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यमुना में तो दिल्ली ने फैलाई गंदगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 03 Sep 2015 02:27 AM IST
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इलाहाबाद। गंगा-यमुना में सफाई के मुद्दे पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। बोले, सिर्फ कह देने से गंगा-यमुना साफ नहीं होने वाली है। इलाहाबाद तक यमुना का पानी पहुंचता ही नहीं है। केन, बेतवा, चंबल जैसी नदियों ने यमुना का अस्तित्व बचाकर रखा है। यमुना तो दिल्ली में ही खत्म हो जाती है, इसीलिए इसमें गंदगी के लिए दिल्ली ही जिम्मेदार है। दिल्ली में यमुना का पानी न सिर्फ काला बल्कि दुर्गंधयुक्त है लेकिन दिल्ली और केंद्र सरकार इसे लेकर कतई गंभीर नहीं है। नदियों से पहले शहरों को साफ करना होगा और इसके लिए इंतजाम करने होंगे।
नैनी के सड़वा गांव में बुधवार को सरस्वती हाईटेक सिटी का भूमि पूजन करने पहुंचे सीएम अखिलेश यादव ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की मेरिट में शामिल इलाहाबाद के 20 विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे। कहा, लैपटॉप वितरण पर उंगली उठाने वाले भाजपाई भूल गए कि मोदी डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं और बिना लैपटॉप डिजिटल इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा। जमीन अधिग्रहण के मसले पर कहा, केंद्र सरकार किसानों की जमीन हड़पना चाहती है जबकि सपा सरकार ने किसानों की सहमति से हाईवे के लिए जमीन ली।
स्मार्ट सिटी की आड़ में भी भाजपा सियासत कर रही है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया 13 अंक को अशुभ मानती है, केंद्र सरकार इसे शुभ मानकर यूपी में 13 स्मार्ट सिटी के लिए अड़ी है, जबकि प्रदेश सरकार का मानना है कि यूपी में कम से कम 15 स्मार्ट सिटी होनी चाहिए।
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किसी भी शहर का स्मार्ट सिटी के रूप में विकास प्रदेश सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं है। यूपी में सपा सरकार हर तरह से सहयोग को तैयार है। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सफाई दी कि जरूरतमंद परिवार की महिलाओं को साड़ी वितरण की व्यवस्था इसलिए लागू नहीं की गई क्योंकि पसंद की साड़ी नहीं मिली तो महिलाएं नाराज होंगी। इसके बदले समाजवादी पेंशन योजना शुरू की गई। इससे प्रदेश में अब तक 45लाख महिलाओं को जोड़ा जा चुका है। गरीबों को किडनी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज लिए सरकारी खजाने से मदद मुहैया कराई जाएगी।
सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि हम कितने भी ईमानदार, डेमोक्रेटिक और लिबरल हों, थोड़ी सी बेइमानी पर सीधे सरकार पर उंगली उठती है। ऐसे में जरूरी है कि कार्यकर्ता पूरी ईमानदारी से काम करें। हमारी अच्छाइयां कोई नहीं देखाता। थोड़ी सी गलती को बढ़चढ़ाकर पेश किया जाता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
सीएम ने कहा कि महंगाई सिर्फ शहरों में है, गांवों में नहीं। किसान जो उत्पादन करते हैं, वह शहरों तक नहीं पहुंच पाता और न ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलता है। इस दिशा में सुधार के लिए प्रदेश सरकार ने काम शुरू किया है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, इंडस्ट्रीज की स्थापना सहित तमाम योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।
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नैनी के सड़वा गांव में बुधवार को सरस्वती हाईटेक सिटी का भूमि पूजन करने पहुंचे सीएम अखिलेश यादव ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की मेरिट में शामिल इलाहाबाद के 20 विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे। कहा, लैपटॉप वितरण पर उंगली उठाने वाले भाजपाई भूल गए कि मोदी डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं और बिना लैपटॉप डिजिटल इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा। जमीन अधिग्रहण के मसले पर कहा, केंद्र सरकार किसानों की जमीन हड़पना चाहती है जबकि सपा सरकार ने किसानों की सहमति से हाईवे के लिए जमीन ली।
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स्मार्ट सिटी की आड़ में भी भाजपा सियासत कर रही है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया 13 अंक को अशुभ मानती है, केंद्र सरकार इसे शुभ मानकर यूपी में 13 स्मार्ट सिटी के लिए अड़ी है, जबकि प्रदेश सरकार का मानना है कि यूपी में कम से कम 15 स्मार्ट सिटी होनी चाहिए।
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किसी भी शहर का स्मार्ट सिटी के रूप में विकास प्रदेश सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं है। यूपी में सपा सरकार हर तरह से सहयोग को तैयार है। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सफाई दी कि जरूरतमंद परिवार की महिलाओं को साड़ी वितरण की व्यवस्था इसलिए लागू नहीं की गई क्योंकि पसंद की साड़ी नहीं मिली तो महिलाएं नाराज होंगी। इसके बदले समाजवादी पेंशन योजना शुरू की गई। इससे प्रदेश में अब तक 45लाख महिलाओं को जोड़ा जा चुका है। गरीबों को किडनी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज लिए सरकारी खजाने से मदद मुहैया कराई जाएगी।
सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि हम कितने भी ईमानदार, डेमोक्रेटिक और लिबरल हों, थोड़ी सी बेइमानी पर सीधे सरकार पर उंगली उठती है। ऐसे में जरूरी है कि कार्यकर्ता पूरी ईमानदारी से काम करें। हमारी अच्छाइयां कोई नहीं देखाता। थोड़ी सी गलती को बढ़चढ़ाकर पेश किया जाता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
सीएम ने कहा कि महंगाई सिर्फ शहरों में है, गांवों में नहीं। किसान जो उत्पादन करते हैं, वह शहरों तक नहीं पहुंच पाता और न ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलता है। इस दिशा में सुधार के लिए प्रदेश सरकार ने काम शुरू किया है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, इंडस्ट्रीज की स्थापना सहित तमाम योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।