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समान कार्य, समान वेतन की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने भरी हुंकार
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:04 AM IST
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समान कार्य, समान वेतन की मांग को लेकर बिफरे शिक्षामित्र
अंबेडकरनगर। शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा ने बुधवार को कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया। कहा गया कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने की घोषणा की है लेकिन यह कतई मंजूर नहीं है। जब तक समान कार्य, समान वेतन नहीं दिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों के अनुरूप प्रदेश सरकार ने घोषणा नहीं की तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाद में शिक्षामित्रों ने उस प्रति को फूंका जिसमें प्रदेश सरकार ने 10 हजार रुपये दिए जाने की घोषणा की थी।
जिला संयोजक केके दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों को गुमराह कर रही है। गत दिनों जब शिक्षामित्रों ने आंदोलन शुरू किया था तो उन्हें मांगों के संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। अब प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों की सभी मांगों को दरकिनार करते हुए 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की घोषणा की है। वह भी मात्र 11 माह तक ही दिया जाएगा। शिक्षामित्रों को यह कतई मंजूर नहीं है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को धोखा दिया है। समान कार्य, समान वेतन के नीचे कोई समझौता नहीं होगा। सहसंयोजक मंशाराम मौर्य ने कहा कि न तो संविदा शिक्षक के रूप में मंजूर है और न ही 10 हजार रुपये। जब शिक्षामित्र पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं तो उन्हें 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। शिक्षकों के समान ही वेतन दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों की मांगें पूरी करनी ही होंगी। यदि शीघ्र ही इस तरफ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाद में 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने के आदेश की प्रति को फूंका गया। इस दौरान सुरेंद्र यादव, दिनेश त्रिपाठी, सुनील सिंह, कमलेश सिंह, राममूरत व राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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अंबेडकरनगर। शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा ने बुधवार को कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया। कहा गया कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने की घोषणा की है लेकिन यह कतई मंजूर नहीं है। जब तक समान कार्य, समान वेतन नहीं दिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों के अनुरूप प्रदेश सरकार ने घोषणा नहीं की तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाद में शिक्षामित्रों ने उस प्रति को फूंका जिसमें प्रदेश सरकार ने 10 हजार रुपये दिए जाने की घोषणा की थी।
जिला संयोजक केके दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों को गुमराह कर रही है। गत दिनों जब शिक्षामित्रों ने आंदोलन शुरू किया था तो उन्हें मांगों के संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। अब प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों की सभी मांगों को दरकिनार करते हुए 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की घोषणा की है। वह भी मात्र 11 माह तक ही दिया जाएगा। शिक्षामित्रों को यह कतई मंजूर नहीं है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को धोखा दिया है। समान कार्य, समान वेतन के नीचे कोई समझौता नहीं होगा। सहसंयोजक मंशाराम मौर्य ने कहा कि न तो संविदा शिक्षक के रूप में मंजूर है और न ही 10 हजार रुपये। जब शिक्षामित्र पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं तो उन्हें 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। शिक्षकों के समान ही वेतन दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों की मांगें पूरी करनी ही होंगी। यदि शीघ्र ही इस तरफ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाद में 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने के आदेश की प्रति को फूंका गया। इस दौरान सुरेंद्र यादव, दिनेश त्रिपाठी, सुनील सिंह, कमलेश सिंह, राममूरत व राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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