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बिना पानी चौपट हुई धान की 40 फीसदी फसल
अंबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2015 11:32 PM IST
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जिले की 120 माइनरों के सापेक्ष अधिकांश माइनरों में एक बार के अलावा दूसरी बार पानी नहीं पहुंच सका। नतीजतन एक तरफ जहां बारिश न होने से धान की सिंचाई प्रभावित हुई है।
वहीं माइनरों में पर्याप्त पानी न आने से लगभग डेढ़ लाख उन किसानों को सिंचाई को लेकर तगड़ा झटका लगा है, जो सिंचाई के लिए माइनर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं।
समुचित सिंचाई न होने से लगभग 40 प्रतिशत धान की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई या फिर माइनरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचा, तो 50 प्रतिशत से अधिक की फसल चौपट हो जाएगी।
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समुचित बारिश न होने से जिले में सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। सुचारु सिंचाई न होने से खेतों में खड़ी धान की फसल चौपट हो रही है।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभागीय आंकड़ों के मुताबिक विगत सप्ताह तक जहां 25 प्रतिशत धान की फसल बर्बाद हो चुकी थी, वहीं अब तक 40 प्रतिशत फसल चौपट हो चुकी है।
धान किसानों को एक तरफ जहां बारिश न होने से तगड़ा झटका लगा है, वहीं माइनरों में पानी कम आने से उन किसानों को अधिक मायूसी हुई है, जो सिंचाई के लिए पूरी तरह माइनर के पानी पर निर्भर हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शारदा सहायक नहर से कुल 120 माइनर निकली हैं। इन माइनरों में पानी पहुंचाने को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकांश माइनरों में एक से अधिक बार पानी नहीं पहुंच सका है।
नतीजतन इन माइनरों से जुड़े लगभग सवा लाख किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है।
जिले में लगभग एक लाख 95 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की बुआई हुई है। चावल के लिए अग्रणी जिलों में शामिल अंबेडकरनगर के किसानों की कमर इस बार बारिश न होने एवं माइनरों में पानी कम आने से टूट गई है।
अकबरपुर के किसान राघवेंद्र तिवारी व श्यामसुंदर ने कहा कि शारदा सहायक नहर में ही पानी मानक के अनुरूप नहीं आ सका है। ऐसे में माइनरों तक कितना पानी पहुंचेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
टांडा के किसान शमशेर सिंह व जगन्नाथ ने कहा कि माइनरों तक पानी पहुंचाने को लेकर न तो विभागीय अधिकारी गंभीर हो सके और न ही शासन। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
अधिशाषी अभियंता नहर विभाग विद्यासागर सिंह ने बताया कि शारदा सहायक नहर में 280 सेमी गहराई में पानी आने का मानक है, लेकिन इस सीजन में 240 सेमी गहराई में पानी आ सका है। बताया कि इसका मुख्य कारण फैजाबाद व बाराबंकी के किसानों द्वारा अधिक पानी का प्रयोग करना है। बताया कि टेल तक पानी पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया है।
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वहीं माइनरों में पर्याप्त पानी न आने से लगभग डेढ़ लाख उन किसानों को सिंचाई को लेकर तगड़ा झटका लगा है, जो सिंचाई के लिए माइनर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं।
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समुचित सिंचाई न होने से लगभग 40 प्रतिशत धान की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई या फिर माइनरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचा, तो 50 प्रतिशत से अधिक की फसल चौपट हो जाएगी।
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समुचित बारिश न होने से जिले में सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। सुचारु सिंचाई न होने से खेतों में खड़ी धान की फसल चौपट हो रही है।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभागीय आंकड़ों के मुताबिक विगत सप्ताह तक जहां 25 प्रतिशत धान की फसल बर्बाद हो चुकी थी, वहीं अब तक 40 प्रतिशत फसल चौपट हो चुकी है।
धान किसानों को एक तरफ जहां बारिश न होने से तगड़ा झटका लगा है, वहीं माइनरों में पानी कम आने से उन किसानों को अधिक मायूसी हुई है, जो सिंचाई के लिए पूरी तरह माइनर के पानी पर निर्भर हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शारदा सहायक नहर से कुल 120 माइनर निकली हैं। इन माइनरों में पानी पहुंचाने को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकांश माइनरों में एक से अधिक बार पानी नहीं पहुंच सका है।
नतीजतन इन माइनरों से जुड़े लगभग सवा लाख किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है।
जिले में लगभग एक लाख 95 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की बुआई हुई है। चावल के लिए अग्रणी जिलों में शामिल अंबेडकरनगर के किसानों की कमर इस बार बारिश न होने एवं माइनरों में पानी कम आने से टूट गई है।
अकबरपुर के किसान राघवेंद्र तिवारी व श्यामसुंदर ने कहा कि शारदा सहायक नहर में ही पानी मानक के अनुरूप नहीं आ सका है। ऐसे में माइनरों तक कितना पानी पहुंचेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
टांडा के किसान शमशेर सिंह व जगन्नाथ ने कहा कि माइनरों तक पानी पहुंचाने को लेकर न तो विभागीय अधिकारी गंभीर हो सके और न ही शासन। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
अधिशाषी अभियंता नहर विभाग विद्यासागर सिंह ने बताया कि शारदा सहायक नहर में 280 सेमी गहराई में पानी आने का मानक है, लेकिन इस सीजन में 240 सेमी गहराई में पानी आ सका है। बताया कि इसका मुख्य कारण फैजाबाद व बाराबंकी के किसानों द्वारा अधिक पानी का प्रयोग करना है। बताया कि टेल तक पानी पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया है।