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ढाई लाख लोगों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
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अंबेडकरनगर। जिले की लगभग ढाई लाख आबादी के लिए खुशखबरी है। आम लोगों को ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित 50 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को जल्द ही अपना भवन मिलने वाला है। प्रत्येक उपकेंद्र के निर्माण पर 20 लाख रुपये से अधिक की लागत आएगी। इन सभी भवनों के निर्माण पर सरकार 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी। स्वास्थ्य उपकेंद्रों को स्वयं का भवन मिल जाने से न सिर्फ सुविधाएं बढे़ंगी, बल्कि 24 घंटे उपचार की सुविधा भी मिल सकेगी। मौजूदा समय में अलग-अलग क्षेत्रों में 270 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। इनमें से सिर्फ 169 के पास ही अपना भवन है। 101 उपकेंद्र किराए के भवन में जैसे-तैसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार ने अब इनमें से 50 उपकेंद्रों को एक साथ स्थायी भवन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। शासन ने निर्माण इकाई लैकफेड का चयन भी कर लिया है। जल्द ही जिले में इन भवनों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
आम आदमी तक स्वास्थ्य योजनाओं की पहुंच बनाने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। जिला अस्पताल के साथ ही सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन तहसील व ब्लॉक स्तर पर हो रहा है। ग्रामीण व दूरदराज के नागरिकों को बेहतर उपचार का लाभ मिले, इसके लिए सरकार ने 5 से 10 हजार की आबादी पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थापना कर रखी है। जिले में मौजूदा समय में ऐसे 270 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनसे आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। यहां पर एक चिकित्सक, एक एएनएम व अन्य स्टाफ की तैनाती है। उपकेंद्रों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है।
इनमें से 169 केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास ही अपना भवन है। शेष 101 स्वास्थ्य केंद्रों को अब तक अपना भवन नसीब नहीं हो सका है। ऐसे में इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में यहां तैनात चिकित्सक, एएनएम व अन्य स्टाफ को दिक्कतें होती हैं। स्थानाभाव के चलते दवाओं का स्टाक रखने व अन्य संसाधनों की बढ़ोत्तरी में दिक्कत होती है। इससे आम मरीजों को उपकेंद्र का समुचित लाभ नहीं मिल पाता। इससे नागरिकों को खासी दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा मुश्किल रात्रिकालीन सेवाओं को लेकर होती है। कारण यह कि आवास की सुविधा न होने के चलते चिकित्सक व एएनएम वहां रात में नहीं रुक पाते हैं। इससे रात के समय उपचार या फिर प्रसव आदि के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है।
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शासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों को किराए के भवन से निजात दिलाने की पहल शुरू की है। किराए के भवन में चल रहे 101 स्वास्थ्य केंद्रों में से 50 को शासन ने एक साथ अपना भवन मुहैया कराने की मुहिम शुरू की है। प्रत्येक उपकेंद्र के निर्माण पर 20 लाख रुपये से अधिक का खर्च आएगा। इसके लिए शासन 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम खर्च करेगा। भवन निर्माण कार्य तेजी से हो, इसके लिए शासन ने लैकफेड कार्यदायी संस्था को नामित कर दिया है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने उन 50 केंद्रों को चिह्नित कर लिया है, जिन्हें जल्द ही नए भवन की सौगात मिलेगी। शासन के इस निर्णय से लगभग ढाई लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। नागरिकों का कहना है कि उपकेंद्र के पास अपना भवन, चिकित्सकों व एएनएम के लिए आवास की सुविधा होगी तो स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी जाएगी। नागरिकों को न सिर्फ दिन में बल्कि रात्रि के समय भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।
की जा रहीं जरूरी तैयारियां
जिले के 50 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को अपना भवन उपलब्ध कराने की तैयारियां चल रही हैं। उन स्वास्थ्य केंद्रों को चिह्नित कर लिया गया है। शासन ने निर्माणदायी संस्था लैकफेड का चयन कर दिया है। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ायी जा रही है।
-विजय पाल सिंह सहायक अभियंता स्वास्थ्य विभाग
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आम आदमी तक स्वास्थ्य योजनाओं की पहुंच बनाने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। जिला अस्पताल के साथ ही सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन तहसील व ब्लॉक स्तर पर हो रहा है। ग्रामीण व दूरदराज के नागरिकों को बेहतर उपचार का लाभ मिले, इसके लिए सरकार ने 5 से 10 हजार की आबादी पर स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थापना कर रखी है। जिले में मौजूदा समय में ऐसे 270 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनसे आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। यहां पर एक चिकित्सक, एक एएनएम व अन्य स्टाफ की तैनाती है। उपकेंद्रों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है।
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इनमें से 169 केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास ही अपना भवन है। शेष 101 स्वास्थ्य केंद्रों को अब तक अपना भवन नसीब नहीं हो सका है। ऐसे में इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में यहां तैनात चिकित्सक, एएनएम व अन्य स्टाफ को दिक्कतें होती हैं। स्थानाभाव के चलते दवाओं का स्टाक रखने व अन्य संसाधनों की बढ़ोत्तरी में दिक्कत होती है। इससे आम मरीजों को उपकेंद्र का समुचित लाभ नहीं मिल पाता। इससे नागरिकों को खासी दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा मुश्किल रात्रिकालीन सेवाओं को लेकर होती है। कारण यह कि आवास की सुविधा न होने के चलते चिकित्सक व एएनएम वहां रात में नहीं रुक पाते हैं। इससे रात के समय उपचार या फिर प्रसव आदि के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है।
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शासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों को किराए के भवन से निजात दिलाने की पहल शुरू की है। किराए के भवन में चल रहे 101 स्वास्थ्य केंद्रों में से 50 को शासन ने एक साथ अपना भवन मुहैया कराने की मुहिम शुरू की है। प्रत्येक उपकेंद्र के निर्माण पर 20 लाख रुपये से अधिक का खर्च आएगा। इसके लिए शासन 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम खर्च करेगा। भवन निर्माण कार्य तेजी से हो, इसके लिए शासन ने लैकफेड कार्यदायी संस्था को नामित कर दिया है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने उन 50 केंद्रों को चिह्नित कर लिया है, जिन्हें जल्द ही नए भवन की सौगात मिलेगी। शासन के इस निर्णय से लगभग ढाई लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। नागरिकों का कहना है कि उपकेंद्र के पास अपना भवन, चिकित्सकों व एएनएम के लिए आवास की सुविधा होगी तो स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी जाएगी। नागरिकों को न सिर्फ दिन में बल्कि रात्रि के समय भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।
की जा रहीं जरूरी तैयारियां
जिले के 50 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को अपना भवन उपलब्ध कराने की तैयारियां चल रही हैं। उन स्वास्थ्य केंद्रों को चिह्नित कर लिया गया है। शासन ने निर्माणदायी संस्था लैकफेड का चयन कर दिया है। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ायी जा रही है।
-विजय पाल सिंह सहायक अभियंता स्वास्थ्य विभाग