारी अभिषेक की मां के नाम रजिस्टर्ड है। अभिषेक यातायात निदेशालय लखनऊ में तैनात हैं।
उनकी मां निजी चालक रामवृक्ष के साथ कार्यक्रम में आई हुई थीं। आईपीएस अधिकारी से जुड़ा मामला होने के चलते पुलिस प्रशासन देर तक माथापच्ची में लगा रहा। तय हुआ कि मामले में सिर्फ आदर्श आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाए। इसके बाद बसपा कार्यकर्ता केसरा देवी व उनके चालक रामवृक्ष के विरुद्ध आचार संहिता उल्लंघन का केस अकबरपुर थाने में दर्ज कर लिया गया।
आमतौर पर लोगों का मानना है कि वाहन पर अवैध ढंग से नीली बत्ती लगाकर घूमने के मामले में नियम के अनुसार केस दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए थी। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि यह वाहन शिकायत के आधार पर न पकड़ा जाता तो चुनाव के दौरान नीली बत्ती के रुआब में इससे कई तरह के प्रतिबंधित कार्य आसानी से हो सकते थे।
वाहन पर नीली बत्ती लगी होने के अलावा पुलिस का प्रतीक चिन्ह भी अंकित था। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले में लीपापोती किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर खासी किरकिरी भी हुई। लोगों ने आईपीएस अधिकारी से जुड़ा मामला होने के चलते अलग से कोई केस दर्ज न किए जाने पर प्रशासन की खिंचाई भी की।
आईपीएस अधिकारी अभिषेक गत वर्ष एक सिपाही की पिटाई मामले से चर्चा में आए थे। स्वाट टीम में तैनात सिपाही वसीम हाशिमी पर अपने पिता के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए अकबरपुर तहसील तिराहे पर पिटाई कर दी थी। इससे लोगों में खासा आक्रोश व्याप्त हो गया था। तब उन्हें अकबरपुर कोतवाली से भारी सुरक्षा में यहां से लखनऊ के लिए रवाना किया गया था।
एसपी पीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि नीली बत्ती लगाकर वाहन लाना गलत था। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अभिरक्षा में ले लिया। इसके बाद सभी वैधानिक कार्रवाई तय हुई। न सिर्फ आचार संहिता के तहत केस दर्ज किया गया वरन मोटर व्हीकिल एक्ट के तहत भी केस दर्ज हुआ है। वाहन थाने में है। सीजेएम या एआरटीओ को ही अब वाहन छोड़ने का अधिकार है।