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इंसानियत के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाएं
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित इमामबारगाह में लब्बैक या हुसैन की सदाओं के बीच कदीमी अजादारी का आयोजन हुआ। रविवार देर रात तक चले कार्यक्रम में एक तरफ जहां स्थानीय व बाहरी अंजुमनों की ओर से नौहाख्वानी व सीनाजनी की गई तो वहीं देश के प्रसिद्ध धर्मगुरुओं ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान जायरीन को दुलदुल, ताबूत व अलम की जियारत कराई गई। कार्यक्रम के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा गया।
अंजुमन गुंचे अकबरिया के तत्वावधान में रविवार देर शाम कदीमी अजादारी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास की मजलिस से हुई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में आना ही सब कुछ नहीं है। जिस हुसैन की याद में कार्यक्रम किया जा रहा है, उनके आदर्शों पर भी चलना होगा। यदि ऐसा नहीं करते, तो इस प्रकार के आयोजन में भागीदारी करने से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। युवाओं को चाहिए कि वे कर्बला के मिशन को आगे बढ़ाएं। इंसानियत के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाएं। बाद में उन्होंने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डलकर माहौल को भावुक बना दिया। इसके बाद नौहाख्वानी व सीनाजनी का दौर शुरू हो गया।
अंजुमन गुंचे अकबरिया के सचिव यासिर हुसैन ने बताया कि मजलिस के बाद अंजुमन असगरिया कदीम अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन सिपाहे हुसैनी भरौली सुल्तानपुर, अंजुमन जुल्फेकारिया जलालपुर, अंजुमन सज्जादिया मतलूबपुर जलालपुर, अंजुमन हुसैनिया लोरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। कार्यक्रम के बीच काशिफ अयोध्यवी व आरिफ जलाल बिजनौरी ने जहां कलाम प्रस्तुत किया, तो वहीं मौलाना सै. शरर नकवी ने मजलिस को संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि इज्जत व जिल्लत देने वाला अल्लाह है। अल्लाह जिसे चाहे इज्जत दे और जिसे चाहे जिल्लत है। इंसान के बस का कुछ भी नहीं है। बाद में उन्होंने कर्बला के नन्हें शहीद हजरत अली असगर की शहादत बयां कर माहौल को गमगीन बना दिया। कार्यक्रम का समापन मौलाना सै. शारिब की मजलिस से हुआ। कार्यक्रम का संचालन जैबी रिजवी व जर्रार हुसैन ने किया। देर रात तक चले कार्यक्रम में आने वाले जायरीन को दुलदुल, अलम व ताबूत की जियारत भी कराई गई। इस मौके पर रेहान जैदी, रेहान अब्बास, फरहत अब्बास, सलमान रिजवी, शुजाअत, कैफी, अली कौसर, समीर, जैगम अब्बास, वसी रजा, आदि मौजूद रहे।
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अंजुमन गुंचे अकबरिया के तत्वावधान में रविवार देर शाम कदीमी अजादारी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास की मजलिस से हुई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में आना ही सब कुछ नहीं है। जिस हुसैन की याद में कार्यक्रम किया जा रहा है, उनके आदर्शों पर भी चलना होगा। यदि ऐसा नहीं करते, तो इस प्रकार के आयोजन में भागीदारी करने से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। युवाओं को चाहिए कि वे कर्बला के मिशन को आगे बढ़ाएं। इंसानियत के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाएं। बाद में उन्होंने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डलकर माहौल को भावुक बना दिया। इसके बाद नौहाख्वानी व सीनाजनी का दौर शुरू हो गया।
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अंजुमन गुंचे अकबरिया के सचिव यासिर हुसैन ने बताया कि मजलिस के बाद अंजुमन असगरिया कदीम अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन सिपाहे हुसैनी भरौली सुल्तानपुर, अंजुमन जुल्फेकारिया जलालपुर, अंजुमन सज्जादिया मतलूबपुर जलालपुर, अंजुमन हुसैनिया लोरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। कार्यक्रम के बीच काशिफ अयोध्यवी व आरिफ जलाल बिजनौरी ने जहां कलाम प्रस्तुत किया, तो वहीं मौलाना सै. शरर नकवी ने मजलिस को संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि इज्जत व जिल्लत देने वाला अल्लाह है। अल्लाह जिसे चाहे इज्जत दे और जिसे चाहे जिल्लत है। इंसान के बस का कुछ भी नहीं है। बाद में उन्होंने कर्बला के नन्हें शहीद हजरत अली असगर की शहादत बयां कर माहौल को गमगीन बना दिया। कार्यक्रम का समापन मौलाना सै. शारिब की मजलिस से हुआ। कार्यक्रम का संचालन जैबी रिजवी व जर्रार हुसैन ने किया। देर रात तक चले कार्यक्रम में आने वाले जायरीन को दुलदुल, अलम व ताबूत की जियारत भी कराई गई। इस मौके पर रेहान जैदी, रेहान अब्बास, फरहत अब्बास, सलमान रिजवी, शुजाअत, कैफी, अली कौसर, समीर, जैगम अब्बास, वसी रजा, आदि मौजूद रहे।