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Ambedkar Nagar News: जिले के सभी गांव माॅडल के रूप में होंगे तैयार
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भीटी में मॉडल गांव जैतपुर निधियावां में बन कर तैया कूड़ा घर - संवाद
अंबेडकरनगर। जनपद के 1597 राजस्व गांवों में से 823 गांव को माॅडल बनाने के लिए चुना गया था। इसमें से 652 गांवों को माॅडल गांव का दर्जा मिल चुका है। इसके बाद शासन ने 2024-25 में जिले के सभी राजस्व गांवों को माॅडल बनाने का निर्णय लिया है। अब बचे हुए 945 गांवों में विकास की बयार बहेगी। यहां साफ-सफाई के साथ ही गांव से निकलने वाले कूड़े के प्रबंधन के लिए कार्य होंगे।
शासन ने पहले चरण में वर्ष 2022-23 में 36 राजस्व गांवों को माॅडल बनाने के लिए चयनित किया। इनके माॅडल बनने के बाद दूसरे चरण में वर्ष 2023-24 में 823 गांवों का चयन हुआ, इसमें से 652 गांव माॅडल बन चुके हैं। अब शासन ने जिले के बचे हुए सभी 945 राजस्व गांवों को भी मॉडल के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है।
सभी मॉडल गांव में साफ-सफाई के बेहतर प्रबंधन किए जाएंगे। गांव से निकलने वाले कूड़े को अलग करने के लिए कूड़ा घर बनेगा। यही नहीं कूड़े का उठान करने के लिए हर गांव में एक ई-रिक्शा उपलब्ध कराया जा रहा है। कूड़े के निस्तारण के लिए कंपोस्ट पिट, वर्मी कंपोस्ट पिट के अलावा सोकपिट की भी सुविधा होगी।
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तीसरे चरण में माॅडल के रूप में तैयार हो चुके सभी गांवों में सोलर सिस्टम की सुविधाएं देने पर जोर दिया गया है। पेयजल व सिंचाई के लिए पानी ,आधुनिक इंटरनेट की सुविधा, गांव को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, विवाद रहित खुशहाली वाले गांव की सोच विकसित करने, गांव का बायोडाटा-प्रोफाइल तैयार किए जाने, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने पर जोर, खेल, कला व संस्कृति के विकास का ध्यान रखने, महिला विकास पर जोर देने के साथ ही देश और प्रदेश सरकार के कार्यक्रमों को गांव में मजबूती के साथ लागू किया जाएगा।
सभी राजस्व गांव बनेंगे माॅडल गांव
जिले के 1597 राजस्व गांवों में 652 गांवों को माडल गांव बनाया जा चुका है। तीसरे चरण में शेष बचे गांवों को भी शासन के निर्देशानुसार विकसित किया जाएगा। योजना के तहत सभी कार्य कराए जाएंगे। - अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
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शासन ने पहले चरण में वर्ष 2022-23 में 36 राजस्व गांवों को माॅडल बनाने के लिए चयनित किया। इनके माॅडल बनने के बाद दूसरे चरण में वर्ष 2023-24 में 823 गांवों का चयन हुआ, इसमें से 652 गांव माॅडल बन चुके हैं। अब शासन ने जिले के बचे हुए सभी 945 राजस्व गांवों को भी मॉडल के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है।
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सभी मॉडल गांव में साफ-सफाई के बेहतर प्रबंधन किए जाएंगे। गांव से निकलने वाले कूड़े को अलग करने के लिए कूड़ा घर बनेगा। यही नहीं कूड़े का उठान करने के लिए हर गांव में एक ई-रिक्शा उपलब्ध कराया जा रहा है। कूड़े के निस्तारण के लिए कंपोस्ट पिट, वर्मी कंपोस्ट पिट के अलावा सोकपिट की भी सुविधा होगी।
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तीसरे चरण में माॅडल के रूप में तैयार हो चुके सभी गांवों में सोलर सिस्टम की सुविधाएं देने पर जोर दिया गया है। पेयजल व सिंचाई के लिए पानी ,आधुनिक इंटरनेट की सुविधा, गांव को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, विवाद रहित खुशहाली वाले गांव की सोच विकसित करने, गांव का बायोडाटा-प्रोफाइल तैयार किए जाने, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने पर जोर, खेल, कला व संस्कृति के विकास का ध्यान रखने, महिला विकास पर जोर देने के साथ ही देश और प्रदेश सरकार के कार्यक्रमों को गांव में मजबूती के साथ लागू किया जाएगा।
सभी राजस्व गांव बनेंगे माॅडल गांव
जिले के 1597 राजस्व गांवों में 652 गांवों को माडल गांव बनाया जा चुका है। तीसरे चरण में शेष बचे गांवों को भी शासन के निर्देशानुसार विकसित किया जाएगा। योजना के तहत सभी कार्य कराए जाएंगे। - अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ