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Ambedkar Nagar News: 285 जर्जर भवनों पर चलेगा बुलडोजर, नीलामी प्रक्रिया शुरू
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जर्जर भवन में संचालित अकबरपुर के रसूलपुर उसरी स्थित प्राथमिक विद्यालय।संवाद
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अंबेडकरनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से अनुपयोगी पड़े और हादसे का खतरा बने 285 जर्जर भवनों को अब ध्वस्त कराया जाएगा। शासन के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इन भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। ध्वस्तीकरण से पहले भवनों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद इन्हें गिराने का काम शुरू होगा।
जिले में 1591 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब डेढ़ लाख बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन विद्यालयों में कई भवन और उनके हिस्से काफी पुराने हो चुके हैं। जर्जर भवनों में पुराने कक्ष, शौचालय, रसोई समेत अन्य ढांचे शामिल हैं। लंबे समय से अनुपयोगी होने के बावजूद ये परिसर में खड़े हैं। बारिश के मौसम में इनसे हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
तेज बारिश और हवा के दौरान कमजोर हो चुके भवनों के हिस्से गिरने की आशंका बनी रहती है। विद्यालयों में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की नियमित आवाजाही होती है। ऐसे में जर्जर ढांचे सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इनके आसपास बच्चों के पहुंचने या खेलने से भी हादसे की आशंका रहती है। बारिश के दौरान पानी भरने और लगातार नमी के कारण भवनों की स्थिति और खराब होने की संभावना रहती है।
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विभाग ने शासन के निर्देश पर ऐसे भवनों को चिह्नित कर लिया है। अब नीलामी की प्रक्रिया पूरी कराकर ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। जर्जर भवनों के हटने से विद्यालय परिसरों में जगह भी खाली होगी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा कम होगा।
विद्यालयों के जर्जर अंश चिह्नित कर लिए गए हैं। इनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द ही ध्वस्तीकरण शुरू कराया जाएगा।-- - - पूनम मिश्रा, बीएसए
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जिले में 1591 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब डेढ़ लाख बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन विद्यालयों में कई भवन और उनके हिस्से काफी पुराने हो चुके हैं। जर्जर भवनों में पुराने कक्ष, शौचालय, रसोई समेत अन्य ढांचे शामिल हैं। लंबे समय से अनुपयोगी होने के बावजूद ये परिसर में खड़े हैं। बारिश के मौसम में इनसे हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
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तेज बारिश और हवा के दौरान कमजोर हो चुके भवनों के हिस्से गिरने की आशंका बनी रहती है। विद्यालयों में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की नियमित आवाजाही होती है। ऐसे में जर्जर ढांचे सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इनके आसपास बच्चों के पहुंचने या खेलने से भी हादसे की आशंका रहती है। बारिश के दौरान पानी भरने और लगातार नमी के कारण भवनों की स्थिति और खराब होने की संभावना रहती है।
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विभाग ने शासन के निर्देश पर ऐसे भवनों को चिह्नित कर लिया है। अब नीलामी की प्रक्रिया पूरी कराकर ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। जर्जर भवनों के हटने से विद्यालय परिसरों में जगह भी खाली होगी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा कम होगा।
विद्यालयों के जर्जर अंश चिह्नित कर लिए गए हैं। इनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द ही ध्वस्तीकरण शुरू कराया जाएगा।