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मंदिरों से लेकर बाजारों तक में तेज हुई वासंतिक नवरात्र पर्व की तैयारी
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अंबेडकरनगर। वासंतिक नवरात्र को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसे लेकर क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों की साफ-सफाई के साथ मां भगवती की प्रतिमाओं की साज सज्जा का काम अंतिम चरण में है। बाजार में पूजा-अर्चना की सामग्री खरीदने के लिए भक्त पहुंचे रहे हैं। इससे बाजारों में नवरात्र पर्व की रौनक दिखने लगी है।
नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं में उल्लास है। नवरात्र में काफी संख्या में भक्त नौ दिन का व्रत न रखने की बजाए प्रथम और अंतिम दिन रखते हैं। नवरात्र पर्व का समापन 13 अप्रैल को होगा। इस दिन चैत्र रामनवमी का पर्व भी धूमधाम से मनेगा। इस पर्व को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा तैयारियों को मुकम्मल करना शुरू कर दिया है।
वासंतिक नवरात्र इस बार छह अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार अष्टमी व नवमी तिथि एक दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिन का है। नवरात्र पर्व का समापन 13 अप्रैल को हवन पूजन व रामनवमी पर्व मनाने के साथ होगा। नवरात्र पर्व के शुभारंभ के साथ इस दिन से ही हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ होगा। नवरात्र को देखते हुए देवी मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
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मंदिरों के रंग रोगन के साथ ही साफ-सफाई का कार्य भी तेज हो गया है। अकबरपुर नगर में स्थित आधा दर्जन से अधिक मंदिरों मेें तैयारियां चल रही हैं। अकबरपुर टांडा रोड स्थित मां दुर्गा का मंदिर हो या फिर तहसील तिराहे के निकट गायत्री मंदिर। शहजादपुर का रामजानकी मंदिर, शहजादपुर शिवाला घाट मंदिर सभी जगह पर नवरात्र पर्व की तैयारियां की जा रही हैं।
दोस्तपुर रोड स्थित काली मंदिर में भी सफाई का कार्य तेज हो गया है। नवरात्र पर्व को लेकर न सिर्फ देवी मंदिरों में कामकाज तेज है, बल्कि घरों व बाजारों में भी तैयारियां जोरों पर हैं। जिला मुख्यालय के अलावा आलापुर, भीटी, जलालपुर में भी नवरात्र पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं।
टांडा नगर के कर्मकांडी विद्वान पं. अजीत शास्त्री बताते हैं कि इस बार मां भगवती घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर सवार होकर विदा होंगी। छह अप्रैल को सुबह 5:47 बजे से नवरात्र का शुभ पर्व प्रारंभ हो जाएगा। 12 अप्रैल की सुबह 10: 18 बजे से 13 अप्रैल की सुबह 8:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। इसके बाद नवमी की तिथि लग जायेगी।
13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। बताया कि भगवान श्रीराम का अवतरण चैत्र नवमी को मध्यान्ह 12 बजे हुआ था। इसलिये श्रीराम जन्मोत्सव 13 अप्रैल को मनाया जायेगा। नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालु व्रत पारण 14 अप्रैल को करेंगे।
कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
पं. अजीत शास्त्री ने बताया कि नवरात्र पर्व में कलश स्थापना शुभ मुहूर्त व शुभ अभिजीत मुहूर्त में किया जाना अति उत्तम होता है। कलश स्थापना छह अप्रैल की सुबह 7:20 बजे से 8:53 बजे तक सर्वोत्तम है। यदि किसी कारण इस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित न हो पाए तो अभिजीत मुहूर्त व पूर्वाह्न 11: 30 से दोपहर 12:18 बजे तक का समय उत्तम है। बताया कि नवरात्र पर मां भगवती के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस पर्व पर मां भगवती की आराधना से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं में उल्लास है। नवरात्र में काफी संख्या में भक्त नौ दिन का व्रत न रखने की बजाए प्रथम और अंतिम दिन रखते हैं। नवरात्र पर्व का समापन 13 अप्रैल को होगा। इस दिन चैत्र रामनवमी का पर्व भी धूमधाम से मनेगा। इस पर्व को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा तैयारियों को मुकम्मल करना शुरू कर दिया है।
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वासंतिक नवरात्र इस बार छह अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार अष्टमी व नवमी तिथि एक दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिन का है। नवरात्र पर्व का समापन 13 अप्रैल को हवन पूजन व रामनवमी पर्व मनाने के साथ होगा। नवरात्र पर्व के शुभारंभ के साथ इस दिन से ही हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ होगा। नवरात्र को देखते हुए देवी मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
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मंदिरों के रंग रोगन के साथ ही साफ-सफाई का कार्य भी तेज हो गया है। अकबरपुर नगर में स्थित आधा दर्जन से अधिक मंदिरों मेें तैयारियां चल रही हैं। अकबरपुर टांडा रोड स्थित मां दुर्गा का मंदिर हो या फिर तहसील तिराहे के निकट गायत्री मंदिर। शहजादपुर का रामजानकी मंदिर, शहजादपुर शिवाला घाट मंदिर सभी जगह पर नवरात्र पर्व की तैयारियां की जा रही हैं।
दोस्तपुर रोड स्थित काली मंदिर में भी सफाई का कार्य तेज हो गया है। नवरात्र पर्व को लेकर न सिर्फ देवी मंदिरों में कामकाज तेज है, बल्कि घरों व बाजारों में भी तैयारियां जोरों पर हैं। जिला मुख्यालय के अलावा आलापुर, भीटी, जलालपुर में भी नवरात्र पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं।
टांडा नगर के कर्मकांडी विद्वान पं. अजीत शास्त्री बताते हैं कि इस बार मां भगवती घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर सवार होकर विदा होंगी। छह अप्रैल को सुबह 5:47 बजे से नवरात्र का शुभ पर्व प्रारंभ हो जाएगा। 12 अप्रैल की सुबह 10: 18 बजे से 13 अप्रैल की सुबह 8:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। इसके बाद नवमी की तिथि लग जायेगी।
13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। बताया कि भगवान श्रीराम का अवतरण चैत्र नवमी को मध्यान्ह 12 बजे हुआ था। इसलिये श्रीराम जन्मोत्सव 13 अप्रैल को मनाया जायेगा। नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालु व्रत पारण 14 अप्रैल को करेंगे।
कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
पं. अजीत शास्त्री ने बताया कि नवरात्र पर्व में कलश स्थापना शुभ मुहूर्त व शुभ अभिजीत मुहूर्त में किया जाना अति उत्तम होता है। कलश स्थापना छह अप्रैल की सुबह 7:20 बजे से 8:53 बजे तक सर्वोत्तम है। यदि किसी कारण इस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित न हो पाए तो अभिजीत मुहूर्त व पूर्वाह्न 11: 30 से दोपहर 12:18 बजे तक का समय उत्तम है। बताया कि नवरात्र पर मां भगवती के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस पर्व पर मां भगवती की आराधना से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।