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261 राजस्व गांव अभी तक नहीं हो सके हैं ओडीएफ
Updated Mon, 01 Oct 2018 11:05 PM IST
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अंबेडकरनगर। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत जिले के 261 राजस्व गांव जहां ओडीएफ घोषित होना शेष हैं, वहीं 11 हजार 581 शौचालयों का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। 1651 राजस्व गांवों के सापेक्ष जिन 1396 राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उसे लेकर भी लगातार प्रश्नचिंह खड़े हो रहे हैं। इतना ही नहीं, 1 लाख 71 हजार 183 शौचालयों के सापेक्ष जिन 1 लाख 59 हजार 602 शौचालयों का निर्माण हुआ है, उनमें से तमाम ऐसे हैं, जिनका प्रयोग स्टोर रूम या फिर उपला रखने में किया जा रहा है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की भी गई, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। नतीजा यह है कि कुछ शौचालय ऐसे हैं, जो निर्माण के बाद ही क्षतिग्रस्त होने लगे हैं।
गौरतलब है कि पूर्व में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत प्रदेश को ओडीएफ किए जाने लक्ष्य दिया गया था। ज्यादातर जिले के सभी गांवों को ओडीएफ घोषित न किए जाने के चलते इस तिथि को बढ़ाकर अब 30 नवंबर कर दिया गया है। बताते चलें कि योजना के तहत जिले के 1 हजार 651 राजस्व गांवों को ओडीएफ किए जाने का लक्ष्य दिया गया था। जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक 1396 राजस्व गांवों को ओडीएफ किया जा चुका है। 261 गांवों को अभी भी ओडीएफ किया जाना शेष है। इसी प्रकार 1 लाख 71 हजार 183 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1 लाख 59 हजार 602 शौचालयों का निर्माण हो सका है। 11 हजार 581 शौचालयों का निर्माण होना शेष है।
जिन 1396 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उनमें से ज्यादातर पर प्रश्नचिंह लग रहा है। आरोप है कि ओडीएफ घोषित करने में मनमानी बरती गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा ने कहा कि आधे अधूरे शौचालय निर्माण के बीच ही जल्दबाजी में कुछ राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। इसकी जांच कराए जाने की जरूरत है। उधर जिन शौचालयों का निर्माण हो चुका है, उनका प्रयोग करने को लेकर भी जागरूकता अभियान भी सुचारु रूप से नहीं चलाया गया। जागरूकता की कमी का ही नतीजा है कि कई क्षेत्रों में शौचालय का प्रयोग लोग स्टोर रूम या फिर उपले रखने में कर रहे हैं।
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स्टोर रूम के रूप में हो रहा शौचालय का उपयोग
जिन राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जहां लोग शौचालय का प्रयोग उपले रखने में कर रहे हैं। स्वच्छता ग्राही शबीना खातून ने कहा कि अहिरौली गोविंद साहब, गोपालपुर, महमूदपुर समेत एक दर्जन गांव के निरीक्षण में कई शौचालय ऐसे मिले, जिनका प्रयोग उपला रखने में किया जा रहा था। इस पर टीम ने संबंधित व्यक्तियों को जागरूक करते हुए शौचालय से उपला निकलवाया गया। साथ ही उन्हें खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी। स्वच्छता ग्राही शिवकुमार मिश्र ने कहा कि बीते दिनों उन्होंने पकड़ी भोजपुर, गदायां समेत आधा दर्जन गांवों का निरीक्षण किया था। यहां कई शौचालयों का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। उनका प्रयोग लकड़ी रखने या फिर स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा था। इस पर संबंधित लोगों को जागरूक करते हुए उन्हें खुले में शौच न करने व शौचालय का प्रयोग करने से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी।
तय समय में पूर्ण होगा निर्माण का कार्य
30 नवंबर तक जिले को ओडीएफ किए जाना है। निर्धारित समयावधि में शौचालयों का निर्माण कराकर सभी राजस्व गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा। शौचालय का उपयोग करने को लेकर समय समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। -रामअशीष चौधरी, डीपीआरओ
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गौरतलब है कि पूर्व में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत प्रदेश को ओडीएफ किए जाने लक्ष्य दिया गया था। ज्यादातर जिले के सभी गांवों को ओडीएफ घोषित न किए जाने के चलते इस तिथि को बढ़ाकर अब 30 नवंबर कर दिया गया है। बताते चलें कि योजना के तहत जिले के 1 हजार 651 राजस्व गांवों को ओडीएफ किए जाने का लक्ष्य दिया गया था। जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक 1396 राजस्व गांवों को ओडीएफ किया जा चुका है। 261 गांवों को अभी भी ओडीएफ किया जाना शेष है। इसी प्रकार 1 लाख 71 हजार 183 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1 लाख 59 हजार 602 शौचालयों का निर्माण हो सका है। 11 हजार 581 शौचालयों का निर्माण होना शेष है।
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जिन 1396 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उनमें से ज्यादातर पर प्रश्नचिंह लग रहा है। आरोप है कि ओडीएफ घोषित करने में मनमानी बरती गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा ने कहा कि आधे अधूरे शौचालय निर्माण के बीच ही जल्दबाजी में कुछ राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। इसकी जांच कराए जाने की जरूरत है। उधर जिन शौचालयों का निर्माण हो चुका है, उनका प्रयोग करने को लेकर भी जागरूकता अभियान भी सुचारु रूप से नहीं चलाया गया। जागरूकता की कमी का ही नतीजा है कि कई क्षेत्रों में शौचालय का प्रयोग लोग स्टोर रूम या फिर उपले रखने में कर रहे हैं।
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स्टोर रूम के रूप में हो रहा शौचालय का उपयोग
जिन राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जहां लोग शौचालय का प्रयोग उपले रखने में कर रहे हैं। स्वच्छता ग्राही शबीना खातून ने कहा कि अहिरौली गोविंद साहब, गोपालपुर, महमूदपुर समेत एक दर्जन गांव के निरीक्षण में कई शौचालय ऐसे मिले, जिनका प्रयोग उपला रखने में किया जा रहा था। इस पर टीम ने संबंधित व्यक्तियों को जागरूक करते हुए शौचालय से उपला निकलवाया गया। साथ ही उन्हें खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी। स्वच्छता ग्राही शिवकुमार मिश्र ने कहा कि बीते दिनों उन्होंने पकड़ी भोजपुर, गदायां समेत आधा दर्जन गांवों का निरीक्षण किया था। यहां कई शौचालयों का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। उनका प्रयोग लकड़ी रखने या फिर स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा था। इस पर संबंधित लोगों को जागरूक करते हुए उन्हें खुले में शौच न करने व शौचालय का प्रयोग करने से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी।
तय समय में पूर्ण होगा निर्माण का कार्य
30 नवंबर तक जिले को ओडीएफ किए जाना है। निर्धारित समयावधि में शौचालयों का निर्माण कराकर सभी राजस्व गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा। शौचालय का उपयोग करने को लेकर समय समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। -रामअशीष चौधरी, डीपीआरओ