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असमंजस में 70 हजार छात्र-छात्राएं
AmbedkarNagar
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं की शुल्क प्रतिपूर्ति तो अब उनके खाते में पहुंचेगी, लेकिन सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति किस प्रकार मिलेगी, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। जिले में सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के 70 हजार 442 छात्र-छात्राओं की फीडिंग तो हो गई है, लेकिन उनमें उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
जिले में शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का सुचारु लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है। इसमें विद्यालय प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। इस बीच छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति का सुचारु लाभ देने के लिए शासन ने शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि उनके खाते में भेजने का निर्णय लिया। हालांकि शासन द्वारा सिर्फ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की ही शुल्क प्रतिपूर्ति उनके खाते में भेजने का निर्णय लिया गया। ऐसे में सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं में उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए पांच माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई दिशा निर्देश शासन द्वारा नहीं दिया जा सका है। जिले में अब तक सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के कुल 70 हजार 442 छात्र-छात्राओं की फीडिंग तो हो चुकी है, लेकिन उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि किस प्रकार से मिलेगी, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक फीडिंग के आधार पर सामान्य वर्ग के 19 हजार 198 छात्र-छात्राओं के लिए तीन करोड़ 42 लाख 78 हजार तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 51 हजार 244 छात्र-छात्राओं के लिए 12 करोड़ 37 लाख 10 हजार रुपये की मांग की गई है। हालांकि यह धनराशि उन्हें किस माध्यम से उपलब्ध होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। समाज कल्याण अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि शासन से अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। बताया कि अनुसूचित जाति के 36 हजार 244 छात्र-छात्राओं की फीडिंग अब तक हो चुकी है। इसके लिए 10 करोड़ 37 लाख 93 हजार रुपये की मांग की गई है। धन उपलब्ध होते ही शासन के निर्देशानुसार बच्चों के खाते में धन भेज दी जाएगी।
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जिले में शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का सुचारु लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है। इसमें विद्यालय प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। इस बीच छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति का सुचारु लाभ देने के लिए शासन ने शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि उनके खाते में भेजने का निर्णय लिया। हालांकि शासन द्वारा सिर्फ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की ही शुल्क प्रतिपूर्ति उनके खाते में भेजने का निर्णय लिया गया। ऐसे में सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं में उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए पांच माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई दिशा निर्देश शासन द्वारा नहीं दिया जा सका है। जिले में अब तक सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के कुल 70 हजार 442 छात्र-छात्राओं की फीडिंग तो हो चुकी है, लेकिन उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि किस प्रकार से मिलेगी, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक फीडिंग के आधार पर सामान्य वर्ग के 19 हजार 198 छात्र-छात्राओं के लिए तीन करोड़ 42 लाख 78 हजार तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 51 हजार 244 छात्र-छात्राओं के लिए 12 करोड़ 37 लाख 10 हजार रुपये की मांग की गई है। हालांकि यह धनराशि उन्हें किस माध्यम से उपलब्ध होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। समाज कल्याण अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि शासन से अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। बताया कि अनुसूचित जाति के 36 हजार 244 छात्र-छात्राओं की फीडिंग अब तक हो चुकी है। इसके लिए 10 करोड़ 37 लाख 93 हजार रुपये की मांग की गई है। धन उपलब्ध होते ही शासन के निर्देशानुसार बच्चों के खाते में धन भेज दी जाएगी।
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