फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   कौन बनेगा इस बार मायावती की पसंदीदा सीट का किंग

कौन बनेगा इस बार मायावती की पसंदीदा सीट का किंग

Mon, 11 Mar 2019 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 11 Mar 2019 11:03 PM IST
विज्ञापन
कौन बनेगा इस बार मायावती की पसंदीदा सीट का किंग
अश्विनी मिश्र
विज्ञापन


अंबेडकरनगर। जिले की जिस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व बसपा सुप्रीमों मायावती कर चुकी हैं, उस सीट को वापस बसपा की झोली में डालने की चुनौती इस बार बसपा व सपा गठबंधन के सामने है। गठबंधन से जुड़े कार्यकर्ता हालांकि मुकाबले को काफी आसान मान रहे हैं, लेकिन मौजूदा सीट पर कब्जा रखने वाली भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास व सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों के चलते पार्टी का कब्जा इस बार भी सीट पर बना रहेगा। कांग्रेस के कार्यकर्ता भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए मजबूत दावेदार उतारने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

बसपा के गढ़ के तौर पर माने जाने वाले अंबेडकरनगर जिले में बीता लोकसभा चुनाव बसपा के लिए तगड़ा झटका लेकर आया। 29 सिंतबर 1995 को अंबेडकरनगर नाम से नए जनपद गठन से पहले यहां की इकलौती संसदीय सीट अकबरपुर सुरक्षित के नाम से जानी जाती थी। परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई और इसका नाम बदलकर अंबेडकरनगर हो गया। अकबरपुर संसदीय सीट पर बसपा का खाता सबसे पहले वर्ष 1996 में तब खुला था, जब घनश्याम चन्द्र खरवार सांसद चुने गए। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में भी बसपा ने अपनी धाक जमानी शुरू कर दी।
विज्ञापन


बसपा ने इस जिले में इस तरह अपना वर्चस्व स्थापित किया कि विधानसभा चुनावों में सभी पांच सीटों पर उसके विधायक चुन लिए गए। बसपा का गढ़ बनने के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती तीन बार यहां से चुनाव लड़ीं और तीनों बार विजयी रहीं। मायावती ने एक बार सीट छोड़ी तो त्रिभुवन दत्त बसपा प्रत्याशी के तौर पर उपचुनाव जीत गए। हालांकि जब दोबारा उन्होंने सीट छोड़ा तो हुए उपचुनाव में त्रिभुवन दत्त को सपा प्रत्याशी शंखलाल मांझी के हाथों पराजित होना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद हुए अंबेडकरनगर सामान्य सीट के चुनाव में बसपा नेता राकेश पांडेय ने फिर से बसपा का झंडा लहरा दिया। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर हरिओम पाण्डेय ने सीट बसपा से छीन ली। अब मौजूदा लोकसभा चुनाव में सपा बसपा गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर बसपा के ही किसी उम्मीदवार का चुनाव लड़ना तय है। ऐसे में बसपा के सामने यह चुनौती है कि वह फिर से अपने गढ़ की लोकसभा सीट अपने पाले में कर ले। हालांकि भाजपा कार्यकर्ताओं की मानें तो विकास, सर्जिकल स्ट्राइक व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के आगे गठबंधन टिक नहीं पाएगा। इन सब के बीच कांग्रेस कार्यकर्ता भी महासचिव प्रियंका गांधी के दौरों को लेकर उत्साहित हैं। उनके अनुसार मुकाबला यहां त्रिकोणीय होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed