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दो नवजात को मिलेगा माता-पिता का नाम

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
AmbedkarNagar
AmbedkarNagar Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। लावारिस मिले दो बच्चों को जल्द ही उनके माता-पिता का नाम मिल जायेगा। प्यार तो पहले से ही मिल रहा था, लेकिन आगे चलकर उन्हें सम्मान की जिंदगी का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ही प्रशासन ने यह कार्रवाई शुरू की है। गुरुवार को दोनों बच्चों का पालन पोषण करने वाले अभिभावकों के साथ काउंसलिंग कर कई आवश्यक प्रक्रिया अपनायी गयी। बताते चलें कि लोकलाज से बचने के लिए एक मां ने अपने नवजात बच्चे को सड़क के किनारे झाड़ियों में प्रकृति के हवाले कर दिया। टांडा तहसील क्षेत्र अंतर्गत नेहरूनगर निवासी मकरंद गुप्ता गत वर्ष 10 दिसंबर को श्रवणक्षेत्र स्थित अपनी बहन से मिलने जा रहा था। जब श्रवणक्षेत्र के निकट पहुंचा, तो उसे सड़क के किनारे झाड़ियों से एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। देखा कि एक नवजात बच्चा कपड़ों में लिपटा पड़ा है। उसने बच्चे को गोद में उठा लिया और घर ले आया। इसकी सूचना उसने स्थानीय पुलिस को भी दी। कुछ ऐसा ही मामला बीते 24 अक्तूबर को भी मालीपुर थाना क्षेत्र के डीघी गांव में हुआ। यहां एक गन्ने के खेत से नन्हीं बच्ची के रोने की आवाज ग्रामीणों को सुनाई दी। मौके पर पहुंचे ग्राम प्रधान महेंद्र मौर्य ने आगे बढ़कर बच्ची को गले से लगा लिया और उसे घर ले आये। उन्होंने भी इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। दोनों नवजात बच्चों को अपने सगे बच्चे की तरह इन परिवारों में पाला जा रहा है। इस बीच बीते दिनों दोनों नवजात को सरकारी तौर पर पिता का दर्जा देने के लिए अभिभावकों ने जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन किया। जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने इस पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये। गुरुवार को इस संबंध में विकास भवन स्थित जिला प्रोबेशन कार्यालय में बाल कल्याण समिति की बैठक अध्यक्ष सुरेंद्र मोहन उपाध्याय व प्रभारी प्रोबेशन अधिकारी रणजीत सिंह की उपस्थिति में हुई। इसमें दोनों नवजात के अभिभावक भी मौजूद रहे। इसमें अभिभावकों के साथ लंबी काउंसलिंग की गई। अभिभावकों द्वारा दिए गए जवाब से संतुष्ट होने के बाद उनसे निर्धारित प्रारूप 14 भरवाया गया और कहा गया कि दोनों बच्चों को शासन द्वारा अधिकृत वरदान शिशु गृह लखनऊ भेज दें। वहां से बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण आदि के बाद उन्हें इन अभिभावकों को सौंप दिया जायेगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी व प्रभारी प्रोबेशन अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि इसके बाद इन बच्चों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किया जायेगा। वहां से उन्हें सरकारी तौर पर पिता का दर्जा प्रदान किया जाएगा। बताया कि उनके संज्ञान के मुताबिक जिले में पहली बार यह प्रक्रिया शुरू की गयी है।
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