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लोक अदालत में 34531 वाद निस्तारित
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अंबेडकरनगर जनपद न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत में समस्याओं का निस्तारण कराते लोग।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। 20 अदालतों के माध्यम से न्यायाधीशों ने न्यायालय समेत बैंक व अन्य विभाग से जुड़े कुल 34 हजार 531 वादों का निस्तारण किया। कोरोना प्रोटोकॉल के बीच लोक अदालत का वादकारियों ने बढ़-चढ़कर लाभ उठाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जहां 33 वर्ष पुराने एक वाद का निस्तारण किया। वहीं लम्बे समय से न्यायालयों का चक्कर काट रहे फरियादी लोक अदालत के माध्यम से वादों का निस्तारण होने पर खुशी का इजहार किया। इससे पहले जनपद न्यायाधीश ने शिविर का शुभारंभ किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश पद्म नारायण मिश्र ने किया। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक अनमोल पाल की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में जनपद न्यायाधीश ने एक वाद का निस्तारण किया। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक ने 8 वाद, अपर जिला न्यायाधीश विश्वनाथ ने 32 का निस्तारण करते हुए 4500 रुपये अर्थदण्ड आरोपित किया। विशेष न्यायाधीश रत्नेश मणि त्रिपाठी ने तीन वादों का निस्तारण करते हुए 1500 रुपये, विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट आशीष वर्मा ने एक वाद का निस्तारण कर 500, अपर जिला जज नेहा आनंद ने एक वाद, अपर जिला जज पाक्सो फरीदा बेगम ने 2 वादों का निस्तारण कर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक पूजा विश्वकर्मा ने 22 वादों का निस्तारण कर 2 दम्पत्तियों को साथ रहने के लिए राजी किया। अपर जिला जज त्वरित अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने 2 वादों का निस्तारण कर 500 रुपये जुर्माना लगाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 33 वर्ष पुराने वाद का निस्तारण किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 20 अदालतों के माध्यम से राजस्व न्यायालयों से जुड़े 18 हजार 305 वाद एवं जनपद के अन्य विभागों के 9 हजार 929 वादों का निस्तारण किया गया। बैंकों के 754 वादों का निस्तारण कराया।
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लोक अदालत में प्री लिटिगेशन के कुल 28 हजार 988 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा न्यायालय से जुड़े 5543 वादों का निस्तारण हुआ। कुल मिलाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में 34 हजार 531 वादों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष चंद्रहास राम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक आशीष सिंह आदि ने विशेष भूमिका निभाई।
मुकदमे से मिली निजात तो दिखी चेहरे पर खुशी
लंबे समय से न्यायालय का चक्कर काट रहे फरियादियों ने शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमे से निजात मिलने पर राहत की सांस ली। अमर उजाला टीम ने ऐसे फरियादियों से मिलकर उनका हाल जाना। राष्ट्रीय लोक अदालत में मिली टांडा निवासिनी तुला देवी ने वर्ष 2016 में व्यापार के लिए बैंक ऋण लिया था। इस बीच कोरोना महामारी आ गई, और उनका व्यापार भी नही चल पाया। इससे वह ऋण की अदायगी भी नही कर पायी। लगातार बढ़ रहे ब्याज से वे परेशान थीं। कुल 85 हजार रुपये का ऋण उनके ऊपर हो गया था। परंतु लोक अदालत में 35 हजार रुपये की अदायगी कर उन्हें ऋण से राहत मिल गई। सिसानी निवासी रवीन्द्र सिंह ने बताया कि 2018 में केसीसी ऋण लिया था। कोरोना महामारी के चलते अदायगी नहीं कर पा रहे थे। मौजूदा समय में उनके ऊपर ढाई लाख रुपये का ऋण हो गया था। परंतु लोक अदालत में एक लाख 45 हजार रुपये देकर उन्हें फुर्सत मिल गई। राजेसुल्तानपुर निवासी शैलेन्द्र व उनकी पत्नी के बीच 4 वर्ष से न्यायालय में तलाक का मुकदमा विचाराधीन था। राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायाधीशों के समझाने बुझाने के बाद दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हो गए। इसके बाद न्यायाधीशों ने दंपती के बेहतर जीवन का आशीर्वाद देते घर जाने की सलाह दी।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश पद्म नारायण मिश्र ने किया। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक अनमोल पाल की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में जनपद न्यायाधीश ने एक वाद का निस्तारण किया। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक ने 8 वाद, अपर जिला न्यायाधीश विश्वनाथ ने 32 का निस्तारण करते हुए 4500 रुपये अर्थदण्ड आरोपित किया। विशेष न्यायाधीश रत्नेश मणि त्रिपाठी ने तीन वादों का निस्तारण करते हुए 1500 रुपये, विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट आशीष वर्मा ने एक वाद का निस्तारण कर 500, अपर जिला जज नेहा आनंद ने एक वाद, अपर जिला जज पाक्सो फरीदा बेगम ने 2 वादों का निस्तारण कर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
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अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक पूजा विश्वकर्मा ने 22 वादों का निस्तारण कर 2 दम्पत्तियों को साथ रहने के लिए राजी किया। अपर जिला जज त्वरित अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने 2 वादों का निस्तारण कर 500 रुपये जुर्माना लगाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 33 वर्ष पुराने वाद का निस्तारण किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 20 अदालतों के माध्यम से राजस्व न्यायालयों से जुड़े 18 हजार 305 वाद एवं जनपद के अन्य विभागों के 9 हजार 929 वादों का निस्तारण किया गया। बैंकों के 754 वादों का निस्तारण कराया।
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लोक अदालत में प्री लिटिगेशन के कुल 28 हजार 988 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा न्यायालय से जुड़े 5543 वादों का निस्तारण हुआ। कुल मिलाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में 34 हजार 531 वादों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष चंद्रहास राम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक आशीष सिंह आदि ने विशेष भूमिका निभाई।
मुकदमे से मिली निजात तो दिखी चेहरे पर खुशी
लंबे समय से न्यायालय का चक्कर काट रहे फरियादियों ने शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमे से निजात मिलने पर राहत की सांस ली। अमर उजाला टीम ने ऐसे फरियादियों से मिलकर उनका हाल जाना। राष्ट्रीय लोक अदालत में मिली टांडा निवासिनी तुला देवी ने वर्ष 2016 में व्यापार के लिए बैंक ऋण लिया था। इस बीच कोरोना महामारी आ गई, और उनका व्यापार भी नही चल पाया। इससे वह ऋण की अदायगी भी नही कर पायी। लगातार बढ़ रहे ब्याज से वे परेशान थीं। कुल 85 हजार रुपये का ऋण उनके ऊपर हो गया था। परंतु लोक अदालत में 35 हजार रुपये की अदायगी कर उन्हें ऋण से राहत मिल गई। सिसानी निवासी रवीन्द्र सिंह ने बताया कि 2018 में केसीसी ऋण लिया था। कोरोना महामारी के चलते अदायगी नहीं कर पा रहे थे। मौजूदा समय में उनके ऊपर ढाई लाख रुपये का ऋण हो गया था। परंतु लोक अदालत में एक लाख 45 हजार रुपये देकर उन्हें फुर्सत मिल गई। राजेसुल्तानपुर निवासी शैलेन्द्र व उनकी पत्नी के बीच 4 वर्ष से न्यायालय में तलाक का मुकदमा विचाराधीन था। राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायाधीशों के समझाने बुझाने के बाद दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हो गए। इसके बाद न्यायाधीशों ने दंपती के बेहतर जीवन का आशीर्वाद देते घर जाने की सलाह दी।