{"_id":"5713c5154f1c1b412d10fc74","slug":"books-were-kept-in-the-bathroom-for-farmer-awareness","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाथरूम में धूल खा रहीं किसान जागरूकता को आईं पुस्तकें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाथरूम में धूल खा रहीं किसान जागरूकता को आईं पुस्तकें
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Sun, 17 Apr 2016 10:47 PM IST
विज्ञापन
अंबेडकरनगर के कृषि विभाग स्थित प्रसाधन कक्ष में धूल फांक रहीं किसान जागरूकता के लिए आईं पुस्तकें।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को तकनीकी खेती के लिए जागरूक करने व अन्य जानकारियां देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर कैलेंडर व पुस्तकें तो छपवाई गईं, मगर उन्हें किसानों में वितरित करने की सुध नहीं है। किसानों में वितरण के लिए आए कैलेंडर व पुस्तकें लंबे समय से कृषि विभाग कार्यालय के बाथरूम में डंप हैं।
विज्ञापन
नतीजतन किसानों को खेती से संबंधित जानकारियां नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं। तकनीकी खेती करने, अच्छी फसल पैदा करने एवं फसलों को कीड़े-मकोड़ों से बचाने के लिए किसानों में जागरूकता लाने के लिए शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये खर्च कर कैलेंडर व पुस्तकें छपवाई जाती हैं।
विज्ञापन
किसानों में निशुल्क वितरण के लिए लगभग एक वर्ष पूर्व बड़ी संख्या में ऐसे कैलेंडर व पुस्तकें कृषि विभाग कार्यालय को उपलब्ध कराई गई थीं। मगर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह कि मात्र चंद पुस्तकों व कैलेंडर का वितरण कर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर लिया गया।
विज्ञापन
किसानों के हित को लेकर विभागीय अधिकारियों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में पुस्तकें व कैलेंडर सहित अन्य प्रचार प्रसार सामग्रियां उपकृषि निदेशक कार्यालय के बगल स्थित एक बाथरूम में पड़ी हुई हैं। इनमें अधिकांश पुस्तकें व कैलेंडर या तो सड़ गए हैं या फिर उन्हें दीमक ने खा लिया है।
अकबरपुर के किसान अरविंद वर्मा व दयाराम ने कहा कि उन्हें न तो कृषि से जुड़ी तमाम योजनाओं के बारे में पता चल पाता है और न ही फसल के रख रखाव के बारे में ही। उन्हें नहीं याद है कि कभी उन्हें किसी प्रकार की पुस्तकें व कैलेंडर मिला हो।
सम्मनपुर के किसान विनोद कुमार व अमित वर्मा ने कहा कि विभागीय अधिकारी व कर्मचारी किसानों के हित को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं हैं। फसलों को बचाने के लिए गावों में किसी प्रकार का प्रचार प्रसार नहीं किया जाता।
बताया कि उनके गांव में किसी भी किसान को न तो कैलेंडर मिला है और न ही पुस्तकें। उधर उपकृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसे वे दिखवाएंगे। पुस्तकों व कैलेंडर का वितरण किसानों में कराया जाएगा।